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फर्नेस और रबर ऑयल पर लगे पाबंदी, लोकसभा में उठी मांग    

नई दिल्ली (भाषा)। दिल्ली समेत अन्य महानगरों में प्रदूषण की समस्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। एक बड़ी समस्या बने इस प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए लोकसभा में बुधवार को एक मांग उठाई गई। इसके मुताबिक औद्योगिक इकाइयों में फर्नेस ऑयल और रबर ऑयल के इस्तेमाल को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

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20 साल पहले लगी रोक के बावजूद हो रहा इस्तेमाल

भाजपा सदस्य डॉ वीरेन्द्र कुमार ने सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि महानगरों में फर्नेस आयल और रबर आयल के इस्तेमाल पर तो 20 साल पहले ही रोक लगा दी गई थी। इसके साथ ही इस संबंध में उच्चतम न्यायालय का भी एक आदेश आया था। इसके बावजूद दिल्ली, मुंबई, कानपुर, गाजियाबाद और विशाखापट्टनम समेत विभिन्न महानगरों में औद्योगिक इकाइयों में इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के वजीरपुर और समयपुर बादली जैसे औद्योगिक इलाकों में फर्नेस आयल और रबर आयल के इस्तेमाल से भारी मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस निकल रही है। यह घातक गैस पर्यावरण को बेहद प्रदूषित कर रही है। इसमें भारी मात्रा में सल्फर होता है जो हवा के साथ मिलकर पर्यावरण को ज़हरीला बनाता है। यही वजह है कि न केवल इंसान बल्कि पशु-पक्षी भी इससे प्रभावित होते हैं।

उन्होंने कहा कि यह फर्नेस ऑयल और रबर ऑयल जलाने से 500 गुना अधिक प्रदूषक तत्व हवा में जा मिलते हैं। इसलिए भाजपा सदस्य ने इन पर पूरी तरह से रोक लगाए जाने की मांग की है।


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