ग्रामीणों की समस्याएं सुलझा रहे डीएम के ‘कमांडो’

Arvind ShuklaArvind Shukla   21 April 2018 12:57 PM GMT

ग्रामीणों की समस्याएं सुलझा रहे डीएम के ‘कमांडो’गाँव कनेक्शन

#CivilServicesDay पर बात उन अधिकारियों को जिन्होंने कुछ प्रेरणादायक किया..वर्ष 2016 में बांदा के तत्कालीन जिलाधिकारी ने जिले के सभी 250 अधिकारियों कर्मचारियों को मिलाकर डेली विजिट टीम बनाई थी, इस टीम को कुछ लोग डीएम के कमांडो भी कहने लगे थे..

बांदा। बुंदेलखंड के दूसरे हिस्सों की तरह तरखरी गाँव में पानी की किल्लत थी। गाँव में लगे कई हैंडपंप खराब, गाँव के लोग और प्रधान किसी सरकारी अधिकारी के संज्ञान लेने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान ब्लॉक में तैनात एक अधिकारी गाँव पहुंचे और उन्होंने प्रधान को प्रोत्साहित कर नल की मामूली खराबी तुरंत दूर करवा दी।

बांदा जिले में तरखरी गाँव पहुंचे इन अधिकारी की ही तरह 250 अधिकारी गाँव-गाँव घूम रहे हैं। जो पानी, अनाज, बिजली समेत दूसरे कई मुद्दों पर लोगों की समस्याएं सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों, ग्राम प्रधान से बात कर तुरंत हल करते हैं। छोटी-बड़ी हर समस्या पर जिलाधिकारी को लगातार अपडेट करते हैं। इन अधिकारियों की टीम डेली विजिट टीम (रोज पहुंचने वाली टीम) नाम दिया गया है। कुछ लोग इन्हें डीएम साहब के ‘कमांडो’ भी कहते हैं।

प्रदेश में अपनी तरह का यह पहला प्रयोग है। इसे लागू करने वाले बांदा के जिलाधिकारी योगेश कुमार बताते हैं, “तैनाती के बाद मैं एक गाँव गया था, वहां पता चला 10 साल से कोई अधिकारी गाँव ही नहीं पहुंचा, ऐसे ग्रामीण क्षेत्र की अनदेखी हो रही थी। पंचायत के पास पैसा है। सरकार ने भी संसाधन उपलब्ध कराए हैं, बस उन्हें एक्टिव करने की जररूत है। उसके बाद हमने तय किया है अब कुछ जिम्मेदार अधिकारी गाँव जाएंगे। हमने ऐसे अधिकारियों की टीम बनाई और हर अधिकारी को 2-2 ग्राम पंचायतें दीं, अब वो प्रधान, सचिव और कोटेदार के साथ मिलकर समस्याएं सुलझाकर योजनाओं को अमली जामा पहनाते हैं।”

योगेश कुमार आगे बताते हैं, “जिलों में इतने अधिकारी किसी भी विभाग या कह लें कि पूरे जिले में नहीं होते। इसलिए हमने चुनाव के दौरान जो टीमें लगी थीं, उनसे डाटा लिया और पुलिस, शिक्षक और डॉक्टर, जल निगम समेत कई सीधे लोगों क्षेत्र से जुड़े विभागों को छोड़कर बाकी सब को इसमें शामिल कर लिया। 60-65 फीसदी अधिकारी ग्रुप-बी से हैं। इसमें पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर से लेकर पशुपालन विभाग के अधिकारी तक शामिल हैं।”

वहीं डीएम के इस गाँवों तक जाने वाले दस्ते ‘डीवीटी’ से जुड़कर अधिकारी भी खुश हैं। तरखरी में अपनी विजिट के पहले दिन हैंडपंप की समस्या दूर करने वाले भूमि संरक्षण अधिकारी डीवीटी संख्या (158) अख्तर हुसैन बताते हैं, “ जिले के करीब 20 किलोमीटर पूरब में महुआ ब्लॉक के इस गाँव में जब मैं पहली बार पहुंचा तो देखा 500-600 मीटर दूर से लोग पानी ला रहे थे, जबकि गाँव में नल था, जिसमें मामूली खराबी थी। मैंने प्रधान को बुलाकर कहा- यह खराबी हम लोग यहीं दूर कर सकते हैं, दो नेट-बोल्ट ही तो लगने हैं। कुछ देर में नल चालू हो गया। अब प्रधान भी जोश में है और कई काम करवा रहा है।”

बृहस्पतिवार को कृषि विश्वविद्यालय में डीएम के कमांडो की पहली फीडबैक बैठक हुई, जिसमें पूरी डीवीटी टीम, कुछ प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, जिलाधिकारी और कमिश्नर तक मौजूद थे। टीम ने अपनी समस्याएं और उपलब्धियां गिनाईं। बैठक के बाद हॉल से बाहर निकले जिलाधिकारी ने कहा, “टीम के गठन के दौरान मैं संशय में था, खुद लोग और अधिकारी इसे किस रूप में लेंगे। लेकिन आज तीसरे हफ्ते में ही जो फीडबैक मिला है, वो आगे शानदार है। अब हम लोग खुद तहसील स्तर पर जाएंगे। ऐसे लोगों को प्रेरित करेंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे।”

डीएम बांदा आगे बताते हैं, “जिन गाँवों में कोटेदार राशन बांटने में आनाकानी करते हैं, वहां जल्द एनसीसी कैडट भी तैनात करेंगे।”वहीं, ‘कमांडो’ की पहली फीडबैक बैठक में पहुंचे कमिश्नर चित्रकूट मंडल एस. वेंकटेश्वर लू ने इस काम को सेवा का शानदार मौका बताते हुए कहा, “बुंदेलखंड की छवि लगातार बिगड़ी है, हालात खराब हैं, ये टाइम एक्शन का है। ऐसे में हम लोगों को मिलकर समस्याएं सुलझानी होंगी। आप लोग किसी दबाव में काम न करें, अगर कोटेदार आप के कहने के मुताबिक काम नहीं कर रहा तो हटा दो।”

रिपोर्टर - दिति बाजपेई

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