गाँवों में बढ़ रहा चेचक का ख़तरा

गाँवों में बढ़ रहा चेचक का ख़तराgaoconnection

शाहजहांपुर। गर्मी बढ़ने के साथ ही जनपद के ग्रामीण अंचलों में संक्रामक रोग अपने पैर परासने लगे हैं और स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के चलते पीिड़त रोगी झोला-छाप डाक्टरों से अपना इलाज कराने पर मजबूर हो रहे हैं।

जनपद के कई गाँवों में तेज़ी से फैल रहे चेचक के बारे में जब गाँव कनेक्शन रिपोर्टर ने कई गाँवों का निरीक्षण किया तो कई गाँव ऐसे मिले जहां एक ही परिवार के कई बच्चे संक्रामक रोग व चेचक से पीड़ित थे। 

स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के चलते पीिड़तों को झोला-झाप डॉक्टरों से इलाज कराने पर विवश होना पड़ रहा है। ब्लॉक ददरौल के गाँव हंसुआ जाजू में संक्रामक रोग चेंचक से पीड़ित 10-15 रोगी मिले, कांट ब्लॉक के गाँव कादर दादपुर उर्फ लिंथरा में सात लोग संक्रामक रोग (चेंचक) से पीिड़त मिले। यहां कोई भी स्वास्थ्य विभाग की टीम टीकाकरण करने नहीं पहुंची है ।

कुछ ऐसा ही हाल मुख्यालय से लगभग 65 किमी दूर समग्र गाँव सिकरहानियां का है, सिकरहानियां गाँव निवासी रामकुमार कश्यप बताते हैं,“मेरे चार बच्चे हैं, जिसमें दो लड़के, दो लड़कियां हैं। इसमें सभी को चेचक हो गया है गाँव के पास प्राथमिक स्वास्थ केंद्र पर चेचक की दवा नहीं है इसलिए हमे आठ किमी. शहर तक जाकर दवाई लानी पड़ रही है।” जनपद के ग्रामीण अंचलों में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति तो और चिंतनीय है। जिले की तहसील जलालाबाद , अल्हागंज, मिर्जापुर, मदनापुर व सिंधौली आदि के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मात्र एक-एक डाक्टर के ही सहारे चल रहे हैं।जिले में अभी तक टीकाकरण करने के लिए स्वास्थ्य विभाग का कोई भी व्यक्ति गाँव नहीं पहुंचा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से किये जा रहे तमाम दावे खोखले साबित हो रहे हैं और आशाओं की नियुक्तियों से लेकर प्रधानों की अध्यक्षता वाली स्वास्थ्य समितियां भी बेकार साबित हो रही हैं।

जब इस बारे में बंडा क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर मौजूद डॉक्टर उमेन्द्र सिंह से पूछताछ की गई तो उन्होंने अनभिज्ञता प्रकट करते हुए कहा, “क्षेत्र के गाँवों में चेचक व अन्य कोई संक्रामक रोग फैलने की बात हमारे संज्ञान में नहीं है और न ही अभी तक ऐसा कोई भी मामला सामने आया है।अगर ऐसा है , तो मैं इसकी जांच करवाता हूं।”

रिपोर्टर - आकाश वर्मा

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