मास्टर साहब आते नहीं, हाज़िरी लग रही

Meenal TingalMeenal Tingal   6 Nov 2016 2:08 PM GMT

मास्टर साहब आते नहीं, हाज़िरी लग रहीप्रतीकात्मक फोटो                                                                                  

लखनऊ। गोंडा के वजीरगंज ब्लॉक स्थित रामपुर खास विद्यालय में बीएसए द्वारा किये गये निरीक्षण के दौरान शिक्षक की जगह उसका भाई पढ़ाता मिला। शिक्षक पिछले एक वर्ष से स्कूल में पढ़ाने नहीं आ रहा था लेकिन उसकी उपस्थिति प्रतिदिन दर्ज की जा रही थी। ये हाल तब है जब सरकारी स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीन लगाए जाने के निर्देश जारी हो चुके हैं लेकिन इक्का-दुक्का ही स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीन से हाजिरी लगाई जा रही है।

स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीन को लगभग सभी स्कूलों ने दरकिनार कर दिया था तो अब एक बार फिर शिक्षकों की स्कूल में उपस्थिति दर्ज किये जाने के लिए अगले शैक्षिक सत्र में प्रदेश के सभी अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था लागू किये जाने के निर्देश शासन द्वारा जारी किये गये हैं। हालांकि इस व्यवस्था को स्कूल प्रशासन को अपने स्तर पर लागू करवाना होगा। पिछले महीने 16 अक्टूबर को बेसिक शिक्षा परिषद के प्रमुख सचिव जितेन्द्र कुमार के द्वारा माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमर नाथ वर्मा को निर्देश दिये जाने के बाद अब इस सम्बन्ध में वर्मा ने प्रदेश के सभी डीआईओएस को यह निर्देश जारी कर दिये हैं।

स्कूलों में निरीक्षण के दौरान अक्सर यह पाया जाता है कि शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं लेकिन स्कूल में उनकी उपस्थिति दर्ज होती है। इसलिए स्कूलों में बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी किये जा रहे हैं। रही बात मशीन लगाने के खर्चे की तो ऐसे स्कूलों के लिए मैं विद्यालय विकास निधि के जरिये खर्च की व्यवस्था करूंगा ताकि उन स्कूलों के पास मशीन न लगवाने का कोई बहाना न रहे।

स्कूलों में निरीक्षण के दौरान अक्सर यह पाया जाता है कि शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं लेकिन स्कूल में उनकी उपस्थिति दर्ज होती है। इसलिए स्कूलों में बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी किये जा रहे हैं। रही बात मशीन लगाने के खर्चे की तो ऐसे स्कूलों के लिए मैं विद्यालय विकास निधि के जरिये खर्च की व्यवस्था करूंगा ताकि उन स्कूलों के पास मशीन न लगवाने का कोई बहाना न रहे।
उमेश त्रिपाठी, जिला विद्यालय निरीक्षक, लखनऊ

इस सम्बन्ध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमरनाथ वर्मा ने कहा, “स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति पर लगातार सवाल उठते रहे हैं, इसी वजह से इस व्यवस्था को स्कूलों में लागू किये जाने के निर्देश जारी किये गये हैं। अगले चरण में बच्चों की उपस्थिति को दर्ज किये जाने के लिए भी यह व्यवस्था स्कूलों में लागू की जा सकेगी।”

स्कूलों से शिक्षकों के गायब रहने के हर रोज ही मामले सामने आते रहे हैं। एक मामला बाराबंकी की हरक्का ग्राम सभा के प्राथमिक विद्यालय का है जहां शिक्षक स्कूल पहुंचते ही नहीं हैं और यदि कभी-कभी मनमाने समय पर पहुंच भी जाते हैं तो कुछ समय बिताने के बाद टहलकर चले जाते हैं। हरक्का के ग्रामीण साकिर (48 वर्ष) बताते हैं, “हम पढ़े-लिखे नहीं हैं, मगर हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे पढ़-लिख जाएं और अपना अच्छा-बुरा समझ सकें, इसलिए हम बच्चों को स्कूल भेजते हैं लेकिन स्कूल के मास्टर तो हमसे भी गए-गुजरे हैं। वह स्कूल को अपने घर की जागीर समझते हैं, कभी आते हैं तो कभी नहीं आते, और आ भी जाते हैं तो टहल कर चले जाते हैं।”

लखनऊ के एक स्कूल में मशीन लगी

लखनऊ शहर के अमीनाबाद इंटर कॉलेज के सिवाए किसी भी स्कूल में बायोमीट्रिक मशीन नहीं लगी है। कालीचरण इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. महेन्द्र नाथ राय ने कहा, “स्कूल में कई तरह की समस्याएं हैं जिनके लिए बजट की जरूरत होती है, उसके लिए तो बजट पर्याप्त रूप से जुट नहीं पाता है। परीक्षाओं में स्टेशनरी के लिए काफी परेशानी रही थी, ऐसे में बायोमीट्रिक मशीन के लिए कैसे बजट उपलब्ध होगा।”

प्रतीकात्मक फोटो

बायोमीट्रिक मशीन को जी का जंजाल समझते हैं शिक्षक

सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों की उपस्थिति पर तीसरी नजर रखने के लिए बायोमेट्रिक मशीन लगवाने के आदेश राज्य सरकार की ओर से जारी किए गए थे। मगर अब तक सरकारी स्कूलों में न तो मशीन लगाने की तैयारी शुरू की गई और न ही उसे लगाने के लिए प्रदेश के सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने इच्छा ही जताई है। यही कारण है कि शिक्षकों की झूठी उपस्थिति दिखाने का खेल बदस्तूर तरीके से जारी है।

कन्नौज के किसी स्कूल में बायोमीट्रिक मशीन की सुविधा नहीं है। केवल परिषदीय स्कूलों में फ़ोन करके क्रॉस किया जाता है। इसके लिए कलेक्ट्रेट में एक रूम में 5-6 अनुदेशकों की ड्यूटी लगाई गई है। वो बच्चों से भी फोन पर ही बात करते हैं। इसके अलावा स्कूलों से हेड टीचर मोबाइल से पूरे स्टाफ की हाजिरी भेजते हैं। हाजिरी के लिए एक नम्बर भी जारी किया गया है। बहराइच के किसी भी सरकारी या प्राइवेट स्कूल में बायोमीट्रिक मशीन नहीं लगी है। बाराबंकी के भी स्कूलों में भी बायोमेट्रिक मशीन नहीं लगी है, अध्यापक अपनी मर्जी से आते और जाते।

क्या है बायोमीट्रिक मशीन

बायोमीट्रिक मशीन के जरिए लोगों की पहचान करना आसान होता है। माना जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति के हाथ के अंगूठे के निशान, अंगुलियों, आंखों की पुतलियों, आवाज अलग होते हैं और इनके द्वारा ही लोगों की पहचान करना आसान होती है। बायोमीट्रिक मशीन अलग-अलग होती हैं लेकिन हम यहां बात कर रहे हैं अटेन्डेंन्स बायोमीट्रिक मशीन की जिसके जरिये हाथ के अंगूठे व अंगुलियों के निशान लिए जाते हैं। बायोमीट्रिक मशीन के जरिये किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थिति कोई और नहीं दर्ज कर सकता जैसे लिखित रूप में की जा सकती है। चूंकि बायोमैट्रिक्स प्रणाली की विश्वसनीयता अत्यधिक मानी जाती है इसलिए इस मशीन का उपयोग उपस्थिति दर्ज करने के लिए किया जाता है। इसकी कीमत लगभग 8 हजार रुपये से शुरू होती है जो कि एक हजार सदस्यों तक की हाजिरी दर्ज कर सकती है। इसके बाद सदस्यों की संख्या बढ़ने के अनुसार इसकी कीमत भी बढ़ती जाती है। इस मशीन को लगाने के लिए बिजली की जरूरत होती है और एक कम्प्यूटर की। बिजली जाने की स्थिति में इसका बैक्अप लगभग 3 से 4 घंटे का होता है और कम्प्यूटर के जरिये रिकार्ड दर्ज किये जाते हैं।

गाँव कनेक्शन ने दिया था स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीन लगवाने के सुझाव

पिछले वर्ष गाँव कनेक्शन ने अपने अखबार के माध्यम से सरकार को यह सुझाव दिये थे कि स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनें लगवायी जायें। यह सुझाव इसलिए दिये गये थे जिससे स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति और उनकी मनमानी उपस्थिति को रोका जा सके और स्कूलों के साथ शिक्षा के स्तर में सुधार हो सके। इस सुझाव को दिए जाने के बाद सरकार द्वारा इसका संज्ञान लिया गया था और स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीन लगवाने के निर्देश दिए गए थे लेकिन स्कूलों द्वारा इन पर अब तक अमल नहीं किया गया।

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