फेसबुक पर अब न्यूज नहीं लोगों के पोस्टों को मिलेगी वरीयता

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   12 Jan 2018 5:59 PM GMT

फेसबुक पर अब न्यूज नहीं लोगों के पोस्टों को मिलेगी वरीयतामार्क जुकरबर्ग।

न्यूयॉर्क (भाषा)। फेसबुक यूजरों के सोशल मीडिया पर बिताए समय को अधिक अर्थपूर्ण बनाने के लिए उन्हें दिखने वाले पोस्टों के संबंध में बदलाव कर रही है। इस बदलाव से अपनी सामग्री फेसबुक के जरिए साझा करने वाले समाचार संगठनों व कंपनियों को कारोबारी नुकसान हो सकता है।

फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग ने कल एक पोस्ट में कहा कि यह बदलाव लोगों को करीबी लोगों से जोड़ने के लिए, तनाव व अकेलेपन से बचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने लिखा, शोध से पता चलता है कि जब हम सोशल मीडिया का इस्तेमाल करीबी लोगों से जुड़ने के लिए करते हैं तो यह हमारे लिए अच्छा होता है।

उन्होंने कहा, हम इससे अधिक जुड़ाव तथा कम अकेलापन महसूस कर सकते हैं और यह लंबे समय की खुशी व स्वास्थ्य से जुड़ा है। इससे इतर आलेख पढ़ना या वीडियो देखना उनके मनोरंजक व ज्ञानवर्धक होने के बाद भी उतना अच्छा नहीं हो सकता है।

ये भी पढ़ें- अंगूर के बागों से वाइन इंडस्ट्री पर चढ़ी खुमारी , किसानों की भी बल्ले-बल्ले 

कंपनी ने कहा कि इस बदलाव से ब्रांडों, पेजों और मीडिया कंपनियों के कम पोस्ट न्यूज फीड में दिखेंगे तथा लोगों के पोस्ट अधिक दिखने लगेंगे। न्यूजफीड में वीडियो भी कम दिखेंगे। इससे लोग फेसबुक पर कम समय व्यर्थ करेंगे। उसने कहा कि यह कदम उन पोस्टों को वरीयता देना है जिन्हें फेसबुक अर्थपूर्ण मानता है।

दुनिया से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

कोरिया प्रेस फाउंडेशन में वरिष्ठ शोधार्थी (डिजिटल न्यूज) ओह से-उक ने कहा, उसी दिशा में उठाया गया कदम है जिस पर फेसबुक पहले से ध्यान दे रही है। फेसबुक का लक्ष्य खबरों का स्रोत बनने के बजाए लोगों की बीच चर्चा के लिए एक सार्वजनिक जगह मुहैया कराना है।

ये भी पढ़ें- किन राज्यों में सबसे खुश हैं वो मज़दूर जो आपका अन्न उगाते हैं?

फेसबुक चाहता है कि जो लोग दोस्त हैं वे अधिक चर्चा के जरिए और करीबी हो जाएं। फेसबुक के जरिए न्यूज मीडिया वेबसाइटों के ट्रैफिक में गिरावट का अनुमान है। फेसबुक ने कहा कि यह उसी तरह है जैसे लोग ऑफलाइन एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं।

ये भी पढ़ें- दवा नहीं, दारू पर ज्यादा पैसा खर्च करता है ग्रामीण भारत

ये भी पढ़ें- भारत ने जान-बूझकर 1947 में धर्म-निरपेक्षता को चुना था : जे एस खेहर 

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top