इस देश के लोग पेड़ों से करते हैं बेपनाह प्यार, लिखते हैं लव लेटर और ईमेल

इस देश के लोग पेड़ों से करते हैं बेपनाह प्यार,  लिखते हैं लव लेटर और ईमेलशहर से सरंक्षण के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने चलाई थी मुहिम

लखनऊ। किसी के प्रति अपना प्रेम जताने के लिए लोग न जाने कितने प्रेम-पत्र लिखते हैं या टेक्स्ट मेसेज करते हैं लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि लोग पेड़ों के लिए अपना प्यार दिखाने के लिए लव लेटर लिख रहे हैं। भारत में तो पता नहीं लेकिन ऑस्ट्रेलिया में इन दिनों लोग कुछ इसी तरह पेड़ों के प्रति प्रेम का इजहार कर रहे हैं। यहां लोग अपने पसंदीदा पेड़ को ईमेल करके कभी उसकी खूबसूरती बयां कर रहे हैं तो कभी अपने जीवन में उसकी आवश्यकता जाहिर कर रहे हैं।

सुनने में अजीब है लेकिन यह सच है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने एक प्रोजेक्ट के तहत मेलबर्न में पेड़ों के ईमेल एड्रेस प्रोवाइड किए थे ताकि वहां के नागरिक इन पेड़ों से होने वाली परेशानी को शेयर कर सकें लेकिन लोगों ने इसके बजाय अपने पसंदीदा पेड़ को हज़ारों प्रेम पत्र लिख डाले।

मेरे प्रिय अलमस,

मैं आज सेंट मैरी कॉलेज से निकलते वक्त वहां फंस गया था, तुम्हारी शाखाओं की वजह से नहीं, बल्कि तुम्हारी उज्ज्वल खूबसूरती की वजह से। तुम्हें इस तरह के संदेश जरूर हर वक्त मिलने चाहिए। तुम सच में आकर्षक पेड़ हो।

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यह उन हजारों पत्रों में एक पत्र का अंश है जिसे एक ऑस्ट्रेलियाई युवक ने अपने पसंदीदा पेड़ को लिखा है। दरअसल इन दिनों ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में लोग अपने-अपने पसंदीदा पेड़ के साथ दिलचस्प तरीके से संवाद कर रहे हैं।

शिकायत लिखने के लिए बनाई गई थीं ईमेल लोगों ने लिख डाले लवलेटर

2013 में वहां की सरकार ने एक प्रोग्राम के तहत मेलबर्न के प्रमुख पेड़ों की पहचान स्थापित कर उनके लिए आईडी और ईमेल एड्रेस रजिस्टर्ड किए हैं ताकि वहां के लोकल लोग इन पेड़ों की खतरनाक शाखाओं की वजह से आने वाली समस्या को रिपोर्ट कर सकें लेकिन बिल्कुल अनपेक्षित और सकारात्मक परिणाम के तहत लोगों ने शिकायत लिखने के बजाय अपने पसंदीदा पेड़ को प्रेम पत्र लिखना शुरू कर दिया। कइओं ने तो प्रत्यक्ष रूप से पेड़ को ही पत्र लिखना शुरू कर दिया। इस पर मेलबर्न के पर्यावरण विभाग के काउंसलर एरॉन वुड ने कहा, ‘ईमेल के जरिए संवादों से मेलबर्न के लोगों का पेड़ों के लिए प्यार देखने को मिला।’

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मेलबर्न की ईमेल ए ट्री (एक पेड़ को ईमेल) सेवा एक नगरपालिका परियोजना है जिसका लक्ष्य व्यक्तिगत और संस्थागत प्रौद्योगिकियों का लाभ लेते हुए शहर को आसानी से चलाना है।’ इस तरह की पहल न सिर्फ नागरिकों को अपने शहर के संरक्षण के प्रति प्रोत्साहित करती है बल्कि इससे लोगों का अपने शहर के प्रति संबंध भी मजबूत होता है।

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