लावारिस बच्चों की सुरक्षा और देखभाल को गाँव-गाँव बन रहीं कमेटियां

लावारिस बच्चों की सुरक्षा और देखभाल को गाँव-गाँव बन रहीं कमेटियांफोटो प्रतीकात्मक

अजय कुमार मिश्र/विजय राठौर, कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

कन्नौज। बाल संरक्षण समिति को अब गाँव-गाँव गठित कर सक्रिय किया जा रहा है। ब्लॉक और जिलास्तर पर भी कमेटियां गठित हो चुकी हैं। बैठकों का सिलसिला भी चल रहा है। इससे बच्चों पर होने वाल अत्याचार, यौन पोषण को ही नहीं रोका जाएगा, बल्कि लावारिश बच्चों की सुरक्षा और देखभाल भी की जाएगी। समय-समय पर समीक्षा बैठकें भी होंगी।

उत्तर प्रदेश की ओर से जारी शासनादेश के तहत समेकित बाल संरक्षण योजना के तहत जिले में 18 साल से कम आयु के शिशु, बालक, बालिका के लिए बाल संरक्षण के सशक्त संरक्षणात्मक परिवेश का निर्माण, उचित पालन पोषण करने, परिवार की देखरेख पाने, प्रतिष्ठा के साथ रहने, बच्चों को हिंसा व दुर्व्यहार से बचाने के उद्देष्य से जनपद, विकास खंड एवं ग्राम सभा स्तर पर बाल संरक्षण इकाई का गठन किया जाना है। तीन महीने में अनिवार्य रूप से बैठक होगी। इसमें ग्राम सभा और ब्लॉक स्तर पर बच्चों की सुरक्षा, संरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, देखरेख सम्बन्धी बिंदुओं की समीक्षा होगी। समिति यह भी तय करेगी कि बाल श्रम, बाल यौन शोषण, पलायन, ट्रैफिकिंग या किसी प्रकार के बच्चों के साथ क्रूरता न हो। अगर ऐसी कोई भी घटना संज्ञान में आती है तो सभी तथ्यों का आंकलन कर संबंधित थाने में विशेष किशोर पुलिस इकाई, जिला बाल संरक्षिण समिति, बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड को तत्काल कार्रवाई के लिए सूचना दी जाएगी। समिति क्षेत्र में नए आने वाले बच्चों, गांव से बाहर गए बच्चों और कारित अपराध में आरोपित बच्चों के सम्बंध में समय-समय पर सूचना प्राप्त करेगी। उसे जिला बाल संरक्षण समिति एवं विशेष किशोर पुलिस इकाई को भी जानकारी देगी। संरक्षण अधिकारी का कहना है कि तालग्राम, छिबरामऊ और हसेरन ब्लॉकों में प्रषिक्षण दिया जा चुका है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की भी जानकारी दी जा रही है। इसमें लावारिस बच्चे, घर से भागे बच्चे, बेसहारा और बीमार बच्चों की सूचना दी जा सकती है।

आर्थिक समस्या पर भी देना होगा ध्यान

बाल संरक्षण समितियां क्षेत्र में आर्थिक समस्या से जूझ रहे बच्चों के पालन-पोषण न करने वाले परिवारों को भी चिहिन्त कर रोजगार परक योजनाओं से अभिभावकों को लाभान्वित कराकर परिवार को बच्चों के उचित पालन-पोषण के लिए मजबूत बनाने का काम करेंगी। जो बच्चे शिक्षित नहीं हो पा रहे हैं उनके परिवारों को भी चिहिन्त कर प्रवर्तकता कार्यक्रम के तहत वित्तीय सहायता के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगी। ब्लॉक एवं ग्राम सभा में अनिवार्य शिक्षा के लिए सभी बच्चों का स्कूल में प्रवेश भी कराने का दायित्व कमेटी का होगा। साथ ही ऐसे बच्चों की निरंतर उपस्थिति भी जांची जाएगी।

टीकाकरण की भी जिम्मेदारी

समिति ब्लॉक और ग्राम सभा के हर बच्चों का टीकाकरण और स्वास्थ्य सम्बन्धी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित कराते हुए कार्यक्रम की लगातार मॉनीटरिंग की जाएगी। समेकित बाल विकास पुश्टाहार विभाग की ओर से संचालित योजना के तहत गुणवत्ता परक पोषाहार वितरण के कार्यक्रमों की निगरानी भी करेगी।

छोड़े गए नवजात की तत्काल देनी होगी सूचना

समिति अपने क्षेत्र में परित्यक्त नवजात षिषुओं के मिलने पर तत्काल थाने के बाल कल्याण अधिकारी, विषेश किषोर पुलिस इकाई, जनपद की बाल कल्याण समिति एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी/जिला प्रोबेषन अधिकारी को तुरंत सूचना देगी, जिससे नवजात को संरक्षण और चिकित्सा सुविधा मिल सके। उत्तर दायित्यों को सही ढंग से निर्वहन करने के लिए ब्लॉकस्तर पर टेªनिंग दी जाएगी। मॉडयूल तैयार करने की बात भी कही गई है। उसे जिलों में भेजने का आदेष है। आईसीपीएस योजना के तहत प्रषिक्षण मद में आवंटित धनराषि से जिला बाल संरक्षण समिति की आरे से जिला के बाल संरक्षण क्षेत्र में प्रतिश्ठित संस्थानों/संगठनों के जरिए से प्रषिक्षण का कार्यक्रम सुनिष्चित कराया जाएगा।

किशोर न्याय बोर्ड का भी गठन

जिले में किषोर न्याय बोर्ड का भी गठन कर दिया गया है। सूची भी षासन से आ चुकी है। इसमें संतोश कुमार यादव और अलका रानी को सदस्य नामिति किया गया है। प्रतीक्षा सूची में राज्य वर्धन षुक्ल और उदयवीर सिंह रखे गए हैं। इसी तरह बाल कल्याण समिति में अध्यक्ष उदयवीर सिंह को बनाया गया है। रघुवीर झा, उर्मिला देवी, उमा सिंह और भानू प्रिया को सदस्य बनाया गया है। प्रतीक्षा सूची में अलका रानी, बाबूराम प्रजापति और जगतेंद्र सिंह को रखा गया है। संरक्षण अधिकारी विजय कुमार राठौर ने बताया कि जिनको आपत्ति हो वह दे दें, ताकि समय रहते निस्तारण कराया जा सके।

1.ब्लॉक बाल संरक्षण समिति ऐसी होगी

ब्लॉक प्रमुख-अध्यक्ष

खंड विकास अधिकारी- सचिव

बाल विकास परियोजना अधिकारी-सदस्य सचिव

सहायक पंचायत अधिकारी- सदस्य

संरक्षण अधिकारी-- सदस्य

खंड षिक्षा अधिकारी- सदस्य

बीडीओ द्वारा नामिति चिकित्साधिकारी--सदस्य

2. ग्राम बाल संरक्षण समिति

प्रधान-अध्यक्ष

आंगनवाड़ी कार्यकत्री-सदस्य सचिव

ग्राम पंचायत अधिकारी-सदस्य

एएनएम- सदस्य

आषा बहू-सदस्य

संबंधित ग्राम सभा के प्राथमिक स्कूल के हेडमास्टर-----सदस्य

ग्राम सभा के दो सम्मानित अभिभावक में कम से कम एक महिला सदस्य होगी

ग्राम सभा के दो बाल प्रतिनिधि भी सदस्य होंगे

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top