दस वर्षों से नहर में नहीं आया पानी

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बाराबंकी। पिछले दो साल से लगातार सूखा पड़ रहा है, ऐसे में किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह से नहरों पर आश्रित हो गए है। वहीं नहरों में भी पिछले दस वर्ष से भी अधिक समय से पानी नहीं आ रहा है। 

बाराबंकी जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी. दूर निन्दूरा ब्लॉक से पूरब दिशा में स्थित करुआ गाँव की नहर में पिछले दस साल से पानी नहीं आया। ऐसे में किसान इंजन से सिंचाई करते हैं। करुआ गाँव के ही राम कृपाल (50 वर्ष) बताते हैं, “हमारे गाँव में लगभग 300 बीघे में खेती होती है। दस साल से नहर में पानी नहीं आया। अब यहां पूरी तरह से इंजन से ही सिंचाई होती है।”

नहर पानी न आने से किसान अब डीजल इंजन लगाने लगे हैं। पूरे गाँव में लगभग 45 इंजन लगे हुए हैं। राम कृपाल आगे बताते हैं, “एक इंजन को लगाने में लगभग पचास हजार रुपए लागत आती है। जो किसान सक्षम हैं वो तो इंजन लगवा रहे हैं, जो गरीब किसान हैं वो दूसरों के इंजन से ही सिंचाई करते हैं।” 

इसी गाँव में रहने वाले प्यारे रावत (40 वर्ष) कहते हैं, “पूरे गाँव में लगभग 45 इंजन लगे हुए हैं, अगर बारिश नहीं होती है तो पूरे गाँव की धान की सिंचाई इन्हीं इंजन से होती है, कई बार धान की सिंचाई के समय कई दिनों बाद भी नम्बर नहीं लगता, इससे फसल को समय से पानी नहीं मिल पाता और पैदावार में फर्क पड़ता है। जितने की फसल नहीं होती उससे ज्यादा लागत लग जाती है।

“पूरी धान की फसल में दस पानी लगाने पड़ते हैं, प्रति घंटा एक सौ बीस रुपए पड़ते हैं और एक बीघे धान में तीन घंटे लग जाते हैं” ये कहना है सुफिया (32 वर्ष) का। सुफिया आगे बताती हैं, “हमारे पास तो खेत हैं नहीं, हम पूरी खेती बंटाई पर करते हैं, सिंचाई में ही खूब सारे पैसे खर्च हो जाते हैं। जितनी एक बीघे धान में लागत लगाते हैं, पैदावार उतनी नहीं होती। नहर में पानी न आने की वजह से हालात ये हैं कि खेती में जितनी लागत लगाते हैं, फसल से लागत का भी पैसा नहीं निकल रहा है।” नरेश यादव (60 वर्ष) बताते हैं, “नहर की सफाई तो होती है, लेकिन पानी नहीं आता है, हम गाँव वालों ने कई बार शिकायत भी की, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। कभी नहर में पानी आएगा भी अब तो हम किसानों ने उम्मीद ही छोड़ दी है।”

सोनम देवी

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क  

सुभाषचंद्र बोस राजकीय महिला महाविद्यालय  

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