पुलवामा, विकास और जाति-वर्ग में बंटी जंग

टेकाबिगहा गाँव पटना साहिब संसदीय सीट के अंतर्गत है। वैसे तो यह इलाका नीतीश कुमार के गाँव बख्तियारपुर के पास ही है, लेकिन यादव-मुस्लिम बहुल आबादी यहां एक दिलचस्प समीकरण बनाती है।

पुलवामा, विकास और जाति-वर्ग में बंटी जंग

टना से करीब 60 किलोमीटर दूर टेकाबिगहा गाँव में टीवी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण चल रहा है। "मैं आतंक फैलाने वालों को छोड़ूंगा नहीं... घर में घुसकर मारूँगा" मोदी ऐलान करते हैं और टीवी देख रहे युवक ताली बजाते हैं।

"पेला दिया है पाकिस्तान को मोदिया..." एक लड़का अपने साथी की पीठ पर गर्व से थपकी मारते हुए कहता है। ये पुलवामा हमले के बाद भारत की ओर से पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर की गई एयर स्ट्राइक का असर है। बिहार में शहरी इलाकों से लेकर गाँवों तक इसके चर्चे हो रहे हैं और केंद्र सरकार लोगों के भीतर एक गर्व का एहसास कराने में सफल रही है।

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत की एयर स्ट्राइक से लोगों में जोश है जो भाजपा गठबंधन को चुनावी फायदा दे सकता है। फोटो: हृदयेश जोशी

टेकाबिगहा गाँव पटना साहिब संसदीय सीट के अंतर्गत है। वैसे तो यह इलाका नीतीश कुमार के गाँव बख्तियारपुर के पास ही है, लेकिन यादव-मुस्लिम बहुल आबादी यहां एक दिलचस्प समीकरण बनाती है। जहां एक ओर M-Y के समीकरण से यहां आरजेडी के लिए संभावनाएं खुली रहती हैं, वहीं जेडीयू-बीजेपी-एलजेपी के गठजोड़ और ताजा़ एयर स्ट्राइक ने फिलहाल पलड़ा एनडीए की ओर झुकाया हुआ है।

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यह भी महत्वपूर्ण है कि यादव समाज के जो युवक टीवी पर प्रधानमंत्री के भाषण से प्रसन्न दिखे वह इस इलाके में सांसद शत्रुघ्न सिन्हा को कुछ काम न करने के लिए कोस रहे हैं, लेकिन कहते हैं कि इस बार भाजपा उम्मीदवार बदल दे तो फिर उसी को वोट देंगे।

"शत्रुघ्न सिन्हा यहां कभी नहीं आये। लेकिन यहां विधायक भी बीजेपी का है, वह अच्छा आदमी है, हम फिर भी मोदी जी को वोट देंगे क्योंकि इस बार तो शत्रुघ्न सिन्हा यहां से खड़े नहीं होंगे," 25 साल के नकुल कुमार यादव कहते हैं।

पास में ही खड़े बुज़ुर्ग रामादीन बताते हैं कि मामला विकास जाति और पाकिस्तान को लेकर बंटा हुआ है। बीजेपी के पास पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ नारा है तो नीतीश अपने विकास कार्यों को गिना रहे हैं। तीन मार्च की संकल्प रैली में नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के भाषणों में यही सुनाई दिया। आरजेडी के लालू यादव के खिलाफ एनडीए ने भ्रष्टाचार के नारे को भी बड़े ज़ोर-शोर से प्रचारित किया है।

आरजेडी गठबंधन से टक्कर लेने के लिये मोदी ने पटना रैली में कहा, "मैं कहता हूँ भ्रष्टाचार मिटाओ और वह (विरोधी) कहते हैं मोदी को हटाओ"

लेकिन ऐसा नहीं है कि ज़मीन पर लोग इन नारों और राष्ट्रवाद की गूंज में अपनी मुश्किलों को भूल गये हैं। बिहार के शहर और गाँवों में लोगों की कई दिक्कतें हैं और जाति और सामाजिक समीकरण भुलाया नहीं जा सकता।

आरजेडी के यादव वोट का बड़ा हिस्सा लालू प्रसाद के साथ है और वह तेजस्वी में अपनी पहचान खोज रहा है। मुस्लिम समाज के ज्यादातर लोग बीजेपी गठबंधन के खिलाफ ही वोट देंगे ये साफ महसूस होता है।

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"लड़कों के पास नौकरियां नहीं हैं लेकिन अभी (पुलवामा घटना के बाद) मामला राष्ट्रीय सुरक्षा का बन पड़ा है। इसलिये वह जोश दिखा रहे हैं," टेकाबिगहा के रामादीन कहते हैं। वह यह भी बताते हैं कि यहां आरजेडी गठबंधन और बीजेपी-जेडीयू में कड़ी टक्कर होनी है।

किसान, मज़दूर और आम लोगों की दिक्कतें बनी हुई हैं और जातीय सामाजिक समीकरणों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

"नेता यहां नौकरी का झुनझुना दिखाते हैं। अभी चुनाव है तो कुछ नौकरी देने की बात भी हुई है लेकिन मिलेगा कुछ नहीं हम बता देते हैं," एक अधेड़ युवक ने गाँव कनेक्शन को बताया।

पटना साहिब संसदीय सीट के ही एक गाँव में हमारी मुलाकात सुनील कुमार और उनके साथी किसानों से होती है। वह अपनी फसल के बर्बाद होने से दु:खी हैं। "सरकारी खाद मिली नहीं और पानी खेतों तक नहीं पहुंचा, आप देख लीजिये कि खेतों का क्या हाल है," सुनील कुमार हमें अपने गेहूं के खेत दिखाते हैं जहां फसल ठीक से नहीं उग पाई।

"एक बीघा में 60 मन उपज होना चाहिये लेकिन 8 मन भी नहीं हो रहा है," सुनील के साथी किसान बताते हैं।

इन किसानों के लिये पाकिस्तान या आतंक के खिलाफ घोषित युद्ध अहम नहीं दिखता। "हम परेशान हैं और वह (मोदी) तो भोट (वोट) के लिये टीवी पर चिल्ला रहा है कि 200 मार दिया 300 मार दिया। सब फालतू बात है," इसी गाँव के 38 साल के किसान अचलू कहते हैं।

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