गाँव के लोगों में आएगा आत्मविश्वास: महेश भट्ट

गाँव के लोगों में आएगा आत्मविश्वास: महेश भट्टगाँव कनेक्शन

अर्थ, सारांश, ज़ख्म जैसी फिल्मों से बॉलीवुड में ख़ास जगह बनाने वाले फिल्म निर्देशक महेश भट्ट ना सिर्फ  लोकप्रिय फिल्मकार हैं, बल्कि समाज, राजनीति और देश से जुड़े मुद्दों पर बेबाक राय भी रखते हैं। लखनऊ में दो दिसंबर को गाँव कनेक्शन की तीसरी वर्षगांठ पर शुरू किए गए 'स्वयं अवार्ड्स में शामिल होने के लिए आए महेश भट्ट से बात की गाँव कनेक्शन टीवी की संवाददाता वसंती हरिप्रकाश ने।

सवाल : बारह ग्रामीण प्रतिभाओं को स्वयं अवार्ड से सम्मानित किया गया। ऐसी कौन सी कहानी जो आपके दिल को छू गई?

जवाब: कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही मैं जानता था कि यह एक नया अनुभव होने वाला है। बहुत से अनोखे लोगों से मिला, लेकिन मेरे लिए वो लम्हा बहुत ख़ास था, जब मैं उस महिला से मिला जो अपने भाई को बचाने के लिए तेंदुए से लड़ गई। वो महिला सज-धज कर आई हुई थी, लेकिन उसकी आंखें सूनी थी। मुख्यमंत्री जी ने उस महिला से पूछा कि वो उसकी क्या मदद कर सकते हैं, लेकिन वो कुछ कह नहीं पाईं। क्योंकि उसे समझ ही नहीं आया कि वो क्या मांग सकती है। कुछ लोग अपनी सोच को इतना मार लेते हैं कि वो कभी सोच भी नहीं पाते कि वो जि़ंदगी में क्या कर सकते हैं। अक्सर हमें बोला जाता है कि जि़ंदगी किसी तरह काट लो। पूरी तरह जीने का जज़्बा कभी हमारे अंदर आता ही नहीं। 

सवाल : गाँव कनेक्शन फाउंडेशन द्वारा शुरू किए गए 'स्वयं अवार्ड' को कैसे देखते हैं?

जवाब: मैं हमेशा कहता हूं कि हमें सिर्फ  हालात से समझौता नहीं करना चाहिए, सिर्फ  गुज़ारा नहीं करना चाहिए। बल्कि हमें खुलकर जीना चाहिए। 'स्वयं अवार्ड' इसी भावना को जगाने की कोशिश कर रहा है।  

गाँव के लोगों में यह भावना जगाना कि जब ये महिलाएं कर सकती हैं, इस अदा से जी सकती हैं, तो आप क्यों नहीं? एक बार यह अहसास होना शुरू हो जाए तो हम इस देश की महिलाओं को जगा पाएंगे। जो इतिहास के पैरों तले सदियों से दबी हुई है। गाँव कनेक्शन की यह मुहिम एक क्रांतिकारी कदम है।  

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