‘मुझे मेरा हक चाहिए, मेरे पिता मुझको बेटी नहीं मानते’

Swati ShuklaSwati Shukla   27 Dec 2016 4:48 PM GMT

‘मुझे मेरा हक चाहिए, मेरे पिता मुझको बेटी नहीं मानते’पीड़ित हेमा।

लखनऊ। वह अपने पिता को तलाश रही है। उसको अपनी पहचान चाहिये। उसका कहना है कि 'मेरे अपने पिता ने मुझे बेटी मानने से इंकार कर दिया। वह कहते हैं कि मैं उनकी बेटी नहीं हूं। कहते हैं कि मैं उनकी भतीजी यानी बड़े भाई की बेटी हूं। पापा बोलते हैं कि भाग जाओ, मुझसे कोई मतलब नहीं है। लेकिन मुझे मेरा हक चाहिए', यह कहना है 29 वर्ष की हेमा मौर्या का।

अपने परिवार के साथ आई थी लखनऊ

एटा जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर मानपुर गाँव की रहने वाली हेमा अपने परिवार के साथ 16 साल पहले लखनऊ आई थी। अपने दो बहनों और दो भाईयों के साथ हेमा खुशी-खुशी रह रही थी। इस बीच हेमा के सभी भाईयों और बहनों की शादी भी हो गई। इस बीच मां के रहते दामोदर दास ने कन्नौज की एक महिला के साथ दूसरी शादी कर ली। शादी के बाद दामोदार दास फिर कभी लखनऊ नहीं आए और अपने पहले परिवार को छोड़ दिया। मगर ढाई साल पहले बाद मां का देहांत हो गया और आज हेमा अकेले जीवनयापन कर रही है। विवाह करने के बाद दामोदर दास ने अपनी पहली पत्नी और पांच बच्चों से कोई सम्बन्ध नहीं रखा। वहीं, भाईयों और बहनों ने भी हेमा का साथ छोड़ दिया। हेमा पिछले 12 सालों से अपने हक की लड़ाई लड़ रही है। हेमा मदद के लिए पुलिस थाने, महिला आयोग, महिला सम्मान प्रकोष्ठ में भी गयी, लेकिन अभी तक कहीं से भी उसे मदद नहीं मिली।

हेमा की मार्कशीट पर दर्ज है पिता दामोदर दास का नाम।

महिला आयोग से मिला बस आश्वासन

हेमा ने 20 जुलाई को महिला आयोग में शिकायत पत्र दिया, जिसके आधार पर पुलिस कार्रवाई करने कन्नौज गई तो मेरे पिता ने मुझे बेटी मानने से इंकार कर दिया। पिता ने कहा कि 'ये मेरी बेटी नहीं है। ये मेरे बड़े भाई की बेटी है।' महिला आयोग अध्यक्ष जरीना उस्मानी ने बताया कि “हमारे पास जो भी समस्या लेकर आता है, जैसे भी हो सकेगा हम उसकी सहायता करेंगे और उचित कार्रवाई भी करेंगे।” मगर हेमा को सिर्फ यहां से आश्वासन ही मिला।

पुलिस बोली ये तुम्हारा पारिवारिक मसला

हसनगंज थाने पर शिकायत पत्र लेकर चार बार हेमा जा चुकी हैं। हेमा कई बार एफआईआर करने गई पर पुलिस ने एफआईआर करने से मना कर दिया और कहा कि ये तुम्हारे घर का मामला है। हम कोई मदद नहीं कर सकते हैं। दो बार थाने में गई। मगर यही कहा गया कि बाद में आना तब तुम्हारी बात सुनी जायेगी।

राशन कार्ड में दर्ज है हेमा के पिता और बच्चों का नाम।

महिला सम्मान प्रकोष्ठ से भी मिला आश्वासन

महिला सम्मान प्रकोष्ठ में भी हेमा ने शिकायत पत्र दिया है। मगर वहां पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारी ने समस्या तो सुनी पर आठ दिन बाद आने को कहा। इस मामले में जब महिला सम्मान प्रकोष्ठ डिप्टी एसपी साधना सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा, “हम लोगों से जो हो सकेगा, वो करेंगे। जिला स्तर पर उचित कार्रवाई की जाएगी।“

हेमा अब सिलाई कर के चला रही अपना खर्च

हेमा अपनी मदद के लिए इन दरवाजों को खटखटा चुकी है, मगर अभी तक कोई मदद नहीं मिली। हेमा 15 साल से सिलाई करके अपने घर का खर्च चला रही हैं। साथ ही अपनी मां गिरीश देवी (50 वर्ष) को कैंसर हुआ था जिसका इलाज भी करा रही थीं। हेमा बताती हैं कि ”मां के देहान्त पर भी पिता जी घर नहीं आये। मेरी मां अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते मर गई पर उन्हें कुछ भी नहीं मिला। पिता ने बिना तलाक दिये दूसरी शादी कर ली। मुझे घर से निकाल दिया। जबरदस्ती उस घर में रह रही हूं, मेरे कमरे की लाइट और पानी का कनेक्शन भी हटा दिया है।” हेमा की मां को कैंसर हुआ था वो हेमा के पिता दामोदर दास मोर्या 60 वर्ष पोस्ट आँफिस में सरकारी नौकरी करते थे। इतना ही नहीं, हेमा बताती हैं कि दामोदर दास ने इस बीच तीसरी शादी भी की। गाँव कनेक्शन संवाददाता ने इस बारे में दामोदर दास भी कई बार बात करनी चाही है, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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