बाराबंकी में गांव कनेक्शन के साथ मिलकर आशा बहुएं महिलाओं को करेंगी जागरुक

बाराबंकी में गांव कनेक्शन के साथ मिलकर आशा बहुएं महिलाओं को करेंगी जागरुकगाँव कनेक्शन फाउंडेशन से मिलकर आशा बहुओं ने जानी अपनी जिम्मेदारियां।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

बाराबंकी। जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर स्थित सूरतगंज ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य क्रेंद में आशा बहूओं को ग्रामीण महिलाओं की देखरेख के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है।

भारत के पहले ग्रामीण अखबार गाँव कनेक्शन के साथ मिलकर समाज में हो रहे अव्यव्हारों और बुराइयों को दूर करने को लेकर आशा बहुओं ने अपना मत दिया। साथ ही गाँव कनेक्शन फाउंडेशन के साथ मिलकर समाज में फैली अज्ञानता को दूर कर जागरूकता फैलाने का निश्चय किया। ग्रामीण महिलाएं आशा बहुओं को अपनी प्रथम गुरु मानती हैं।

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आशा कर्मियों को पांच चरणों में 23 दिन का गहन प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाता है। गाँव में छह महीने काम करने के बाद आशा कार्यकर्ता को यौन संक्रमित रोगों व इनकी रोकथाम और उपचार के केंद्रों सहित एचआईवी/एड्स के बारे में बताया जाता है।

आशा को नवजात शिशु की देखभाल करने के बारे में भी प्रशिक्षण दिया जाता है। केंद्र सरकार उनके प्रशिक्षण, प्रोत्साहन राशि और मेडिकल किट का खर्च उठाती है। बाकी के खर्च के लिए इस कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य सरकारों को केंद्रीय सहायता दी जाती है। 7.99 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ताओं को अब तक दवाओं के किट दिये जा चुके हैं, जिनमें आम बीमारियों में काम आने वाली आयुष की जेनरिक दवाएं और एलोपैथिक दवाएं होती हैं।

करीब 80 फीसदी महिलाओं ने की पुष्टि

योजना आयोग द्वारा कराये गये अध्ययन से पता चलता है कि इस कार्यक्रम से जिन लोगों को लाभ पहुंचा है, उनमें से 65 प्रतिशत से भी अधिक लाभार्थियों के पास 15 से 30 दिनों के अंदर एक बार आशा कार्यकर्ता जाती है। 80 प्रतिशत लाभार्थियों ने इस बात की पुष्टि की है कि आशा से उन्हें मुफ्त दवाएं मिलती हैं। 65 प्रतिशत महिलाओं ने अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसूति कराई है और 60 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने आशा की प्रेरणा से जन स्वास्थ्य केंद्रों से प्रसूति-पूर्व की सेवाओं का फायदा उठाया है।

आशा बहुओं को कार्यशाला में प्रशिक्षण देते गाँव कनेक्शन कम्युनिटी जर्नलिस्ट।

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आशा बहुओं की कार्यशाला।

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