केवल सूरज की रोशनी से चलता है यूपी का ये रेडियो स्टेशन

केवल सूरज की रोशनी से चलता है यूपी का ये रेडियो स्टेशनरेडियो स्टेशन

मैथा (कानपुर देहात)। अभी तक लोग रेडियो व इससे जुड़े संस्थानों को प्रचार प्रसार का माध्यम समझते थे, लेकिन कानपुर का एक सामुदायिक रेडियो स्टेशन इस लीक से हटकर न सिर्फ लोगों को जागरुक कर रहा है बल्कि खुद भी आधुनिक व्यवस्था से रेडियो स्टेशन चलाने की एक नई कोशिश की है।

यह सामुदायिक रेडियो स्टेशन 'वक्त की आवाज' कानपुर देहात ज़िला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में मैथा ब्लॉक के बैरी दरियाव में है। रेडियो स्टेशन पर 24 सोलर पैनल और 16 बैटरी लगी हुई है जिनके द्वारा कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है। इसका प्रसारण 15 से 20 किलोमीटर की दूरी तक 300 गाँवों की लगभग तीन लाख आबादी द्वारा आठ घंटे प्रतिदिन सुना जा रहा है। कार्यक्रमों के प्रसारण के अलावा केंद्र का विद्युतीकरण व इलेक्ट्रॅानिक मशीनों का संचालन भी सौर ऊर्जा से किया जाता है।

'वक्त की आवाज' सामुदायिक रेडियो स्टेशन की को-ओडिनेटर राधा शुक्ला बताती हैं, ''जब हमने सामुदायिक रेडियो की शुरुआत की थी तब इसका संचालन जेनरेटर की मदद से किया जाता था क्योंकि गाँव में बिजली की कोई सुविधा नहीं थी, पर उसमें ज्यादा खर्चा आता था और लोगों तक पहुंचने में भी दिक्कत होती थी। इसी को देखते हुए हमने इसे सौर ऊर्जा से चलाने का निर्णय लिया।''

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के आकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 190 सामुदायिक रेडियो स्टेशन है। सामुदायिक रेडियो स्टेशन 'वक्त की आवाज' उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा स्टेशन है जिसका प्रसारण सौलर ऊर्जा के द्वारा किया जाता है।

रेडियो स्टेशन से लगभग 12 किलोमीटर दूर मैथा ब्लॉक के मदारपुर गाँव के विनोद कुमार (45 वर्ष) रेडियों में आने वाले सभी कार्यक्रमों को सुनते हैं। विनोद बताते हैं, ''रेडियो में अपनी ही भाषा मे बहुत सारी जानकारी मिलती हैं। खेती, गाँव के समाचार, चुटकुले जैसे बहुत से कार्यक्रम आते हैं जिसको हम सुनते है। हमारे साथ गाँव में और भी लोग हैं जो कार्यक्रम को सुनते हैं।'' विनोद मदारपुर गाँव में किसान है।

कार्यक्रम का प्रसारण सुबह छह बजे से नौ बजे तक, दोपहर बारह बजे से दो बजे तक और शाम छह बजे तक किया जाता है। अभी तक इस रेडियो स्टेशन से 40 कार्यक्रम चल रहे हैं। हर आयु वर्ग को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम चलाया जाता है।

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रेडियो स्टेशन से पिछले पांच वर्षों से जुडी प्रोग्राम प्रोयूडसर नीतू सिंह बताती हैं, ''गाँव-गाँव जाकर हम निरीक्षण करते हैं कि लोगो को किस तरह की जानकारी चाहिए फिर उसी के आधार पर कार्यक्रम को लिखते हैं ताकि उनके जीवन में बदलाव आ सके। हमारे रेडियो स्टेशन से संचालित होने वाले कई कार्यक्रमों से लोग में प्रभाव पड़ा है। बच्चों से संबंधित, महिलाओं से संबंधित सभी आयु वर्ग के लोगों से संबंधित कार्यक्रम बनाते हैं साथ ही उन्हीं की भाषा का प्रयोग भी करते हैं। हमारे यहां कुछ कार्यक्रम ऐसे भी चलते हैं, जिनमें हम गाँव के लोगों को ही मंच देते हैं ताकि उनका आत्मबल बढ़ सके।''

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