चीन के वैज्ञानिकों ने ऊसर-बंजर जमीन में किया धान का बंपर उत्पादन , चावल को बताया सेहत के लिए फायदेमंद 

चीन के वैज्ञानिकों ने ऊसर-बंजर जमीन में किया धान का बंपर उत्पादन , चावल को बताया सेहत के लिए फायदेमंद क़िंग्दाओ केंद्र में धान की खेती। फोटो साभार-  http://news.xinhuanet.com/english/

चीन के वैज्ञानिकों ने ऊसर बंजर चीन में खारी और क्षारीय (अम्लीय और क्षारीय) मिट्टी पर धान उगाने का प्रयोग किया था और उनके इस प्रयोग से चावलों का उम्मीद से ज़्यादा उत्पादन हुआ।

चीन की वेबसाइट शिन्हुआ नेट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का कहना है कि उनके इस प्रयोग से इस तरह की ज़मीन पर व्यावसायिक स्तर पर धान की खेती के दरवाज़े खोल दिए हैं। क़िंगदाओ सलाइन-अल्कली टॉलरेंट चावल अनुसंधान और विकास केंद्र में परीक्षण के बाद चार तरह के चावलों का प्रति हेक्टेयर 6.5 से 9.3 टन के बीच अनुमानित उत्पादन दर्ज किया गया।

बसंत के मौसम में पूर्वी चीन के शेडोंग प्रांत में तटीय शहर क़िंगदाओ में 200 से ज़्यादा तरह के चावल लगाए गए थे। इस मिट्टी पर समुद्री जल का इस्तेमाल किया गया जिससे यह पता लगाया जा सके कि खारे वातावरण में धान के पौधे किस तरह बचे रह सकते हैं और बढ़ सकते हैं। पास के पीत सागर से सेंटर में पंप के ज़रिए समुद्र का पानी पहुंचाया गया, इसे लगभग 0.3 प्रतिशत की लवणता से पतला किया गया और फिर धान में पानी लगागया गया। इसके बाद इसकी लवणता बढ़ाकर 0.6 प्रतिशत कर दी गई ताकि धान पर इसके असर को देखा जा सके।

केंद्र के प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख वांग केएक्सियांग ने कहा कि शोधकर्ता को उम्मीद थी कि लगभग 4.5 टन चावलों का उत्पादन होगा। परीक्षण के परिणाम की समीक्षा करने वाले यंग्ज़हौ विश्वविद्यालय में कृषि विभाग में प्रोफेसर लियू शिपिंग ने कहा कि इस परीक्षण का परिणाम हमारी उम्मीद से बहुत ज़्यादा अच्छा आया है। कुछ तरह के जंगली चावल जो अभी तक लोगों ने संशोधित करके उगाने की कोशिश नहीं की है वे लवणता से बच सकते हैं, लेकिन आम तौर पर उनमें 1.125 से 2.25 टन प्रति हेक्टेयर की पैदावार होती है।

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युआन लोंगिंग, जिन्होंने इस परीक्षण का नेतृत्व किया था उनका कहना है कि वे परिणामों से काफी खुश हैं। युआन को चीन के 'हाइब्रिड चावल के पिता' के रूप में जाना जाता है। चीन एक चावल प्रधान देश है और क़िंगदाओ केंद्र का मिशन खारी और क्षारीय मिट्टी में व्यावसायिक रूप से धान की खेती करना है।

युआन का कहना है कि इस परीक्षण के बाद चावलों की जो पैदावार हुई है उससे किसान भविष्य में इस तरह की खेती करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। ऐसी मिट्टी पर खेती करने से किसान एक हेक्टेयर में 1500 किलोग्राम चावलों का उत्पादन कर सकते हैं जो ज़्यादा फायदेमंद अगर हम उपज दोगुना करते हैं, तो किसानों को चावल उगाने के लिए एक प्रोत्साहन मिलेगा।' इस तरह के प्रयोग से चीन में खेती का परिदृश्य बदल सकता है। युआन का कहना है कि चीन में करीब 10 करोड़ हेक्टेयर खारी - क्षारीय मिट्टी है, जिसमें से पांचवें भाग में खेती की जा सकती है।

फिलीपींस में स्थित चावल के विज्ञान के ज़रिए ग़रीबी और भूख को खत्म करने के लिए शोध करने वाली संस्था अंतरराष्ट्रीय चावल शोध संस्थान (आईआरआरआई) का कहना है कि दक्षिण और दक्षिण पूर्वी एशिया में लाखों हेक्टेयर ज़मीन खाली पड़ी है जो तकनीकी रूप से चावल के उत्पादन के लिए उपयुक्त है लेकिन इसमें कोई फसल नहीं होती क्योंकि यहां की मिट्टी में लवणता ज़्यादा है।

आईआरआरआई के मुताबिक, सैद्धांतिक रूप से खारी मिट्टी में उगाए गए चावल ज़्यादा फायदेमंद होते हैं। इस मिट्टी में कैल्शियम और अन्य सूक्ष्म पोषक प्रचुर मात्रा में होते हैं, इसलिए चावल में ये पोषक तत्व मिल जाते हैं जो सेहत के लिहाज़ से फायदेमंद होते हैं।

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क़िंग्दाओ केंद्र के यांग होंग्यान के मुताबिक, खारी-क्षारीय मिट्टी में रोगजनक बैक्टीरिया पैदा होने की संभावना भी कम होती है इसलिए इस मिट्टी में होने वाले धान में बैक्टीरिया लगने की संभावना भी बहुत कम होती है जिससे इसमें कीटनाशक का इस्तेमाल करने की भी कम ज़रूरत पड़ती है जो सेहत के लिए अच्छा रहता है।

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