हर गांव की तीन समस्याएं : सड़क, शौचालय और राशन के लिए भटक रहे ग्रामीण

Deepanshu MishraDeepanshu Mishra   17 May 2017 5:02 PM GMT

हर गांव की तीन समस्याएं : सड़क, शौचालय और राशन के लिए भटक रहे ग्रामीणमूलभूत सुविधाओँ से वंचित हैं सैकड़ों गांव।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। “हमारे पास एक बीघे भी खेती नहीं है, इसके बावजूद हमें किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। हमारे पास राशन कार्ड तक नहीं है। गाँव की सड़क की हालत खस्ता है। शौचालय की भी समस्या है।” ऐसा कहना है जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूरी पर बख्शी का तालाब ब्लॉक के गदेला गाँव में रहने वाली कुशमा देवी (35 वर्ष) का।

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गाँव कनेक्शन की टीम ने लखनऊ के कई गाँव जैसे पुरवा, छोटी देवाकली, बड़ी देवाकली, बौरामऊ, लालपुर में अपनी चौपाल लगाकर ग्रामीणों से उनकी समस्याएं जानीं। हर गाँव की प्रमुख समस्या सड़क का न होना, शौचालय का न होना और पात्र लोगों के पास राशन कार्ड का न होना रही।

लखनऊ जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर चिनहट ब्लॉक उत्तर दिशा के पुरवा गाँव की सबसे पढ़ी-लिखी महिला सुमन (53 वर्ष) बताती हैं, “हमारे गाँव में नाम मात्र के शौचालय हैं जो लोगों ने स्वयं बनाए हैं, एक दो घर ऐसे हैं जहां पर अनुदान वाले शौचालय बनाए गए हैं जो बालू के बने हैं वो एक-दो साल में खराब हो गए। जब ऐसे ही शौचालय बनाने हैं तो क्यों फालतू में पैसा बर्बाद करती है सरकार।”

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राशन कार्ड का मामला मेरे संज्ञान में आया है, अगर लोगों के पास राशन कार्ड नहीं हैं तो जो पात्र हैं उनके राशन कार्ड बनाए जाएंगे। जल्द ही लोगों को इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।
अजय चौहान, आयुक्त, खाद्य एवं रसद विभाग

इण्डिया स्पेंड की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 15.7 करोड़ लोगों के पास शौचालय नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दो अक्टूबर, 2014 को शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन के तहत नवम्बर 2016 तक 40 फीसदी व्यक्तिगत शौचालयों (26.6 मिलियन शौचालय) का निर्माण किया गया है। इस योजना के तहत 2019 तक भारत को खुले में शौच से मुक्त बनाना है। इसके लिए 66.4 मिलियन शौचालयों का निर्माण करना है।

गाँव में वाकई सड़क की समस्या है। इस समस्या से निपटने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत होती है फंड की, जब तक फंड नहीं होगा तब तक हम सड़क पर कोई भी कार्य नहीं कर सकते हैं।
प्रशांत शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी, लखनऊ

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अभी औसत सुविधाओँ के लिए तरह रहे हैं।

गदेला गाँव की ही शकुन्तला देवी बताती हैं, “बरसात के दिनों में हम लोगों का गाँव से निकलना मुश्किल हो जाता है। सड़क कच्ची होने के कारण पानी भर जाता है। गाँव के प्रधान तो नाम मात्र के हैं किसी भी काम के नहीं हैं, प्रधान बनने के बाद आज तक लौट के गाँव नहीं आए हैं।” प्रदेश सरकार ने पिछले महीने की नौ तारीख को वादा किया था की 15 जून तक प्रदेश की सभी सड़कें गड्ढा मुक्त हो जाएंगी, लेकिन गाँव के लोग आज भी एक खड़ंजे को तरस रहे हैं। बौरामऊ गाँव की रामदेवी बताती हैं, “हमारे पास जमीन नहीं है।

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हमारे जैसे और कई लोग हैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। खेत भी नहीं है और राशन कार्ड भी नहीं बताओ हम क्या खाएं। लखनऊ के मुख्य विकास अधिकारी प्रशांत शर्मा ने बताया, “शौचालय की समस्या से निकलने के लिए सबसे जरूरी है लोगों का जागरूक होना। अब लोग घर में टीवी खरीद सकते हैं, मोटरसाइकिल खरीद सकते हैं तो शौचालय भी बनवा सकते हैं। अगर ये लोग अपना शौचालय खुद से बना लें तो गरीबों को शौचालय भी मिल जाएगा।”

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