एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रgaonconnection

फैज़ाबाद। ब्लॉक मुख्यालय का शासकीय अस्पताल सिर्फ कागजों व फाइलों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नाम से जाना जा रहा है। यहां मिलने वाली सुविधाएं आज भी नाममात्र हैं। सिरींज और दवाइयां भी बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।

जि़ला मुख्यालय से 25 किलोमीटर पर स्थित तारुन ब्लॉक में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है जो एक ही डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। डॉक्टर भी ऐसे की वह मरीजों को 10 मिनट तक देखते हैं और उसके बाद उठकर वह 1 घंटे तक के लिए गायब हो जाते हैं। यह सिलसिला उनका बार-बार चलता रहता है जिसके चलते मरीज़ों को  बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ता है। 

यहां के रामबरन उम्र 35 वर्ष बताते हैं, “यहां पर जानकार डॉक्टर होने के नाते हम लोग इलाज के लिए आते हैं लेकिन डॉक्टर कब मिलेंगे इसका कोई भरोसा नहीं है। डॉक्टर मिलते भी हैं तो वह बाहर से दवाएं लिखते हैं। हमें बुखार था यहां पर 20 दिन से इलाज करा रहे हैं यहां के डॉक्टर साहब 5 दिन की दवा लिखते हैं जो कि बाहर से लेनी पड़ती है जिसका दाम 390 रुपए होता है।”

जब इसके बारे इमरजेंसी में भर्ती अन्य मरीज़ों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर हम किसी प्राइवेट अस्पताल में जाएंगे तो इससे ज्यादा पैसा लगेगा। सरकारी अस्पताल यहां से काफी दूर है अगर वहां जाते हैं तो आने-जाने और खाने-पीने में ज्यादा खर्चा होगा तथा परेशान होना पड़ेगा पैसे से ही यहां पर हम लोग इलाज करा लेते हैं।

वहां पर अधीक्षक की कुर्सी पर बैठे डॉक्टर सोनी बिना डर तथा संकोच के सभी मरीजों को बाहर से दवा लिख रहे थे यहां तक की इस अस्पताल में सीरिंज तक उपलब्ध नहीं है, जोकि मरीजों को बाहर से खरीदकर लानी पड़ती है। जब इस बारे में वहां के स्टाफ से जानकारी की गई उन्होंने बताया, “सिरिंज बहुत ही शॉर्ट में आती है जोकि एमरजेंसी के लिए रखी जाती है। यहां का आलम यह है की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बाजार से लगभग 2 किलोमीटर पर स्थित है जहां आस-पास अन्य कोई डॉक्टर नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र के मेन गेट पर दो प्राइवेट मेडिकल स्टोर स्थित हैं जो कि इसी के बदौलत अच्छे खासे चलते हैं। इसके बारे में एक एमआर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम लोग डॉक्टर को 20 प्रतिशत कमीशन देते हैं तब वह हमारी दवा लिखते हैं।

रिपोर्टर - रबीश कुमार वर्मा

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