कभी न भूलने वाली तबाही की वो दास्तां...

कभी न भूलने वाली तबाही की वो दास्तां...आंकड़ों के अनुसार 8 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी

लखनऊ। 25 अप्रैल 2015 सुबह 11 बजकर 56 मिनट...8.1 तीव्रता का भूकंप का झटका नेपाल में आया। यह झटका इतना तेज था कि इससे आई तबाही के निशान आज भी नेपाल में मौज़ूद हैं। यूं तो बुरी घटनाओं को भूल जाना ही बेहतर होता है लेकिन कुछ हादसे ऐसे होते हैं जिन्हें कभी नहीं भूला जा सकता। पड़ोसी देश नेपाल में आया यह प्रचंड तीव्रता वाला भूकंप भी उन हृदयविदारक घटनाओं में से एक है जिन्हें भूलना नामुमकिन है।

नेपाल से 35 किलोमीटर दूर लामगुंज में इस भूकंप का अधिकेंद्र था और इसकी गहराई 15 किलोमीटर नीचे थी। भूकंप के झटके भारत, बांग्लादेश, चीन और पाकिस्तान में भी महसूस किए गए थे। चीनी भूकंप नेटवर्क केंद्र द्वारा इस भूकंप की शुरुआती तीव्रता 8.1 नापी गई थी। भूकंप के अधिकेंद्र लामगुंज से सबसे नजदीक (35 किलोमीटर) शहर नेपाल का भरतपुर था। यही वह शहर था जहां इस भूकंप से सबसे ज्यादा तबाही हुई थी। शुरुआत में 2 तेज झटकों के बाद अगले तनी दिनों में लगभग 35 कम तीव्रता वाले झटके नेपाल में महसूस किए गए।

हुई थीं हजारों मौतें

भूकंप आने के बाद कई दिनों तक राहत और बचाव कार्य जारी रहा। इसके बाद 8 मई को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 8 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और लगभग 16,000 से ज्यादा घायल हुए थे। जबकि नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री का बयान आया था कि इस तबाही में 10,000 लोग मारे गए हैं। कई लोग लापता हुए थे और कई बच्चे अनाथ हो गए थे।

बचाव और राहत कार्य में जवानों ने बहुत साथ दिया था

मरने वालों में थे पर्वतारोही भी

जब भूकम्प आया तब एवरेस्ट पर्वत पर सैकड़ों पर्वतारोही चढ़ाई कर रहे थे। भूकंप के तेज़ झटकों की वजह से बर्फ की परतें खिसकने लगी और भूसख्लन शुरू हो गया जिसमें 17 से ज्यादा पर्वतारोही मारे गए। नेपाली अधिकारियों के अनुसार बर्फ की विशाल चट्टानें नीचे की तरफ तेजी से गिरती रहीं जिसकी वजह से एवेऱेस्ट का बेस कैंप तबाह हो गया और ३७ से ज्यादा लोग घायल हो गए। खबरों के अनुसार भारतीय सेना की पर्वतारोही टुकड़ी ने 18 शव निकाले थे।

ध्वस्त हो गई थीं कई विश्व धरोहरें

भूकंप ने नेपाल में ऐसी तबाही मचाई थी कि यहां की विश्व धरोहरें तक मिट्टी में मिल गईं। वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल यहां की सात धरोहरों का 90 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह ध्वस्त हो गया । इसके अलावा भी सैकड़ों बड़े मंदिरों, मठों और विरासतों को भारी नुकसान पहुंचा। भूकंप में सबसे ज्यादा नुकसान यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल नेपाल के पुरातात्विक स्थलों को हुआ है। तीन धरोहरों का नामो निशान भी मिट गया है, जिनमें बसंतपुरा दरबार, धरहरा मीनार, चांगू नारायण का विष्णु मंदिर शामिल है। इसके अलावा भक्तपुर का दरबार चौक, भगवान बुद्ध की मूर्तियों वाला स्वयंभू परिक्षेत्र, पाटन दरबार क्षेत्र, हनुमान ढोका संरक्षित क्षेत्र को भी काफी नुकसान पहुंचा था।

भूकंप के पहले और बाद की धरहरा मीनार

10 फीट आगे खिसक गया काठमांडू

यह भूकंप इतना तीव्र था कि इससे काठमांडू शहर लगभग 10 फीट यानि 3 मीटर आगे खिसक गया। विशेषज्ञों का कहना था कि काठमांडू घाटी के नीचे करीब 150 किलोमीटर (93 मील) और 50 किलोमीटर चौड़ा क्षेत्र दशकों के दवाब के आगे टिक नहीं सका और फॉल्ट लाइन के ऊपर की चट्टानें नीचली चट्टनों से दक्षिण की ओर खिसक गईं।

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