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मुश्किल में सांसें, दुनियाभर के 80 फीसदी शहर वायु प्रदूषण के चपेट में 

Kushal MishraKushal Mishra   10 Nov 2017 6:04 PM GMT

मुश्किल में सांसें, दुनियाभर के 80 फीसदी शहर वायु प्रदूषण के चपेट में फोटो: इंटरनेट

नई दिल्ली। एक तरफ जहां नई दिल्ली में इन दिनों वायु प्रदूषण का खतरनाक स्तर भारत में सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है, वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ की हालिया रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि दुनियाभर के 80 फीसदी शहर वायु प्रदूषण की चपेट में है और इन शहरों में निर्धारित मानकों से ज्यादा हवा प्रदूषित हो चुकी है।

सिगरेट से ज्यादा खतरनाक वायु प्रदूषण

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण की वजह से वैश्विक स्तर पर मरने वालों की संख्या में इजाफ़ा हुआ है, इसने ह्दय रोग और धूम्रपान से होने वाली मौत की संख्या को भी पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट में आंकड़ों की मानें तो सिगरेट पीने से मरने वालों की संख्या 60 लाख है, जबकि वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या 65 लाख है।

विकासशील देशों में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक

अध्ययन में 1990 से 2013 के बीच 188 देशों में स्वास्थ्य और वायु प्रदूषण जैसे खतरनाक कारकों का विश्लेषण किया गया। इसमें दुनिया की 85 प्रतिशत से ज्यादा आबादी उन इलाकों में रहती है, जहां वायु प्रदूषण के विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षित स्तर से ज्यादा वायु प्रदूषण है। इसमें बताया गया कि वर्ष 2012 में प्रदूषित हवा के कारण करीब 70 लाख लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा, जिसमें से 88 प्रतिशत मौतें विकासशील देशों में हुई।

भारत और चीन में वायु सबसे ज्यादा प्रदूषित

रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश चीन और भारत में वायु सबसे ज्यादा दूषित है। चीन की बात करें तो वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण कोयला जलने से उत्सर्जित होने वाले कण हैं। इसके कारण वहां हर साल 3,60,000 मौतें होती हैं। हाल में ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2017’ की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया कि विश्व में वायु प्रदूषण की वजह से होने वाली असमय मौतें सबसे ज्यादा भारत और चीन में हुई हैं। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्रदूषण से होने वाली मौतों के मामले में भारत लगभग चीन के करीब पहुंच चुका है।

वायु प्रदूषण चौथा सबसे बड़ा कारक बनकर उभरा

इस बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के शोधकर्ता माइकल ब्राउर ने एक बयान में कहा, इस समय बीमारियों में प्रदूषित पर्यावरण से सबसे ज्यादा खतरा है, यही कारण है कि वायु प्रदूषण विश्व में मौत का चौथा सबसे बड़ा कारक बनकर उभरा है।

आंकड़ों में समझिए वायु प्रदूषण

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में बाहरी वायु प्रदूषण से बीमारियों से मृतकों के आंकड़ा इस प्रकार है।

  • स्ट्रोक: 34 प्रतिशत
  • हृदय रोग: 26 प्रतिशत
  • फेफड़े के कैंसर: 6 प्रतिशत
  • अन्य कारण: 28 प्रतिशत

इसके अलावा रिपोर्ट में घर के अंदर वायु प्रदूषण से मृतकों के आंकड़ों का भी जिक्र किया गया है।

  • स्ट्रोक: 36 प्रतिशत
  • हृदय रोग: 36 प्रतिशत
  • फेफड़े के कैंसर: 14 प्रतिशत
  • अन्य कारण: 20 प्रतिशत

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