त्योहारों में 70-80 रुपए लीटर बिक सकता हैं दूध

त्योहारों में 70-80 रुपए लीटर बिक सकता हैं दूधदूध बेचने जाता दूधिया

लखनऊ। हर साल की तरह इस बार भी दशहरा और दीपावली में राजधानी में दूध के दाम आसमान छूने वाले हैं। नवरात्रि पर बाजारों में दूध का रेट 60 रुपए पहुंच गया है, जबकि त्योहारी सीजन में इसके 70 से 80 रुपए लीटर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।

बक्शी का तालाब में बनी दूध मंडी में दूध बेचने आए विशुन सिंह बताते हैं, गाँव से शहर तक दूध लेकर आते हैं तो लाने में जितना खर्चा आता है वो ही लेते हैं। त्योहारों में मिठाई व्यापारियों को ज्यादा दूध चाहिए होता है तो ज्यादा फायदा हो जाता है।

नवरात्रि के मौके पर दूध का रेट 60 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया

दूध व्यापारी अमेंद्र यादव बताते हैं, ‘’त्यौहारों के समय हम लोगों को फायदा मिलता है। मिलावटी दूध नहीं बेचते हैं इसलिए रेट बढ़ा देते हैं और खुला दूध बाजारों में मंहगा ही बिकता है। आम दिनों में 40 से 50 लीटर तक दूध बेचते हैं और त्योहारों के समय 50 से 60 रुपए लीटर तक बेचते हैं।’’

‘’दूध मंहगा होने से मिठाइयां देसी घी, पनीर, आदि की कीमतों में भी उछाल आएगी। दशहरा और दीपावली पर मिठाइयों पर आम आदमी खर्च उतना ही करेगा लेकिन मिठाई कम आएगी। इंदिरा नगर के सी ब्लॉक में रहने वाली गीता मिश्रा बताती हैं, दीपावली ही नहीं हर त्योहार में मिठाइयों के दाम आसमान पर पहुंच जाते हैं। एक छोटी से मिठाई की दुकान में भी 150 किलो से मिठाई की शुरुआत होती है। त्योहारों में लोगों को मजबूरी में लेना भी पड़ता है।

त्योहारों में दूध की मांग ज्यादा हो जाती है। आर्गनाइज़ सेक्टरों में तो दूध की कीमत उतनी ही रहती है लेकिन जो गाँव से दूध खरीद कर मंडी में बेचते है वो अपने दूध के रेट बढ़ा देते है। त्योहारों में सबसे ज्यादा बिचौलिया फायदा उठाते हैं गाँवों में वो 30 से 35 लीटर तक दूध खरीदते हैं और मंडियों में 60 रुपए लीटर तक बेच देते हैं।
के.पी. शर्मा, दुग्धशाला विकास अधिकारी

सुप्रीम कोर्ट ने दिए मिलावट के खिलाफ सख्ती बरतने के आदेश

त्योहारों में होने वाली मिलावटों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जिन इलाकों में दूध उत्पादक ज्यादा हैं और जिन त्योहारों पर दूध से बने उत्पादों की ज्यादा बिक्री होती है, उनमें खास चौकसी बरती जाए। खाद्य विभाग के अधिकारी बड़े पैमाने पर सैंपल जमा कर जांच करें। बीच-बीच में अचानक डेयरी उत्पादकों की जांच की जाए। राज्य सरकार के खाद्य विभाग के अधिकारी मोबाइल टेस्टिंग वैन के साथ मौके पर पहुंचे और जांच करें। राष्ट्रीय स्तर पर फूड सेफ्टी एन्ड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एफएसएसएआई) भी जांच करे।

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