दस्तरख़ान में सज रहा है फास्टफूड

दस्तरख़ान में सज रहा है फास्टफूडgaonconnection

लखनऊ। बदलते दौर में बच्चों और युवाओं के बदलते जायके के चलते रमजान में इफ्तारी का मिजाज़ भी बदलता जा रहा है। कुछ वर्ष पहले इफ्तारी के समय जहां दस्तरखान पर पारंपरिक जायकों को परोसा जाता था, उसकी जगह आज फास्टफूड ने ले ली है। मुस्लिम धर्म का रमजान एक पवित्र महीना माना जाता है और सहरी और इफ्तारी इस महीने के दो ऐसे वक्त होते हैं जिसमें नमाजी कुछ खाकर ही खुदा की इबादत करते हैं।

पहले के दौर में इफ्तार की बात करो तो याद आता है दस्तरखान पर सजे पकौड़े, छोले, चना दाल, सेंवई, चने, आलू-कचालू जैसे तरह-तरह के पारंपरिक जायके लेकिन इनकी जगह अब ले ली है चाउमीन, बर्गर, पिज्जा, फ्राइड राइज, फ्रूट चाट, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक जैसे अन्य जायकों ने।

बालागंज निवासी मो. कौसर अब्बास (46 वर्ष) कहते हैं, “मैं जब छोटा था तब रोजा पूरा होने के बाद इफ्तार का इंतजार बेसब्री से करता था क्योंकि तरह-तरह के जायके जो कि आमतौर पर त्योहार पर चखने को मिलते हैं वह इफ्तार में चखने को मिलते थे लेकिन आज मेरे बच्चे उन सब जायकों को चखने में रुचि नहीं रखते। वह तो उन जायकों को चखना चाहते हैं जो फास्टफूड में शामिल हैं। वह भी तब जबकि वह इन जायकों को अक्सर ही चखा करते हैं लेकिन बच्चे दिन भर रोजा रखते हैं इसलिए उनकी मर्जी के अनुसार हमें भी यह सब खाना पड़ता है।”

वहीं लखनऊ में बाहरी शहर से आकर एक कंपनी में काम करने वाले आलमबाग निवासी मो. जुबैर (30 वर्ष) कहते हैं, “घर वाले बाहर हैं, मैं यहां अकेला रहता हूं। रोजा रखता हूं और इफ्तार शाम को होता है इसलिए ऑफिस में करना पड़ता है। इसलिए पारंपरिक जायके तो चख नहीं सकता। ऐसे में कहीं से भी फ्रैन्की, फ्राइड राइज और कोल्ड ड्रिंक ही ले लेता हूं जो आसानी से मिल जाती है। दौर बदल रहा है और जरूरतें भी इसलिए समय के अनुसार हर किसी को बदलना ही चाहिए।”

पुराने दौर के कुछ बुजुर्ग इन जायकों का लुत्फ इफ्तार के समय उठाने को सही नहीं मानते लेकिन दूसरी ओर शिया और सुन्नी धर्म गुरु इसमें कुछ भी गलत नहीं मानते हैं। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्वे जव्वाद इफ्तार के इस बदलते स्वरूप को बुरा नहीं समझते। वह कहते हैं कि इंसान इफ्तार के समय उन जायकों को नहीं चखना चाहिये जो हमारे धर्म में हराम मानी जाती हैं, जैसे की शराब, इसके अलावा इफ्तार में जिसका जो भी खाने का मन करे उसके लिए कोई मनाही नहीं है। 

रिपोर्टर - मीनल टिंगल

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