गाँव चौपाल

योग्य के साथ किया दुर्व्यवहार, अयोग्य का दिया साथ

अजय मिश्र (स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क)

कन्नौज। ‘‘पिछली सरकार ने योग्य के साथ दुर्व्यवहार किया है। अयोग्य शिक्षामित्र दिए, उसका भी सरकार ने पूरी तरह पालन न करके नजरअंदाज किया। यूपी की नई सरकार पर विश्वास है कि बीएड-टीईटी उत्तीर्ण के लिए कुछ न कुछ जरूर किया जाएगा।’’

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जिला मुख्यालय से करीब 26 किमी. दूर रहने वाले खैरनगर क्षेत्र के बरियारपुर्वा निवासी 33 साल के आलोक शुक्ल का ही यह कहना नहीं है, बल्कि सूबे के हजारों अभ्यर्थियों का भी इससे मिलता-जुलता मत है, जो हजारों रूपए बर्बाद करने के बाद भी नौकरी नहीं पा सके हैं। तिर्वा कस्बे के दुर्गानगर निवासी 35 साल के इंद्रपाल सिंह का कहना है कि ‘‘योगी सरकार ऐसा निर्णय ले, जिससे वर्ष 2011 के अभ्यर्थियों का भविष्य उज्जवल हो सके। पांच साल से सैकड़ों लोग त्रस्त हैं।’’ बता दें कि वर्ष 2011 में प्राथमिक स्कूलों में 72,825 पदों पर भर्ती शुरू की गई थी।

एक आवेदन का 500 रूपए था। एक-एक अभ्यर्थी ने कई जिलों में आवेदन किए। 25-35 हजार रूपए खर्च कर दिया। एक विशेष वर्ग की टीईटी की फर्जी मार्कशीट बनवाकर कुछ लोगों को नौकरी दे दी गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 1100 याची को भी लाभ दिया गया। इंद्रपाल कहते हैं कि ‘‘करीब 1.80 लाख सूबे के लोग अब भी परेशान हैं। अगर फर्जी अंकपत्र न बनते तो एससी और ओबीसी में 90 अंक और सामान्य वर्ग में 105 अंक टीईटी में लाने वाले को नौकरी मिल जाती।’’

बहादुरपुर गाँव निवासी 35 वर्षीय अरूण कुमार का कहना है कि ‘‘चुनाव से पहले भाजपा ने बीएड और टीईटी को भर्ती में प्राथमिकता देने की बात कही थी। अब सरकार क्या कर रही है, यह स्पष्ट हो।’’ वहीं, 33 वर्षीय नथापुर्वा गाँव निवासी योगेंद्र का कहना है कि ‘‘हमें उम्मीद है कि करीब छह साल से परेशान बीएड-टीईटी उत्तीर्ण के लिए सरकार सही काम करेगी। सपा सरकार में अयोग्य लोगों को शिक्षक बना दिया गया, जो नौकरी कर घूम रहे हैं।’’

‘हमें सरकार से हैं उम्मीदें’

कलुआपुर गाँव के 30 वर्षीय सुनील कुमार कहते हैं कि ‘‘अगर भाजपा ने परेशान अभ्यर्थियों की न सुनी तो सपा जैसा उसका भी हश्र होगा। बड़ी उम्मीद से वोट किया था।’’ उहिदापुर गाँव निवासी 33 साल के पुष्पराज बताते हैं कि ‘‘उनको उम्मीद है कि भाजपा सरकार सुप्रीम कोर्ट में बीएड और टीईटी का साथ देगी और न्यायालय के निर्णय का पालन करेगी।’’

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