एक साधारण महिला जो पूरे गाँव की मार्गदर्शक बनी

Neetu SinghNeetu Singh   12 July 2016 5:30 AM GMT

एक साधारण महिला जो पूरे गाँव की मार्गदर्शक बनीgaonconnection

त्योरा (हरदोई)। सुमनलता ( 50 वर्ष) आज अपने गाँव की महज़ आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गाँवों के सैकड़ों बच्चों की मार्गदर्शक भी हैं। बचपन से ही पढ़ाई के जूनून ने उन्हें शांत नहीं बैठने दिया, जिसका नतीज़ा यह हुआ कि आज सुमन को अपने क्षेत्र के अधिकांश लोग जानने लगे हैं।

अपना परिचय देते हुए सुमनलता मुस्कुराते हुए कहती हैं, “हमारे मन में एक जुनून था कि कुछ भी हो मुझे आगे बढ़ना है, और अपने पैरों पर खड़ा होना है, छठवी कक्षा से ग्रेजुएशन तक पांच किलोमीटर पैदल जाकर मैंने पढ़ाई की और आज गाँव की आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री हूं।’’

हरदोई जिला मुख्यालय से चार किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में त्योरा गाँव की आंगनबाड़ी कार्यकत्री सुमनलता शर्मा, सन 1997 में आगनबाडी कार्यकर्त्री चुनी गई। सीमित संसाधन और गाँव से बहार पाँच किलोमीटर की दूरी सुमनलता की पढ़ाई में बाधक नहीं बन सकी। उन्हें पढ़ाने का भी बहुत शौक रहा, इसलिए उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री बनने के बाद भी अपने इस शौक को जारी रखा और आज आसपास के कई गाँवों के 100 से ज़्यादा बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रही हैं।

सुमनलता बताती हैं, ''हम छह बहन और एक भाई हैं, घर में सबसे बड़ी होने की वजह से पूरे घर की जिम्मेदारियां थी, पर अपनी पढ़ाई के साथ-साथ मैंने अपने सभी भाई-बहनों को पढ़ाने में मदद की, पिता महावीर प्रसाद वर्मा कलेक्ट्रेट में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे, उन्होंने हमे पढ़ने के लिए बहुत प्रोत्साहित किया।”

बचपन का एक किस्सा बताते हुए सुमनलता कहती है कि जब हमारी चौथे नंबर की बहन पैदा हुई तो, हमारे गाँव के एक आदमी ने पिताजी से कहा कि तुम्हे तो फांसी लगाकर मर जाना चाहिए क्योंकि तुम लड़के पैदा नहीं कर सकते हो, इसे सुनकर वो चुप होकर दफ्तर चले गए, हम तीनो बहने पूरे दिन रोते रहे कि हमारे पिताजी, अब फांसी लगाकर मर जाएंगे, पर जब शाम को पापा घर आ गए, तब हमें सुकून मिला। गाँव में जन्मी सुमनलता बचपन से ही मेहनती और लगनशील थी, जिस परिवार में लड़कियों को खुलकर बोलने की आज़ादी नहीं थी, उसी माहौल में पली बढ़ी और आज खुद अकेले पूरा परिवार चला रही हैं। सुमनलता बताता हैं, ''मेरे  पति नहीं चाहते थे कि मैं कोई काम करूं क्योंकि उनको लगता था कि इससे मेरा रुतबा बढ़ जाएगा, वो शराब के लती थे पीकर आते तो मारपीट करते, पर मुझे पता था कि एक न एक दिन पढ़ाई रंग लाएगी।’’

आज सुमनलता अपने गाँव में ही नहीं बल्कि आसपड़ोस में भी एक चर्चित हिस्सा बन गई हैं। वो खुश होकर बताती हैं कि मेरी बेटी आकांक्षा नौकरी कर रही है और बेटा नौकरी की तैयारी कर रहा है, मैं पार्ट टाइम ट्यूशन भी पढ़ाती हूं, जिससे हमारे पूरे परिवार का खर्चा चलता है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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