करोड़ों रुपए खर्च, फिर भी सूखे हैं तालाब

करोड़ों रुपए खर्च, फिर भी सूखे हैं तालाबतालाबों की खुदाई पर करोड़ों रुपए खर्च हुए इसके बावजूद तालाबों में पानी नहीं है।

लखनऊ। गर्मी आते ही गाँवों में आग लगने की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे में फायर स्टेशन दूर होने के चलते फायर ब्रिगेड को घटनास्थल पर पहुंचने में समय लग जाता है। स्थिति और ज्यादा तब खराब हो जाती है जब गाँव के तालाब में भी आग बुझाने के लिए पानी न हो। प्रदेश में तालाबों को जलभराव के लिए चिन्हित किया जा रहा है।

प्रदेश में जल संरक्षण के लिए वित्तीय वर्ष 2015-16 में 32 हजार तालाब खोदे जा गए थे। जिसमें लखनऊ जिले में 461 तालाब खोदे गए थे। वर्ष 2015 में 550 तालाब और पिछले वर्ष 202 तालाब खोदे गए थे। इन तालाबों की खोदई पर करोड़ों रुपए खर्च हुए। इसके बावजूद तालाबों में पानी नहीं है।

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प्रदेश में बहुत से ऐसे तालाब हैं, जिन पर ग्रामीणों ने कब्जा कर रखा है। कोई तालाब में खेती कर रहा है तो किसी ने सूखे तालाब के बीच से रास्ता निकाल लिया है तो कहीं पर प्लाटिंग हो रही है। तलाब पर कब्जे की शिकायत लगातार तहसील दिवस में आ रही है। मुख्य विकास अधिकारी प्रशान्त शर्मा बताते हैं, “ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जे के जितने भी मामले संज्ञान में आते हैं उन पर तुरन्त कार्रवाई करते हैं।” विकास खण्ड मलिहाबाद में भतोइया गाँव में योजना के तहत खदरा नाता का तालाब खोदा गया था, जिसमें दो लाख का खर्च आया है। लेकिन अब तालाब नहीं बचा है। मलिहाबाद में बहुत से तालाब ऐसे हैं जहां पर कब्जा हो चुका है। माल ब्लॉक में उमरावल में पूर्वी तालाब बनाया गया था, उस तालाब पर भी कब्जा किया जा चुका है।

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बख्शी का तालाब ग्राम पंचायत अरत्बा में सोहरा ताली तालाब बनाया गया है जिसमें तीन लाख रुपये खर्च किया गया। तालाब में पानी भी भरा गया है। वही थोडी दुर चमरकुण्ड नाम का तालाब बनाया गया है। ग्राम पंचायत मिश्रीपुर में बनाया गया है।

मुख्यमंत्री जल बचाओं योजना के तहत माल ब्लॉक में 75 तलाब खुदवाने का लक्ष्य था जिसमें से 63 तलाब खोदे गए है। जल संरक्षण के लिए तालाब तैयार है।
जेपी सिंह, खण्ड विकास अधिकारी, मॉल ब्लॉक

बाराबंकी जिलामुख्यालय से 49 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत भिखरा के रहने वाले सुरेश कुमार 44 वर्ष बताते हैं, गांव के तालाब पर पूर्व प्रधान ने कब्जा कर लिया है। जिसके लिए हम लोग तहसील में लगातार शिकायत कर रहे है, लेकिन कोई हल नहीं निकाला जा रहा है।

जिले में लगातार भूमाफियाओं द्वारा सरकारी तालाबों पर अवैध कब्जा कर प्लाटिंग किया जा रहा है और कब्जा करवाने में प्रशासन की मिली भगत सामने आ रही है। एक तरफ सरकार मनरेगा योजना के तहत करोड़ों अरबों रुपए लगाकर तालाबों की खोदाई करवाई जा रही है वही भूमाफिया तालाबों को पाट कर उनपर अवैध प्लाटिंग कर मोटी रकम कमा रहे है और इस काम में सबसे अहम भूमिका लेखपालों की है जिनकी जानकारी में दिन रात सरकारी तालाबों पर अवैध कब्जे किये जा रहे है ।

एक तरफ सूखे से लोग बेहाल है और लगातार आगजनी की घटनाओं में ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों में पानी पूरी तरह सूख चुका है क्योकी उन तालाबों के आस पास लोगो ने कूड़ा करकट ड़ालकर तालाबों का अस्तित्व मिटा दिया है हाल ही में हुयी अग्नि काण्ड की घटनाओं को अगर देखा जाय तो आग को बुझाने के लिए तालाबों में एक बूँद लोगों को पानी नसीब नहीं हो सका है और न ही लोग अपने घरों में लगे नलकूपों से ही आग को काबू कर सके है ।

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