सीपीईसी पर चीन ने दिया पाकिस्तान को बड़ा झटका, रोकी पाकिस्तान की फंडिंग  

सीपीईसी पर चीन ने दिया पाकिस्तान को बड़ा झटका, रोकी पाकिस्तान की फंडिंग  प्रतीकात्मक फोटो 

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, सीपीईसी के दौरान तीन प्रमुख परियोजनाओं का काम फिलहाल रोक दिया है। पाकिस्तान के योजना एवं विकास मंत्री अहसन इकबाल ने कहा कि चीन की ओर से इन परियोजनाओं के लिए वित्तीय व्यवस्था के संशोधन तक परियोजना का काम रुका रहेगा।

मंत्री ने सीपीईसी पर संसद की स्थायी समिति की बैठक को सूचित किया कि चीनी पक्ष के इन परियोजनाओं की वित्तीय व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। चीन से स्वीकृति मिलने के बाद फिर से इन परियोजनाओं पर काम शुरू होगा।चीन इस परियोजना के माध्यम से भविष्य के लिए अपने कारोबार एवं रोजगार के अवसर को मजबूती प्रदान करना चाहता है।

रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका के हबनटोटा बंदरगाह से जुड़ी परियोजना, मालदीव के साथ कुछ ही समय पहले हुई मुक्त व्यापार सहमति, म्यांमार और नेपाल के साथ आर्थिक रिश्ते तथा कई अफ्रीकी देशों के साथ चीन के ऐसे आर्थिक संबंध इसके कुछ महत्वपूर्ण उदाहण है।

चीन के ग्रीन सिग्नल का इंजतार

'डॉन' अखबार ने संसद सचिवालय की ओर से जारी बयान का हवाला देते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पेइचिंग से मंजूरी मिलने के बाद ही इन प्रॉजेक्ट्स पर काम दोबारा शुरू किया जाएगा। सीपीईसी के तहत चीन के उइगुर मुस्लिम बहुल शिनजियांग प्रांत से पाकिस्तान के रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण ग्वादर पोर्ट को जोड़ने की योजना है। इस योजना में सड़कों और रेलवे के नेटवर्क को तैयार करने के साथ ही ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित करना भी शामिल है।

शी चिनफिंग की 2015 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान इस योजना की शुरुआत की गई थी

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की 2015 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान इस योजना की शुरुआत की गई थी। इस दौरान ही चिनफिंग ने परियोजना के लिए 50 अरब डॉलर की राशि आवंटित किए जाने का ऐलान किया था। हालांकि पाक मंत्री संसदीय समिति को यह नहीं बता पाए कि चीन ने इन प्रॉजेक्ट्स को लेकर नया फाइनैंशल मेकेनिज्म तैयार करने की बात क्यों कही है। संसदीय समिति ने पूछा कि आखिर पहले दोनों देशों के बीच जिस मेकेनिज्म पर सहमति बनी थी, चीन ने उसे वापस क्यों ले लिया है।

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