नगर का विस्तार फाइनल, गुटबाजी से नहीं लगी आपत्तियां

नगर का विस्तार फाइनल, गुटबाजी से नहीं लगी आपत्तियांनगर पंचायत शोहरतगढ़ के सीमा विस्तार को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है।

सुजीत अग्रहरि, स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

शोहरतगढ़। नगर पंचायत शोहरतगढ़ के सीमा विस्तार को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। नगर विकास विभाग ने नगर का विस्तार फाइनल कर शासनादेश जारी करके 15 दिनों के भीतर आपत्तियां मांगी थी, लेकिन गुटबाजी के चलते आपत्तियां नहीं लग सकी हैं। नगर विकास ने नए परिसीमन में 6 गाँवों को नगर पंचायत के दायरे में लाने की मंजूरी दिया है। उम्मीद है कि नई सरकार बनते ही कैबिनेट राज्यपाल के पास फाइल भेज कर परीसीमन का अध्यादेश जारी करने की मुहर लगाएगी। हालांकि नगर का दायरा बढ़ जाने से प्रत्याशियों की नींद गायब हो गई है तो जनता में शहरी सुविधा मिलने की खुशी दौड़ रही है।

नगर के सीमा विस्तार की जानकारी 2 जनवरी को हुई। अखबारों में प्रकाशन डीएम स्तर से होना था, चुनाव की अधिसूचना भी जारी हो चुकी थी, इसलिए मैं कुछ नहीं कर सका।
विकास आनन्द, अधिशाषी अधिकारी (नगर पंचायत शोहरतगढ़)

नगर विकास विभाग उप्र ने नगर पंचायत शोहरतगढ़ के परीसीमन को मंजूरी देकर पिछले छह माह से चल रही चर्चाओं पर विराम लगा दिया है। इससे नगर का विस्तार फाइनल हो गया है। 2 जनवरी 2017 को नगर विकास ने परिसीमन का शासनदेश जारी कर 15 दिनों के भीतर आपत्तियां मांगी थी, लेकिन भाजपा चेयरमैन की बेरूखी का शिकार नगर पंचायत के अधिकारियों- कर्मचारियों ने कागजात की जानकारी खुद रखकर किसी को बताना उचित नहीं समझा। जबकि शासनादेश में साफ तौर पर लिखा है कि जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर उक्त अधिसूचना को स्थानीय समाचार पत्र एवं राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रकाशित कराएं, लेकिन यह अधिसूचना कहां प्रकाशित हुई इसकी जानकारी स्थानीय लोगों को नहीं हो सकी।

अधिशाषी अधिकारी विकास आनन्द की मानें तो प्रकाशन डीएम स्तर से होना था, इसलिए वह चुप्पी साधे रहे। इसके चलते चेयरमैन, प्रधान और कोई अन्य व्यक्ति नियत तिथि 18 जनवरी बीतने तक आपत्ति नहीं लगा सका। वहीं चेयरमैन बबिता कसौधन परिसीमन की अफवाह उड़ाकर पिछले छह माह के भीतर लगभग करोड़ों रुपए का काम नगर की सीमा से बाहर करा चुकी हैं, जिसमें अधिशाषी अधिकारी की मिली भगत शामिल है। वहीं, शासनादेश जारी होने से साफ हो गया है कि नगर पंचायत के दायरे में 6 गाँव शामिल किए गए हैं। उम्मीद है कि चुनाव के बाद परिसीमन को मंजूरी देने के लिए राज्यपाल के पास फाइल भेज कर अध्यादेश जारी कराएगी।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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