आज भी गाँव में जरूरत से कम शौचालय कैसे हो स्वच्छ भारत का सपना पूरा

आज भी गाँव में जरूरत से कम शौचालय कैसे हो स्वच्छ भारत का सपना पूराप्रदेश में कई ऐसे गाँव हैं जहां पर एक भी शौचालय नहीं बने हैं।

डॉ. प्रभाकर सिंह, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

चित्रकूट। केन्द्र सरकार स्वच्छ भारत की बात करती है, लेकिन अभी भी प्रदेश में कई ऐसे गाँव हैं जहां पर एक भी शौचालय नहीं बने हैं।जिला मुख्यालय से लगभग 12 किमी. शिवरामपुर गाँव के 1500 आबादी वाले कपाड़िया बस्ती में सिर्फ पांच घरों में शौचालय बने हैं, जिससे और लोग खेतों या रेल की पटरियों पर शौच के लिए जाते हैं, जिससे आए दिन लोगों में झगड़ा भी हो जाता है।

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गाँव की मुरैली बताती हैं, “मजबूरी में हमें दूसरे के खेतों और रेलवे लाइन पर जाना पड़ता है, हमसे खेत वाले हमेशा लड़ाई करते हैं।” बस्ती के पूर्व प्रधान शिवबरन कपाड़िया कहते हैं, ‘‘काम्पलेक्स या सामुदायिक शौचालय निर्माण से बस्ती के लोगों को व उनके बच्चों को गाँव के किसानों के खेतों तथा रेलवे की पटरियों में शौच क्रिया के लिए नहीं जाना पड़ेगा और सरकार का स्वच्छता वाला सपना भी पूरा होगा।’’ बस्ती में लक्ष्मी प्रसाद, पप्पू, रामसिया लेखपाल तथा शिवबरन प्रधान सहित कुल पांच लोगों के घरों में शौंचालय बने हैं। बस्ती के राजेश कपाड़िया ने बताया, “100 शौचालय की मांग को लेकर बीडीओ को पत्र लिखा था तब बीडीओ ने कहा कि सीडीओ के पास जाइये मेरे पास इतना बजट नहीं हैं।”

सामाजिक कार्यकर्ता शंकर दयाल बताते हैं, “वर्षा के समय में बच्चों व महिलाओं को शौच के लिए बहुत दिक्कत होती है। कहीं जगह न मिलने के कारण रेल की पटरियों तरफ ही जाना पड़ता है।” ग्राम प्रधान सुनीता देवी फोन से बताती हैं, ‘‘बात तो सही है बस्ती में शौचालय कम बने हैं, लेकिन उन्होंने गाँव में शौचालयों के लिए 56 लोगों की लिस्ट तीन महीने पहले एडीओ पंचायत को दी है, लेकिन अभी तक पैसा नहीं आया।’’ एडीओ पंचायत कर्वी रमेश चन्द्र ने बताया कि प्रधान और सचिव को सर्वे करने के लिए कहा गया है कि थोड़ा-थोड़ा न करके, पूरे गाँव का सर्वे करके बताएं कि कितने शौचालय बनने हैं। सर्वे रिपोर्ट जैसे आ जाएगी तो पूरे गाँव को शौचालय दे दिया जाएगा।

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