दुधवा के पर्यटन को चार चाँद लगाएगा 'थारु शिल्पग्राम'

दुधवा के पर्यटन को चार चाँद लगाएगा थारु शिल्पग्रामगाँव कनेक्शन, थारु शिल्पग्राम

लखीमपुर खीरी यूपी सरकार दुधवा टाइगर रिजर्व आने वाले सैलानियों को नया तोहफा देने जा रही है। दुधवा की गोद में बसे थारु इलाके में अब 'थारु शिल्पग्राम' बनेगा। भारत सरकार ने प्रदेश सरकार को मंजूरी दे दी है। अब सवा करोड़ की लागत से चंदनचौकी में 30 हजार वर्ग मीटर जगह में शिल्पग्राम बनेगा। 

दुधवा टाइगर रिजर्व के बीच में बसे थारुओं के दो दर्जन गाँव हैं। थारु जनजाति की अपनी अलग संस्कृति है, कला है। पर इस संस्कृति को दुधवा के पर्यटन से जोड़ने के प्रयास पहले कभी नहीँ हुए थे। मुख्यमन्त्री बनने के बाद अखिलेश यादव ने वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को विकसित करने की पहल की। इसी कड़ी में लखीमपुर खीरी के युवा आईएएस नीतीश कुमार ने थारु शिल्पग्राम बनाने का अनूठा प्रोजेक्ट बार्डर डेवलेपमेंट प्लान के तहत यूपी सरकार को भेजा। नियोजन विभाग में इसके लिए कोई अलग से मद नहीँ था इसलिए प्रोजेक्ट को भारत सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया। भारत सरकार ने न केवल इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी बल्कि सराहा भी। 

खीरी के सीडीओ नीतीश कुमार कहते हैं, "थारु संस्कृति खीरी दुधवा ही नही यूपी की पहचान है। इसको संस्कृति परम्परा से जोड़ते हुए रोजगार के अवसर तलाशने की भी जरूरत थी। दुधवा टाइगर रिजर्व के सैलानी बड़े मददगार साबित होंगे थारुओं के सामाजिक और आर्थिक विकास में। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सैलानी भी थारु संस्कृति से शिल्पग्राम आकर रूबरू होंगे। इसी कानसेप्ट पर पूरा प्रोजेक्ट बनाया गया है।"

'थारु शिल्पग्राम' एक करोड़ 24 लाख की लागत से बनेगा। सरकार ने 74.42लाख की पहली किश्त भी जारी कर दी है। शिल्पग्राम में थारुओं की कला संस्कृति को प्रदर्शित किया ही जाएगा। सैलानियों के लिए थारु नृत्य और गीत भी प्रस्तुत किए जाएंगे। एक थारु रेस्त्रां भी बनेगा जिसमे थारु पकवान भी बनेंगे। थारुओं की हस्तकला से बने उत्पाद भी इसपर बिकेंगे। जिससे थारुओं को रोजगार और आर्थिक उन्नति होगी। दुधवा के पर्यटकों को भी एक नया अनुभव  मिलेगा शिल्पग्राम में। जो वो अपने साथ यादों के रूप में अपने साथ ले जा सकेंगे। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

रिपोर्टिंग - विपुल मिश्रा

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