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जयशंकर ने अमेरिकी एनएसए से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा 

वाशिंगटन (भाषा)। विदेश सचिव एस जयशंकर ने अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल मैकमास्टर से मुलाकात की और आतंकवाद से निपटने, द्विपक्षीय रिश्तों एवं भारत-अमेरिकी संबंधों को और आगे ले जाने के तरीकों पर बातचीत की।

जयशंकर और मैकमास्टर के बीच यह बैठक काफी मायने रखती है क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मैकमास्टर को 10 दिन पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकर नियुक्त किया है। समझा जाता है कि व्हाइट हाउस में हुयी इस बैठक में दोनों अधिकारियों ने सुरक्षा संबंधों, आतंकवाद से निपटने और रक्षा साझेदारी जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

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जयशंकर प्रतिनिधि सभा के स्पीकर पॉल रयान से भी मिले और उनसे दोनों देशों के बीच आर्थिक और रक्षा साझेदारी को आगे बढाने सहित विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की।

भारतीय विदेश सचिव जयशंकर से मुलाकात करने के बाद रयान ने एक बयान में कहा, ‘‘अमेरिका और भारत के बीच रिश्तों की जड़ें लोकतंत्र एवं स्वतंत्रता के साझे मूल्यों से जुड़ी हैं।'' रयान ने कहा, ‘‘अहम साझेदारी को आगे बढ़ाने का हमारे पास एक बढिया मौका है और हम आर्थिक एवं सुरक्षा सहयोग के तरीकों पर चर्चा के जरिए ऐसा कर सकते हैं।''

जयशंकर के साथ बैठक के दौरान रयान ने प्रतिनिधि सभा की ओर से, गोलीबारी की घटना को लेकर संवेदना व्यक्त की जिसमें भारतीय श्रीनिवास कुचिभोटला (32) की मौत हो गयी थी और एक अन्य भारतीय आलोक मदसानी घायल हो गया था। यह घटना एक रेस्तरां में हुई थी और पूर्व नौसैनिक एडम पुरिन्टन ने गोलीबारी करते समय ‘आतंकवादी' और ‘मेरे देश से निकल जाओ' कहा था।

रयान ने कहा, ‘‘हमारे लोगों को एकजुटता के साथ खड़े रहना जारी रखना चाहिए।'' उन्होंने यह भी कहा, ‘‘मैं आगामी वर्षों में विदेश सचिव जयशंकर के साथ करने को लेकर उत्सुक हूं।'' जयशंकर ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों, सांसदों और थिंक टैंक के सदस्यों के साथ वार्ता करने अपनी चार दिन की यात्रा पर यहां मंगलवार को पहुंचे थे। ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित होने के बाद यह अमेरिका की उनकी तीसरी यात्रा है।

पिछले माह ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ टेलीफोन पर हुई अपनी बातचीत के दौरान भारत अमेरिका संबंधों को मजबूत करने का संकल्प जताया था। राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने से करीब तीन सप्ताह पहले ट्रंप ने भारतीय अमेरिकियों से कहा था कि उनके प्रशासन में भारत व्हाइट हाउस का सबसे अच्छा मित्र होगा।

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