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ब्रिटिश शासन ने भारत का जो नुकसान किया, कोई भी क्षतिपूर्ति उसकी भरपायी नहीं कर सकती: थरुर 

नई दिल्ली (भाषा)। लेखक और नेता शशि थरुर ने कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में भारत के लोगों पर जो भीषण अपराध किए गए, भारत को दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बनाने वाले ब्रिटिशों द्वारा किसी भी तरह की क्षतिपूर्ति उसकी भरपायी नहीं कर सकती।

अपनी नई किताब ‘ऐन एरिया ऑफ डार्कनेस: द ब्रिटिश अंपायर इन इंडिया' में ब्रिटिश शाही साम्राज्य के खिलाफ मजबूत दलीलें पेश करने वाले थरुर ने कहा कि यूरोप का यह देश मुख्य रुप से भारत को गरीबी के गर्त में धकेल कर समृद्ध बना।

उन्होंने पिछले हफ्ते यहां के ताजमहल होटल में अपनी किताब के विमोचन के मौके पर कहा, ‘‘200 सालों तक ब्रिटेन के उदय का वित्तपोषण भारत में उसकी लूटमार से हुआ। और निश्चित रुप से हम पूरी 19वीं सदी में ब्रिटेन के लिए सबसे दुधारु गाय थे। हमने अपने दमन की कीमत चुकायी।'' थरुर ने कहा, ‘‘ब्रिटेन ब्रिटिश राज और औपनिवेशिक काल के अन्यायों को ऐतिहासिक रुप से जानबूझकर भूल गया है। ब्रिटिश स्कूलों के बच्चों को उपनिवेशवाद की सच्चाइयों के बारे में पढ़ाने की कोई कोशिश नहीं की गयी है।'' उन्होंने कहा कि आखिरकार लंदन की सुंदरता का निर्माण उपनिवेशों से जमा किए गए संसाधनों से हुआ।

333 पृष्ठों की किताब अलेफ बुक कंपनी ने प्रकाशित की है जो पिछले साल ऑक्सफोर्ड में दिए गए थरुर के भाषण का नतीजा है जिसमें उन्होंने ब्रिटेन के औपनिवेशिक अपराधों की क्षतिपूर्ति मांगी थी।