ये है दुनिया की सबसे महंगी करेंसी... जानिए बिटकॉइन की ए बी सी डी

ये है दुनिया की सबसे महंगी करेंसी... जानिए बिटकॉइन की ए बी सी डीबिटकॉइन

आलोक भदौरिया

हाल ही में एक ऐसे अनोखे मामले में देश की पहली गिरफ्तारी लखनऊ से हुई जिसके बारे में अधिकतर लोगों ने सुना ही नहीं था। चार्टर्ड अकाउंटेंट की तैयारी कर रहे एक युवक पंकज ने आरोप लगाया था कि वर्चुअल करेंसी बिटकॉइन बेचने के नाम पर एक शख्स ने उससे 50 हजार रुपये ऐंठ लिए। वर्चुअल करेंसी यानि उसे न हम देख सकते हैं, न छू सकते हैं फिर भी पंकज ने उसे पाने के लिए 50 हजार का दांव खेल दिया। लेकिन पंकज अकेले ऐसे नहीं हैं, दुनिया भर में तमाम लोग इस बिटकॉइन के दीवाने हैं। इसकी कीमत एक साल में 2100 पर्सेंट तक बढ़ चुकी है। लोग अपनी जीवन भर की पूंजी लगाकर उसे खरीदने को बेताब है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्या है यह बिटकॉइन? आइए जानते हैं इसके बारे में:

क्या है बिटकॉइन ?

बिटकॉइन एक किस्म की वर्चुअल या क्रिप्टो करेंसी है जिस पर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं है। इसे किसी बैंक ने जारी नहीं किया है। चूंकि यह किसी देश की मुद्रा नहीं है इसलिए इस पर कोई देश या अंतरराष्ट्रीय संगठन टैक्स नहीं लगा सकता न रोक लगा सकता। इसके लेन-देन के बारे में लेनदार और खरीददार के अलावा किसी को जानकारी नहीं होती मतलब यह पूरी तरह से गुप्त है। इसे दुनिया में कभी भी कहीं भी खरीदा या बेचा जा सकता है।

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क्यों है सीक्रेट?

यह सीक्रेट इसलिए है क्योंकि बिटकॉइन एक तरह का कोड है जिसे कंप्यूटर पर तैयार किया जाता है। लेकिन इसके लिए हाई पावर कंप्यूटर और हाई स्पीड नेट की जरूरत होती है। कोड तैयार करने को माइनिंग कहते हैं,ऐसा करने वालों को माइनर या खदान खोदने वाले कहा जाता है। एक कोड यानि एक बिटकॉइन को तैयार करने में काफी समय लगता है। इसका सॉफ्टवेयर इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कुल 21 करोड़ बिटकॉइन ही बनाए जा सकेंगे।

रहस्यमय इतिहास

बिटकॉइन का इतिहास बड़ा अनोखा है। ऐसा माना जाता है कि 2009 में सतोशी नाकामोतो ने पहली बार इसे दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। कुछ लोगों का कहना है कि सतोशी नाकामोतो एक कंप्यूटर प्रोग्रामर था और उसका यह छदम नाम है। कुछ लोग सतोशी नाकामोतो को प्रोग्रामरों का एक ग्रुप बताते हैं। 2010 में सतोशी बिटकॉइन कोर की जिम्मेदारी गेविन एंडरसन नामके एक डेवेलपर के कंधों पर डालकर गायब हो गया।

कैसे होता है लेनदेन

बिटकॉइन को स्मार्टफोन या कंप्यूटर में डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है। हर लेने-देन लेजर में दर्ज होता है जिसे ब्लॉकचेन कहते हैं। बिटकॉइन को सामान्यत: दो तरह से हासिल किया जा सकता है या तो इसे नकद पैसों से खरीदा जाए, या इनके बदले में कोई चीज या सेवा बेची जाए। जिस तरह एक रुपये में 100 पैसे होते हैं इसी तरह एक बिटकॉइन की इकाई है सतोशी। एक बिटकॉइन में एक करोड़ सतोशी होते हैं।

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क्यों है दुनिया दीवानी

शुरू में बिटकॉइन की बिक्री इसकी गुप्त रहने वाली खूबियों की वजह से हुई। इसकी कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव भी आया। लेकिन 2016 से 17 के बीच बिटकॉइन ने सोने को भी पीछे छोड़ दिया।2016 के आखिर में उसकी कीमत लगभग 753 अमेरिकी डॉलर थी लेकिन 11 महीनों बाद यह लगभग 16 हजार डॉलर तक पहुंच गई। बिटकॉइन की कीमतों में आने वाली यही तेजी दुनिया को इसका दीवाना बना रही है और इसकी मांग को उछाल रही है। चूंकि प्रोग्राम के मुताबिक एक सीमित संख्या में ही बिटकॉइन बनने हैं इसलिए लोग हर हाल में इसे खरीदना चाहते हैं।

हाल में आई तेजी की वजह

जानकारों का कहना है कि जापान और साउथ कोरिया से आए निवेश की वजह से बिटकॉइन में जबर्दस्त उछाल आया है। कुछ इंटरनेशनल कंपनियों ने भी भारी मात्रा में इसकी खरीद की है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस समय बिटकॉइन की वर्तमान पूंजी 60 हजार डॉलरों से भी ज्यादा है।

भारत में बिटकॉइन

भारत सरकार ने बिटकॉइन को कानूनी मान्यता नहीं दी है। रिजर्व बैंक कई बार अपनी ओर से जनता को इसके जोखिमों को लेकर आगाह करता रहा है। गोपनीयता की वजह से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी और दूसरे अपराधी भी बिटकॉइन का इस्तेमाल करते हैं इसलिए सरकार इसे लेकर हिचक रही है। हालांकि सरकार ने 2017 में बिटकॉइन के प्रचलन पर जनता से सुझाव मांगे थे।

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दूसरी तरफ ऐसे लोग भी हैं जो बिटकॉइन को लेकर आशान्वित हैं। ये बिटकॉइन से जुड़े मुद्दों पर सेमिनार करते रहते हैं। इनका दावा है कि कई ई-कॉमर्स कंपनियां भी बिटकॉइन में लेनदेन कर रही हैं और बिटकॉइन धीरे-धीरे चलन में आ रहा है।

दुनिया का नजरिया

दुनिया भर में बिटकॉइन को लेकर अलग-अलग राय है। यूरोप और अमेरिका में इसे अवैध नहीं माना गया है बशर्ते आपराधिक कामों में इसका इस्तेमाल नहीं हो। वेनेजुएला ने तो अपने आर्थिक संकट से निपटने के लिए अपनी ही वर्चुअल करेंसी पेट्रो बना ली है। भारत, नेपाल, बांग्लादेश समेत एशिया के कई ऐसे देश हैं जिन्होंने इसे वैधता नहीं दी है। दिग्गज निवेशक वॉरेन बफ़ेट इसे फर्जी कह चुके हैं।

क्या हैं जोखिम

बिटकॉइन खरीदने में सबसे बड़ा जोखिम इसकी अस्थिरता है। मतलब आप कतई नहीं चाहेंगे कि आपके पर्स में रखा 10 रुपये का नोट कल सुबह 100 रुपये का हो जाए और शाम होते-होते यह सिर्फ 2 रुपये का रह जाए। दूसरा जोखिम है कि कोई हैकर आपका डिजिटल वॉलेट हैक कर ले तो आपकी पूरी पूंजी लुट जाएगी। इसके अलावा अगर इसके बड़े निवेशक भारी मात्रा में बिकवाली करने लगें तो इसकी कीमत गिरने में समय नहीं लगेगा।

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