टेस्ला ने लॉन्च किया हाई-टेक ट्रक... क्या बदलेगी भारतीय ट्रक ड्राइवरों की भी तकदीर ?

टेस्ला ने लॉन्च किया हाई-टेक ट्रक... क्या बदलेगी भारतीय ट्रक ड्राइवरों की भी तकदीर ?फोटो साभार: इंटरनेट

इलेक्ट्रिक गाड़ियों के क्षेत्र में रोज़ नए-नए प्रयोग करने वाली कंपनी टेस्ला अपना पहला सेमी ऑटोमैटिक ट्रक लेकर आई है। कंपनी के सीईओ इयॉन मस्क ने हाल ही में इस ट्रक को दुनिया के सामने पेश किया।

एडवांस ऑटो पायलट मोड वाले इन ट्रकों में ऑटोमैटिक ब्रेक हैं, जो ख़तरे की स्थिति में ख़ुद ही ब्रेक लगा देंगे... इसके अलावा लेन कीपिंग और लेन डिपार्चर वार्निंग जैसी सुविधाएं हैं, यानी एक बार ट्रक को ऑटो पायलेट मोड में डाल दें, तो वो एक ही लेन में सीधे चलता रहेगा, और अगर किसी वजह से लेन से बाहर हुआ तो भी, वार्निंग सिग्नल से ड्राइवर को पता चल जाएगा कि ट्रक दूसरी लेन में चला गया है।

बैटरी चार्ज होने के पर 750 किलोमीटर का सफर

पूरी तरह बैटरी से चलने वाले इन ट्रकों की खासियत ये है कि एक बार बैटरी चार्ज होने के बाद ये ट्रक करीब साढ़े सात सौ किलोमीटर तक जा सकता है और करीब 36 टन सामान एक बार में ढो सकता है, यानी एक सामान्य ट्रक से करीब साढ़े तीन गुना ज़्यादा। हालांकि व्यावसायिक स्तर पर इन ट्रकों को बनाने का काम 2019 से शुरू होगा, और भारत पहुंचते-पहुंचते इन ट्रकों को कई और साल लगेंगे...लेकिन ऐसा जब भी होगा, क्या ये इलेक्ट्रिक ट्रक भारतीय ट्रक ड्राइवर्स के तकलीफ़ों का जवाब हैं?

मुश्किलों से भरी है भारतीय ट्रक ड्राइवरों की ज़िंदगी

देश की अर्थव्यवस्था एक तरह से उसकी सड़कों और उन सड़कों पर चलने वाले लाखों ट्रकों पर टिकी हुई है। देश की करीब 65 प्रतिशत माल ढुलाई की ज़िम्मेदारी ट्रक ड्राइवर निभाते हैं, लेकिन किन परिस्थितियों में? सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015 में 25 हज़ार 199, और 2016 में 16 हज़ार 876 लोग ट्रक से हुए हादसों में मारे गए। इन हादसों में ज़्यादातर ह्यूमन एरर, यानी मानवीय भूलों की वजह से होते हैं और इन मानवीय भूलों की सबसे बड़ी वजह है ड्राइवर की थकान और नींद की कमी। एक सर्वे के मुताबिक भारतीय ट्रक ड्राइवर दिन में औसतन चार से पांच घंटे ही सो पाता है। ऑटो पायलेट वाले इलेक्ट्रिक ट्रक शायद ट्रक ड्राइवरों की ज़िंदगी को कुछ आसान कर सकें।

भारत में 73 लाख छोटे-बड़े कर्मशियल वाहन

एक अनुमान के मुताबिक भारत में इस वक्त कुछ 73 लाख छोटे-बड़े कर्मशियल वाहन हैं, और इन वाहनों को चलाने वाले कोई साठ लाख ड्राइवर। काम के लंबे घंटे, हफ़्तों तक घर से दूर रहना, खाने-पीने और सोने का ठिकाना ना होना, उस पर आमदनी के नाम पर कुछ 10 से 15 हज़ार रुपए...यही है एक ट्रक ड्राइवर की ज़िंदगी। मौसम ठंडा हो, गर्म हो, त्योहार हो या आम दिन, ट्रक ड्राइवर्स की ज़िंदगी ज़्यादातर सड़क पर ही कटती है। सही वक्त पर माल पहुंचाने का दबाव इतना ज़्यादा होता है कि थकान और नींद आने का बावजूद अक्सर वो आराम करने के लिए रुकते नहीं, ज़्यादातर हादसे अक्सर इसी थकान का नतीजा होते हैं।

हर साल घट रही ट्रक ड्राइवरों की संख्या

इन मुश्किल परिस्थितियों की वजह से देश में ट्रक ड्राइवरों की संख्या लगातार घटती जा रही है। एक डॉक्टर अपने बच्चे को हंसी-खुशी से डॉक्टर बनाना चाहता है, ऐसा ही कुछ एक इंजीनियनर भी अपने बच्चे के बारे में सोचता है लेकिन क्या एक ट्रक ड्राइवर अपने बच्चों को ऐसी परिस्थिति में ट्रक ड्राइवर बनाना चाहेगा? ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के मुताबिक देश में ट्रक ड्राइवरों की संख्या हर साल घट रही है। 1982 में जहां हर हज़ार ट्रक पर 1300 ड्राइवर थे, लेकिन 2012 तक ये संख्या सिर्फ 875 रह गई-

1000 ट्रक पर ड्राइवरों की संख्या

  • वर्ष 1982- 1300 ड्राइवर
  • वर्ष 1992- 1000 ड्राइवर
  • वर्ष 2002- 890 ड्राइवर
  • वर्ष 2012- 875 ड्राइवर

इस हिसाब से 2022 तक देश में 25 प्रतिशत ट्रक खाली ही खड़े रहेंगे।

ज़रूरी हैं ट्रक ड्राइवरों के लिए सुविधाएं

ऑटो पायलेट वाले महंगे इलेक्ट्रिक ट्रक तो अभी दूर की कौड़ी है, लेकिन ट्रक ड्राइवरों की ज़िंदगी को कुछ बेहतर बनाने के लिए ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए कुछ नियम बनाए जाने ज़रूरी हैं। दुनिया के दूसरे देशों में सरकार की तरफ़ से ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए सख्त नियम कानून बने हुए हैं।

दूसरे देशों में ट्रक ड्राइवरों के लिए नियम

  • ऑस्ट्रेलिया में किसी भी ट्रक ड्राइवर के लिए 5 घंटे की ड्राइविंग के बाद 15 मिनट का ब्रेक लेना ज़रूरी है।
  • कई देशों में ड्राइवर को हफ्ते में कम से कम एक बार 24 घंटे ट्रक से दूर रहना ज़रूरी है
  • यूरोपियन यूनियन के देशों में एक दिन में सिर्फ छह घंटे ट्रक चलाने की इजाज़त दी जाती है। और इसका उल्लंघन ना हो इसके लिए डिजीटल निगरानी भी होती है।

जारी किया गया है निर्देश

भारत सरकार के सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्रालय ने ट्रक ड्राइवरों के सफर को आसान बनाने के लिए एक निर्देश जारी किया है। इसके मुताबिक 1 जनवरी 2018 से भारत में बनने वाले हर ट्रक का केबिन वातानुकूलित होगा और अगर ट्रक के केबिन में एसी नहीं लगाया जा सकता, तो तापमान को नियंत्रित रखने के लिए केबिन में वेंटीलेशन सिस्टम लगाया जाएगा, लेकिन ट्रक ड्राइवरों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए इससे कई बड़े कदम सरकार को उठाने होंगे।

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