एक बदनाम ज़िले में युवा डीएम ने जगाई उम्मीद

मनीष मिश्रामनीष मिश्रा   18 April 2016 5:30 AM GMT

एक बदनाम ज़िले में युवा डीएम ने जगाई उम्मीदgaonconnection

लखनऊ। अपराध, अव्यवस्था और गुंडई के लिए प्रदेश के सबसे बदनाम जिलों में से एक, गोंडा में पिछले पंद्रह दिनों से सभी सरकारी दफ्तरों में कर्मचारी सुबह 9.30 बजे ऑफिस में होते हैं। 

प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति को पकड़ने के लिए छापेमारी हो रही है। वहीं, कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों ने अच्छा काम करने का संकल्प भी लिया है।

नाउम्मीदी से भरे जिले गोंडा में युवा जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन की नियुक्ति होने के 15 दिनों के अंदर ही नागरिकों में उम्मीद जगी है कि उनकी ज़िंदगियां भी बदल सकती हैं।

“नए जिलाधिकारी ने आते ही धुआंधार बैटिंग शुरू कर दी है। कार्यालयों में छापेमारी चल रही है, जो अधिकारी देर से आते थे, उनका टाइम टेबल सही हो गया है। लोग दफ्तरों में 9.30 पहुंच जाते हैं।” गोंडा में रहने वाले योगेश शुक्ला बताते हैं।

हाल में हुए कई जिलों में डीएम के तबादलों के साथ ही आशुतोष निरंजन को गोंडा की कमान सौंपी गई है। उन्होंने एक अप्रैल, 2016 से विधिवत काम शुरू करने के बाद दफ्तरों की कार्यशैली बदली है। कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों ने एक रेजोल्यूशन पास किया है कि वह अपने जिलाधिकारी का हर स्तर पर समर्थन करेंगे।

“हमारा पहला मकसद था कि दफ्तरों में लोगों के बीच में काम करने की एक संस्कृति बने। इन दफ्तरों से दलालों की छुट्टी करना भी मुख्य काम था। इसमें हमें स्टाफ का हर स्तर पर सहयोग मिल रहा है।” गोंडा के नए जिलाधिकारी ने कहा।

जिले में नई पंचायातों के गठन के बाद से भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल से 24 अप्रैल तक सभी ग्राम सभाओं में खुली बैठकें भी शुरू हो गई हैं,  हर बैठक की फोटोग्राफी की जा रही है। इससे पक्का किया जा रहा है कि ये बैठकें सिर्फ कागजों पर ही नहीं होतीं।

“इन खुली बैठकों में हम गरीबों को पेंशन और अन्य समस्याओं का निराकरण उसी समय करा रहे हैं। इससे बड़ी योजना यह है कि एक मई   (मजदूर दिवस) से सभी जगहों पर एक साथ कार्य कराए जाएंगे। इससे बड़े पैमाने पर काम होगा और लोगों को रोजगार भी मिलेगा।” जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने बताया।

“मात्र पंद्रह दिन में ही जिले आम लोगों के बीच एक सकारात्मक संदेश जा रहा है। नए डीएम के आने के बाद समस्याओं का जमीनीस्तर पर होने लगा है। सबसे बड़ी बात लोग सरकारी दफ्तरों में समय पर आने लगे हैं।” गोंडा में रह रहे पत्रकार शिव ओझा बताते हैं। गोंडा की राजनीति भी लगातार चर्चा में रहती है। लेकिन इस सब की ओर ध्यान न देते हए नए जिलाधिकारी कहते हैं, “देखिए मुझ पर कहीं से कोई दबाव नहीं है। हम अपना अच्छा काम कर रहे हैं। सरकारी मशीनरी अपनी अक्षमता छिपाने के लिए जनप्रतिनिधयों का सहारा लेती है। लेकिन अगर जिले में विकास हो रहा है तो कोई जनप्रतिनिधि क्यों रोकेगा।” आशुतोष निरंजन बताते हैं। 

शहर में मेडिकल स्टोर चलाने वाले शेष चौरसिया बताते हैं, “अखबारों से पता चलता रहता है कि उनका काम अच्छा है। उन्होंने तो दफ्तर में अपनी अनुपस्थिति में कुछ अधिकारी नियुक्त कर रखें हैं, जिससे कोई न कोई मिले।”

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