विदेशों में माहवारी को लेकर रूह कंपा देने वाली प्रथाएं, आप सोचेंगे हम किस सदी में जी रहे हैं

विदेशों में  माहवारी को लेकर रूह कंपा देने वाली प्रथाएं,  आप सोचेंगे हम किस सदी में जी रहे हैंइसमें से कुछ प्रथाएं भयावह हैं तो कुछ अच्छी भी।

लखनऊ। हमारे देश में माहवारी को लेकर पिछले कुछ समय में लोगों की सोच बदल रही है। अब लोग खुलकर इस बारे में बात करने लगे हैं लेकिन ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है। देश के ज़्यादातर हिस्सों में यह अभी भी एक टैबू है। माहवारी को लेकर यहां कई तरह के अंधविश्वास हैं। महीने के उन दिनों में देश के कई हिस्सों में लड़कियों को अछूत माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दूसरे देशों में लोग पीरियड्स यानि माहवारी को लेकर क्या सोचते हैं? भारत के अलावा और भी कई ऐसे देश हैं जहां लड़कियों को पहली माहवारी के दिन अजीब तरह की प्रथाओं से दो-चार होना पड़ता है। इसमें से कुछ प्रथाएं भयावह हैं तो कुछ अच्छी भी। जानिए विदेशों में प्रचलित ऐसी ही कुछ प्रथाओं के बारे में...

फ्रांस, ग्रीस और तुर्की में मारा जाता है थप्पड़

फ्रांस, ग्रीस और तुर्की में किसी लड़की को जब पहला पीरियड होता है तो उसे थप्पड़ मारा जाता है। वेबसाइट बज़फीड में इस तरह के अपने अनुभव को शेयर करते हुए तुर्की की डामला ने लिखा कि जब मुझे पहला पीरियड हुआ उस वक्त मैं अपनी नानी के घर थी। जब मैंने अपनी नानी को बताया कि मुझे पीरियड हुआ है तो उन्होंने मुझे थप्पड़ मार दिया। मैं पहले से ही बहुत डरी हुई थी और उनके इस तरह से थप्पड़ मारने से मैं और डर गई। मुझे लगा कि मैंने कोई गलती कर दी है। तब वो एकदम से हंसने लगीं और बोलीं यह एक परंपरा है। उन्होंने मुझे बताया कि लड़कियों को जब पहला पीरियड होता है तब थप्पड़ मारा जाता है जिससे उनके गाल लाल हो जाते हैं जिससे उनके अंदर शर्म की भावना आ जाती है।

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एबोरिजिनल ट्राइब में करा दी जाती है शादी

इस ट्राइब में लड़कियों को उनके समुदाय की दूसरी महिलाएं पीरियड्स के बारे में बताती हैं और लड़की की मां उसके लिए एक झोपड़ी बनाती है जिसमें लड़की को पीरियड‍्स के दौरान रहना होता है। जब लड़की के पीरियड‍्स खत्म हो जाते हैं तब उस झोपड़ी को जला दिया जाता है और लड़की को नदी में नहलाया जाता है और जैसे ही वह अपने गाँव लौटकर आती है उसकी शादी करा दी जाती है।

नेपाल में 15 दिन के कमरे में कर देते हैं बंद

नेपाल में जब किसी लड़की को पहली बार पीरियड होता है तो उसे 15 दिन के लिए कमरे में बंद कर दिया जाता है। बज़फीड पर नेपाल की रहने वाली इच्छा ने लिखा - मैं नेपाल के ब्राम्हण परिवार से हूं। मेरे यहां जब किसी लड़की को पहली बार पीरियड होते हैं तो उसे एक ऐसे कमरे में बंद कर दिया जाता है जहां बहुत कम रोशनी जाती हो। उसे 15 दिनों तक सूरज की रोशनी में नहीं जाने दिया जाता है। उसे किसी पुरुष की तरफ देखने या उसे छूने तक की इजाज़त नहीं होती है। भगवान का नाम लेने या मंदिर जाने पर भी रोक लगा दी जाती है। 15 दिन बाद उसे नहालाया जाता है और पूरी तरह से ढककर सूरज की रोशनी में लाया जाता है। एक पूजा की जाती है और उसके बाद ही हम पर सूरज की रोशनी पड़ने दी जाती है।

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जापान में बनती है खास डिश

जापान में जब किसी लड़की को पहला पीरियड होता है तब उसकी मां उसके लिए सेखियान नाम की डिश बनाती हैं। यह चिपचिपे चावल की एक डिश होता है जिसे रेड बीन्स डालकर बनाया जाता है। इस खाने को पूरा परिवार खाता है ताकि उन्हें पता चल जाए कि उनके घर की लड़की को माहवारी होना शुरू हो गई है।

अमेरिका में नहाने में ली जाती है मदद

अमेरिका के कुछ हिस्सों में लड़की के पहले पीरियड के दिन उसके पेरेंट्स उसके लिए केक बनाते हैं और वे साथ में डिनर करके इस दिन को उत्सव की तरह मनाते हैं। यहां कुछ हिस्सों में अलग प्रथाएं भी हैं। बज़फीड में मिशेल लिखती हैं - मैं फिलिपिनो-अमेरिकी हूं और मुझे लगता है कि यह एक अंधविश्वास की तरह है लेकिन जब मुझे पहली बार पीरियड हुए तो मेरी मां ने कहा कि नहाते वक्त मुझे किसी और से अपने ऊपर पानी डलवाना होगा। ऐसी मान्यता है कि यह पानी रक्त की अशुद्धियां और दुर्भाग्य दूर करता है।

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श्रीलंका और साउथ अफ्रीका में मनाया जाता है उत्सव

श्रीलंका और साउथ अफ्रीका में लड़की के पहले पीरियड के दिन एक बड़ी पार्टी दी जाती है। साउथ अफ्रीका में इस दिन उसे बहुत से उपहार दिए जाते हैं, साथ ही हिदायत भी दी जाती है कि वह अब तीन दिनों तक घर से बाहर नहीं निकलेगी और घर के पुरुषों व बच्चों से दूर रहेगी। श्रीलंका में परिवार के लोग लड़की को नहलाते हैं और उसे नए कपड़े व पंसदीदा खाना खिलाते हैं। इसके बाद उसे फिर नहलाया जाता है और साड़ी पहनाई जाती है। उसका मेकअप किया जाता है और बहुत सारे गहने पहनाए जाते हैं। यह इसलिए किया जाता है क्योंकि इस दिन से उसके स्त्रीत्व की शुरुआत होती है। कुछ इसी तरह का ट्रेडिशन मोरक्को में भी होता है।

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