गाँवों में गंदगी, फिर भी वीडीओ बनेंगे सफाईकर्मी

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बाराबंकी। गाँवों में साफ-सफाई बनाए रखने की जिम्मेदारी उठाने वाले सफाई कर्मचारी भले ही अपनी ड्यूटी सही तरह से न निभा पा रहे हों पर पंचायती राज विभाग उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपने को तैयार है। पंचायतीराज विभाग, उत्तर प्रदेश ने सफाईकर्मियों को ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर पदोन्नति देने का प्रस्ताव सरकार को सौंपा है।

बाराबंकी जिला मुख्यालय से आठ किमी. दक्षिण दिशा में हरख ब्लॉक के नैमाइपुर गाँव में पिछले तीन वर्षों से कोई भी सफाई कर्मचारी नहीं आया है। गाँव के निवासी रामदीन गुप्ता ( 55 वर्ष) बताते हैं, ‘’गाँव में 2 वर्ष पहले दीवाली पर प्रधान की मदद से सफाई करवाई गई थी, तब से आज तक कोई भी नालियों को साफ करने नहीं आया।” सफाई कर्मियों की गैर मौजूदगी के बारे में बाराबंकी जिला मुख्यालय के जिला पंचायतीराज अधिकारी (डीपीआरओ) जेके गोंड बताते हैं, ‘’पूरे जिले में 1,500 से ज़्यादा राजस्व ग्राम हैं, सभी गाँवों में समय से सफाई कर्मचारियों को भेजने में विभाग के पास अभी पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इसलिए ऐसी परेशानी आ रही हैं।” 

गाँवों में सफाई कर्मचारियों की गैर मौजूदगी किसी एक ग्राम पंयायत की समस्या नहीं बल्कि प्रदेश में अधिकांश पंचायतों में सफाई कर्मचारी अपनी ड्यूटी से नदारद मिलते हैं। हाल ही में गोंडा जिले में 12 ब्लॉकों में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए पंचायत स्तर में 40 मास्टर कर्मचारी रखे गए थे, वहीं 28 कर्मचारी परमानेंट किए गए थे, इसके बावजूद सफाई व्यवस्था नहीं सुधर पाई है।  

गोंडा जिला मुख्यालय से 15 किमी उत्तर दिशा में छुरैपुरवा गाँव में पिछले आठ महीने से सफाईकर्मी नहीं आया है। गाँव के राम सुमिरन (56 वर्ष) अपने घर के आगे लगे कूड़े के ढेर की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, ‘’हमारा घर गाँव के कोने में बना है, इसलिए गाँव के लोग कचरा यहीं डालते हैं। पहले गाँव में सफाई कर्मचारी आता था पर अब वो भी महीनो से नहीं आया इसलिए ढेर कोई हटाता नहीं।”

वर्ष 2008 में बसपा सरकार ने ग्राम पंचायतों को स्वच्छ रखने के लिए एक लाख सफाई कर्मचारियों की भर्ती की थी, जिसमें भारी संख्या में स्नातक से लेकर बीटेक तक के अभ्यर्थी शामिल थे। हालांकि गाँवों में सफाई कर्माचारियों को पहुंचने को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। इन कर्मचारियों की आज तक किसी भी पद पर पदोन्नति नहीं की गई। हाल ही में मौजूदा सरकार ने इस संदर्भ में पंचायतराज विभाग से प्रस्ताव मांगा था, जिस पर निदेशक पंचायतीराज अनिल कुमार दमेले ने सफाईकर्मियों को वीडीओ के 20 फीसदी पदों पर पदोन्नति देने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है।”

‘’जिले में सफाई कर्मचारियों को अपना कार्यभार संभालने के बाद अभी तक प्रमोशन नहीं मिला है। ऐसे में जो सफाईकर्मी योग्य हैं, उनकी भी पदोन्नति अधर में लटकी हुई है। ऐसे में अगर सरकार इस प्रस्ताव से सहमत होती है, तो कई योग्य कर्मियों को उनकी मेहनत का फल मिल सकेगा।” जेके गोंड बताते हैं।

इससे पहले सफाई कर्मचारी संघ ने अपनी मांगों में ग्राम पंचायत अधिकारी के 50 फीसदी पदों पर अपनी नियुक्ति की मांग रखी थी। इस पर विभाग ने 50 फीसदी पदों के बजाए 20 फीसदी ग्राम पंचायत अधिकारियों के पदों पर सफाईकर्मियों की पदोन्नति का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। ‘’सरकार को अभी प्रस्ताव भेजा गया है। अब देखना यह होगा कि सरकार इसको कब तक स्वीकृति देती है। अगर सफाईकर्मियों को पदोन्नति मिलती है, तो यह सरकार का बड़ा कदम होगा।” जेके गोंड (डीपीआरओ) ने आगे बताया। हालांकि पदोन्नति किस आधार पर होगी, इसका फैसला 15 मई को उत्तर प्रदेश राज्य सफाई कर्मचारी संघ की बैठक में नियमावली तय होगी।

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