गाँव चौपाल

बदहाली को खुशहाली में बदल सकता है बस एक कदम

दीप कृष्ण शुक्ला, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

उन्नाव। दिन पर दिन बढ़ती आबादी के साथ भू गर्भ जल का स्तर नीचे गिरने और जल भराव की समस्याएं बढ़ती ही जा रही हैं। आने वाले दिनों में यह और विकराल रूप धारण कर ले इस सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में लोगों को अपने स्तर पर ही इसमें सुधार लाना होगा।

गिरते भू गर्भ जल के स्तर और ग्रामीण अंचलों में जल भराव और गंदगी जैसे समस्या का कारण जानने और उसके सम्भावित निराकरण की पड़ताल में सिकन्दरपुर सरोसी व सिकन्दरपुर कर्ण ब्लाक के चिलौला, मैनीखेड़ा, राजेपुर, बेहटा, देवारा, मगरवारा, गलगलहा, रूपनीखेड़ा, शेखपुर नरी, डीह, आटा व बंथर समेत कई गाँवों का दौरा किया। ग्रामीणों ने अपनी-अपनी राय दी।

गाँव से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

मगरवारा के रहने वाले सुबेदार सिंह बताते हैं, "पहले गर्मी के दिनों में ये तालाब पूरी तरह सूख जाया करते थे। तब ग्रामीण बारिश से पहले अपने कच्चे घरों की छतों और दीवारों की मरम्मत के लिए तालाबों से मिट्टी निकालते थे जिससे इन तालाबों की पानी सोखने की क्षमता बरकरार रहती थी।"

गाँवों में पक्के मकानों के साथ पक्की नालियां और सड़कें भी बनी है, लेकिन इसी के साथ गाँवों में दूषित जल के निस्तारण और वर्षा जल संचयन के सबसे सशक्त और उपयोगी संसाधन तालाबों की बड़ी दुर्दशा देखने को मिली। वर्षों से सफाई न होने के चलते इन तालाबों ने पानी सोखना बंद कर दिया है। इनमें भरे पानी का अब सिर्फ वाष्पीकरण ही होता। जिसकी वजह सतहों पर जमी गाद है।

तालाबों में बारिश के दिनों में पानी के साथ साथ गाँव की मिट्टी भी बह कर पहुंचती थी, जिससे उनका आकार जस का तस बना रहता था। अगले सीजन में फिर यही मिट्टी लोग घरों में प्रयोग कर लेते थे।”
श्याम अवस्थी, सरोसी

किसान और समाज सेवी राजू सिंह सेंगर कहते हैं, "इन सारी समस्याओं का निदान बेहद ही आसान है। बस जरूरत है तो सरकार को अपने तौर तरीके थोड़ा का परिवर्तन की। उन्होने बताया कि विभिन्न निर्माण कार्यों में मिट्टी की आवश्यकता पूर्ति के लिए शासन प्रशासन खेतों से मिट्टी खनन का पट्टा करती हैं। इससे खेतों की उपजाऊ मिट्टी का क्षरण होता है नतीजे में धरती की उर्वरता घटती है। सरकार को चाहिए कि मिट्टी खनन का काम इन्हीं तालाबों से कराए।"

जिससे तालाबों की सफाई होगी साथ ही उनकी तलहटी में जमा गाद हटेगी जिससे तालाबों के पानी सोखने की क्षमता वापस होगी और भू गर्भ जल का स्तर भी बरकरार रहेगा। यही नहीं यदि सरकार इस पर अमल करती है तो ज्यादातर ग्राम समाज की भूमि पर कब्जे की शिकायते खत्म होगी। हैण्ड पम्पों को रिबोर कराने की समस्या का निदान होगा।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।