साइकिल मिलने से 2017 में अखिलेश की वापसी की राह आसान हुई: ग्रामीण

साइकिल मिलने से 2017 में अखिलेश की वापसी की राह आसान हुई: ग्रामीणलखऩऊ में सपा कार्यालय पर जश्न मनाते कार्यकर्ता। फोटो- विनय गुप्ता

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। पार्टी के बाद समाजवादी का चुनाव चिन्ह भी अखिलेश को मिलने पर उनके समर्थक गदगद हैं। चुनाव आयोग के फैसले को सही बताते हुए गांव के लोगों का मानना है कि अखिलेश युवा हैं और वो ही पार्टी को आगे ले जा सकते हैं। कई लोगों ने ये भी कहा कि अब 2017 में सपा की वापसी संभावनाएं बढ़ गई हैं।

सोनभद्र जिले में घोरावल ब्लाक के अरुण पांडे (32 वर्ष) बताते हैं, "बहुत अच्छा है अखिलेश को साइकिल चुनाव चिन्ह मिल गया है। अखिलेश ने काफी अच्छा कार्य किया है, जनता उन्हें पसंद करती है।” वहीं सोनभद्र के ही दुद्धी के रहने वाले अभय सिंह (38 वर्ष) बताते हैं, “ चुनाव आयोग का संविधानिक फैसला है। युवाओं को अखिलेश से काफी उम्मीदे हैं।”

अखिलेश का चेहरा आगे होने से 2017 में चुनाव जीतने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। हालांकि कुछ नेताओं की कांग्रेस से गठबंधन को लेकर धड़कने बढ़ी हुई हैं।”
निशार अहमद, इटवा, सिद्धार्थनगर

यूपी के दूसरे कोने सिद्धार्थनगर में इटवा के स्थानीय पत्रकार निसार अहमद बताते हैं, “लोग मानते हैं कि अखिलेश का चेहरा आगे होने से 2017 में चुनाव जीतने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। हालांकि कुछ नेताओं की कांग्रेस से गठबंधन को लेकर धड़कने बढ़ी हुई हैं।”

समय रहते नेता जी को यह काम खुद कर देना चाहिए था, लेकिन अब स्वयं यह हो गया। अखिलेश सत्ता में आएंगे तो ऐसे कई रुके हुए काम पूरे होंगे।
मयंक पांडे, भीरा गोविंदपुर, रायबरेली

कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में भी लोग चुनाव चिन्ह अखिलेश को मिलने से खुश हैं। भीरा गोविंदपुर के मयंक पांडे बताते हैं, “अखिलेश यादव को साइकिल मिलना एक सशक्त युग की शुरूआत है। अखिलेश सत्ता में आएंगे तो ऐसे कई रुके हुए काम पूरे होंगे, जो अखिलेश ने इस बार बाकी छोड़े हैं। समय रहते नेता जी को यह काम खुद कर देना चाहिए था लेकिन अब स्वयं यह हो गया।” पिता-पुत्र में कई महीनों से चल रहे विवाद को सोची समझी रणनीति भी कहा जाता है। कुछ लोगों ने कहा कि कि ये मुलायम ने पुत्र का भविष्य संवारा है तो कुछ लोगों ने कहा कि इससे सपा को नुकसान होना तय है। बाराबंकी में तुरकौली निवासी कौशल किशोर कहते हैं, “सब नाटक था चलो खत्म हुआ।” हालांकि सपा कार्यकर्ता और पार्टी में आस्था रखने वाले लोग इससे इत्तफाक नहीं रखते।

मुख्यमंत्री जी नेताजी का बहुत आदर करते हैं। आज भी चिन्ह मिलने के बाद वो उनसे मिलने गए। उनकी लड़ाई पिता नहीं कुछ लोगों के खिलाफ थी, जनता सब देख रही है। अगर कोई विकास के खिलाफ लड़ना चाहता है तो सीएम के खिलाफ चुनाव लड़ेगा।
निधि यादव, इलाहाबाद

इलाहाबाद से सपा कार्यकर्ता निधि यादव कहती हैं, “ अब देखना पार्टी 300 सीटे जीतेगी। जनता अखिलेश जी को विकास के पर्याय के रुप में देखती है, उनके पास पहले से पार्टी और कार्यकर्ता और जनता का समर्थन था।” मुलायम के अखिलेश पर पलटवार पर जनता और कार्यकर्ताओं पर असर की बात पर निधि कहती हैं, “मुख्यमंत्री जी नेताजी का बहुत आदर करते हैं। आजतक उन्होंने एक शब्द नहीं कहा। आज भी चिन्ह मिलने के बाद वो उनसे मिलने गए। उनकी लड़ाई पिता नहीं कुछ लोगों के खिलाफ थी, जनता सब देख रही है। अगर कोई विकास के खिलाफ लड़ना चाहता है तो सीएम के खिलाफ चुनाव लड़ेगा।”

पार्टी पहले भी अखिलेश की थी। अब चुनाव चिन्ह को लेकर संशय खत्म हो गया है। नया चिन्ह होता तो ज्यादा मेहनत करनी पड़ती।
अमित सिंह, दौलतपुर, बाराबंकी

फैजाबाद में पार्टी कार्यालय पर जश्न मनाते कार्यकर्ता। फोटो- रबीश वर्मा

बाराबंकी में सूरतगंज ब्लॉक में प्रधानसंघ के उपाध्यक्ष और ग्राम प्रधान अमित सिंह कहते हैं, “पार्टी पहले भी अखिलेश यादव की थी। अब चुनाव चिन्ह को लेकर संशय खत्म हो गया है तो प्रचार तेज होगा, लोगों को सिर्फ पार्टी बतानी है, चिन्ह सब जानते हैं, नया चिन्ह होता तो ज्यादा मेहनत करनी पड़ती।” सोनभद्र में घरसड़ा गांव के विपिन दुबे खुश हैं कि अखिलेश की राह का एक और अड़ंगा हट गया। तो करुवा ग्राम पंचायत के अऩिल बाजपेई मानते हैं कि चुनाव चिन्ह पर संशय से जो वोट कट रहे थे साइकिल मिलने से वो वापस आ गए।

इऩपुट- सोनभद्र से करनपाल सिंह, रायबरेली से देवांशु तिवारी, लखनऊ से अरविंद शुक्ला और दिपांशु मिश्रा, बाराबंकी से वीरेंद्र शुक्ला

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