अमेरिका में आर्थिक संकट गहराया, सरकार ठप

अमेरिका में आर्थिक संकट गहराया,  सरकार ठपबंदी की फोटो चस्पा दी गयी है।

सीनेट में अल्पकालिक व्यय विधेयक पारित नहीं हो पाने से अमेरिका में सरकार का कामकाज शनिवार को ठप होना शुरू हो गया है। इस संकट के कारण हजारों कर्मचारियों को अवैतनिक छुट्टी पर जाना होगा। मीडिया रपटों में कहा गया है कि सरकार के सामने यह संकट ऐसे समय में आ खड़ा हुआ है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति के रूप में अपना पहला साल पूरा कर रहे हैं।

बीबीसी के मुताबिक, अमेरिका के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कांग्रेस के दोनों सदनों और व्हाइट हाउस पर एक ही पार्टी का नियंत्रण है, फिर भी सरकार को इस संकट का सामना करना पड़ा है। अंतिम क्षण में भी इस मुद्दे पर दोनों दलों ने बैठक की, फिर भी 16 फरवरी तक के लिए सरकार को निधि मुहैया कराने वाले विधेयक के लिए आवश्यक 60 मत नहीं मिल सके।

बजट प्रस्ताव शुक्रवार रात रिपब्लिकन ने पेश किया और इसके पक्ष में 50 मत प्राप्त मिले, जबकि विरोध में 48 मत पड़े। लेकिन ये मत निधि को मंजूरी देने के लिए अपर्याप्त रहे। चार रिपब्लिकन नेताओं ने विधेयक के खिलाफ मतदान किया, जबकि पांच डेमोक्रेट सदस्यों ने इसका समर्थन किया। इससे पहले गुरुवार रात प्रतिनिधि सभा के सदस्यों ने फरवरी तक के सरकारी खर्च के लिए विधेयक को 197 के मुकाबले 230 मतों से पारित कर दिया था।

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समाचार पत्र 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने अपनी रपट में javascript:void(0)कहा है कि मध्यरात्रि तक की समयसीमा समाप्त होने के कुछ मिनट पहले ही व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा हक्काबी सैंडर्स ने ट्विटर के जरिए इसे "शूमर शटडाउन" करार दिया और इसके लिए सीनेट के डेमोक्रेट नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। सीनेट में शीर्ष डेमोक्रेट नेता चक शूमर को इस अल्पकालिक विधेयक का मुख्य विरोधी माना गया है।

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सैंडर्स ने कहा, "आज रात उन लोगों ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य परिवारों, मासूम बच्चों और सभी अमेरिकी लोगों की सेवा करने की हमारे देश की क्षमता पर राजनीति को ऊपर रखा।" उन्होंने कहा, "जब डेमोक्रेट ने अपनी बेकार की मांगों को लेकर हमारे वैध नागरिकों को बंधक बना लिया है, तो ऐसे में हम अवैध आप्रवासियों की स्थिति पर कोई बातचीत नहीं करेंगे।" सैंडर्स ने कहा, "यह असफल विघ्नकारियों का आचरण है, न कि सांसदों का।"

उन्होंने कहा कि राजनीतिक रूप से पैदा की गई बंदी की इस स्थिति के दौरान अमेरिकी लोगों को बचाने के लिए राष्ट्रपति और उनका प्रशासन लड़ेगा। सीनेट में विधेयक नामंजूर होने का मतलब है कि जबतक बजट पर सहमति नहीं बन जाती, तबतक कई सरकारी सेवाएं बंद रहेंगी।

इस तरह की पिछली बंदी 2013 में बराक ओबामा प्रशासन के दौरान हुई थी, जो 16 दिनों तक चली थी। तमाम संघीय कर्मचारियों को छुट्टी पर जाना पड़ा था। ट्रंप ने शनिवार को ट्विटर पर लिखा, "वे हमारी महान सेना या अत्यंत खतरनाक दक्षिणी सीमा की सुरक्षा के लिए अच्छा नहीं कर रहे। डेमोक्रेट कर कटौती की बड़ी सफलता को बेकार करने में मदद के लिए यह बंदी चाहते हैं।"

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ट्रंप ने कामकाज बंदी के लिए डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार बताया। यह प्रकरण ट्रंप द्वारा देश के 45वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लिए जाने के ठीक एक साल बाद हुआ है। राष्ट्रपति ने कहा, ‘डेमोक्रेट कर कटौती की बड़ी सफलता को क्षीण करने में मदद करने के लिए कामकाज बंदी चाहते हैं।’यह डेमोक्रेट्स की रणनीति का हिस्सा है जिससे कि निर्वासन का सामना कर रहे अवैध आव्रजकों के मुद्दे पर राष्ट्रपति ट्रंप और रिपब्लिकनों को डेमोक्रेट्स के साथ चर्चा के लिए विवश किया जा सके्र। कामकाज बंदी का अधिकांश असर सोमवार से दिखेगा जब संघीय सरकार के कर्मी अपने काम पर नहीं आ पाएंगे और उन्हें बिना वेतन के घर पर ही रहना होगा।

ऐसा अनुमान है कि आठ लाख से ज्यादा संघीय कर्मी गैर हाजिर रहेंगे। केवल आवश्यक सेवाएं ही खुलेंगी. इससे पहले सरकार का कामकाज 2013 में बंद हुआ था. बजट प्रबंधन कार्यालय के निदेशक मिक मुल्वानी ने संवाददताओं से कहा कि कोशिश की जा रही है कि यह कामबंदी 2013 की कामबंदी के मुकाबले कम असरकारी हो।

अक्टूबर 2013 में हुई पिछली कामबंदी 16 दिन तक चली थी। इससे पहले की कामबंदी 21 दिन चली थी जो छह जनवरी 1996 को खत्म हुई थी। लेकिन हाल के इतिहास में यह पहली बार है जब कामबंदी ऐसे समय हुई है जब दोनों सदनों-प्रतिनिधि सभा और सीनेट और यहां तक कि व्हाइट हाउस भी एक ही पार्टी द्वारा नियंत्रित है।

(आईएएनएस से इनपुट)

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