गाँव चौपाल

आ गया किसानों का ओएलएक्स

लखनऊ। कर्नाटक राज्य की राजधानी बैंगलोर में कृषि के क्षेत्र में ऐसी शुरुआत हुई है जो आने वाले समय में कृषि व्यापार का भविष्य तय करेगी।

कर्नाटक के खाद्य एवं रसद मंत्री दिनेश गुण्डु राव ने बैंगलोर में आज कृषि व संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत निजी कंपनी टीजीएस ग्रुप की पहल 'किसान मार्केट' नामक एक वेबसाइट की शुरुआत की। इस वेबसाइट के ज़रिए खरीददार और विक्रेता किसान दोनों एक मंच पर आते हैं। 

यह कुछ वैसी ही व्यवस्था है जैसी देश में पहले से प्रचलित 'ओएलएक्स' या 'क्विकर' जैसी वेबसाइटें उपलब्ध करा रही हैं, यानि बेचने और खरीदने वाले के बीच सीधे संपर्क स्थापित कराना। इस तरह की पहल के देश भर के किसानों में प्रचलित होने के आड़े सिर्फ एक समस्या आएगी वो है किसानों की साक्षरता दर का कम होना। हालांकि दक्षिणी भारत के राज्यों में यह दर अधिक होने के चलते प्रयास के वहां सफल होने की बहुत संभावना है।

''किसान, होलसेल वाले और (कृषि उत्पाद पर आधारित) व्यापार-उद्योग इस तरह के उपायों की तलाश में थे। अब वे बिना किसी राज्यों की सीमाओं की बाधा की चिंता किए लेन-देन कर सकते हैं," वेबसाइट के चेयरमेन त्यागराज रजापल्ली ने हंस इंडिया पोर्टल को दिए गए अपने साक्षात्कार में कहा।

देश में कृषि एक बुरे समय से गुज़र रही है। अपेक्षित 4.0 प्रतिशत की वृद्घि दर से काफी कम 0.2 प्रतिशत की वृद्घि दर से भारत की खेती जूझ रही है। विपरीत मौसमी परिस्थितियों के चलते किसान के नुकसान के अलावा इस कृषि क्षेत्र की इस स्थिति के मुख्य कारणों में बिचौलियों के बीच फंसा कृषि व्यापार तंत्र भी है। जिसके चलते किसानों को अपने उत्पादन का उचित दाम या न्यूनतम समर्थन मूल्य भी मिल पाना असंभव होता जा रहा है।

वेबसाइट के ज़रिए फल, अनाज, मसाले, फूल, पोल्ट्री उत्पाद, दुग्ध उत्पाद, मछली उत्पादन, खाद, कृषि उपकरण, नर्सरी से संबंधित उत्पाद, जैविक खेती, कपास, लकड़ी व टिम्बर, औषधीय फसल, सौर ऊर्जा व कृषि भूमि की लेने-देने से जुड़े व्यापार को अंजाम दिया जा सकता है।

किसी भी आम कृषि मण्डी की तरह ही इस काल्पनिक मण्डी में भी खरीददार किसान से उसके उत्पाद को लेकर जानकारी पा सकता है, मोल-भाव कर सकता है, तय होने पर खरीद भी कर सकता है। अच्छी बात यह भी है कि अपने उत्पाद के दाम किसान खुद तय करता है, बिचौलिये का अस्तित्व ही खत्म।

किसान मार्केट वेबसाइट भारतीय किसानों को न सिर्फ बिना झंझट वाला एक ऐसा मंच उपलब्ध कराती है जहां जागरूक किसान अपने उत्पाद का न्यायसंगत मूल्य तय करके खरीददारों से सीधे संपर्क स्थापित कर सकता है। साथ उन खरीददारों के लिए भी अच्छा विकल्प है जो खेत से निकले ताज़ा उत्पाद तो चाहते हैं, लेकिन इसके लिए कहां जाएं ये नहीं पता।