राजनाथ सिंह ने इस गांव को गोद लिया था, तस्वीरें देखिए

राजनाथ सिंह ने इस गांव को गोद लिया था, तस्वीरें देखिएऐसा है गृहमंत्री राजनाथ सिंह के द्वारा गोद लिये बेंती गाँव का हाल

रिपोर्ट: बसंत कुमार

लखनऊ। जब राजनाथ सिंह ने हमारे गांव को गोद लिया तो हमें बेहद ख़ुशी हुई। कोई मामूली नेता नहीं, देश के गृहमंत्री ने हमारे गांव को गोद लिया था। राजनाथ सिंह आये और तरह-तरह के वादे किया। लगा गांव की किस्मत बदल जाएगी, लेकिन दो साल होने को हैं, पर विकास के नाम पर गांव में बहुत ज्यादा कुछ नहीं हुआ। अब भी सड़कें टूटी पड़ी हैं। बरसात होते ही सड़कों पर पानी भर जाता है। यह कहना हैं गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा गोद लिए गांव बेती के निवासियों का।

फिर कभी नहीं गये गाँव

बेती गाँव के बाहर लगा है बोर्ड

प्रधानमंत्री के अनुरोध के बाद 6 दिसम्बर 2014 राजनाथ सिंह ने इस गांव को गोद लिया। राजनाथ सिंह जिस दिन गांव को गोद लिए उससे पहले वो कभी उस गांव में नहीं गये थे और गोद लेने के बाद भी कभी नहीं गये। गांव में कुछ बदलाव तो हुए, लेकिन कई समस्याएं जस की तस बनी हुई है। नालियां अब भी बजबजा रही हैं, सड़कें अब भी खराब हैं। आसपास कोई सरकारी अस्पताल नहीं है।

गाँव के ज्यादातर युवा बेरोजगार

राजधानी लखनऊ से 27 किलोमीटर दूर स्थित बेती गांव वैसे तो गृहमंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आता, लेकिन उनके संसदीय क्षेत्र लखनऊ में कोई गांव नहीं होने के कारण गृहमंत्री ने भाजपा सांसद कौशल किशोर के संसदीय क्षेत्र मोहनलालगंज से बेती गांव को गोद लिया। यहां के ज्यादातर युवा बेरोजगार हैं। कुछ युवा लखनऊ के हजरतगंज और गोमती नगर आदि इलाकों में रोजाना यात्रा कर अपनी ज़िन्दगी चला रहे हैं।

गोद लेने के बाद भी अनाथ है बेती गांव

पांच हज़ार आबादी वाले बेती गांव में प्रवेश करते ही रैदास बस्ती है। इस बस्ती में रहने वाले ज्यादातर लोग बेहद गरीब और मजलूम की ज़िन्दगी जीने को मजबूर हैं। गांव का पहला घास-फूस का बना हुआ है और इस घर में शौचालय तक नहीं है। इस घर में रहने वाली एक लड़की बताती है कि गांव को गोद लेने से हमें तो कोई फायदा नहीं हुआ। हमें शौच के लिए अब भी बाहर जाना पड़ता है। वह बताती हैं कि गांव में शौचालय तो बने, लेकिन सिर्फ उनके घरों में जो खुद भी बनवा सकते हैं। रैदास बस्ती में सौ से ज्यादा घर हैं, लेकिन सिर्फ तीन लोगों को शौचालय मिला है। गांव के ही मिंटू अवस्थी बताते हैं कि गोद लेने के बाद भी हमारा गांव अनाथ है। हमारे गांव को गृहमंत्री ने गोद लिया है जिसके कारण राज्य सरकार यहां एक रूपए भी खर्च नहीं करती है। जिसके कारण बेती विकास में पिछड़ गया और इस गांव से ज्यादा विकास उन गांवों का हुआ है, जिसकों लोहिया ग्राम योजना के तहत गोद लिया गया है।

12 हजार में कैसे बने शौचालय

बेती गाँव में यह शौचालय की स्थिति

मिंटू अवस्थी बताते हैं कि केन्द्रीय मंत्री द्वारा गांव को गोद लेने के बाद गांव में सिर्फ दो बदलाव हुए। एक तो गांव में बैंक खुल गया और दूसरा कुछ शौचालय बने हैं। शौचालय भी जो बने वो बस नाम के ही बने है। लोगों को 12-12 हज़ार रुपए दे दिए गए, लेकिन 12 हज़ार में कौन सा शौचालय बनता है। जिनके पास कुछ पैसे थे वो तो बना लिए लेकिन जिनके पास पैसे नहीं उनका शौचालय बिना दरवाजे और सीट के बने हुए है। दो साल में पूरे पंचायत में करीब सौ शौचालय बने। यहां अभी तक सिर्फ 25 प्रतिशत घरों में शौचालय है। गांव में कुछ हैण्डपम्प भी लगे है।

गाँव में एक ही बैंक

गांव में ओरिएंटल बैंक खुला है, जिसका उद्घाटन स्वयं राजनाथ सिंह ने किया। इस बैंक को ग्रामीण शंका की निगाह से देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना हैं कि बैंक लोगों की ज़मीन लूटने के लिए लोन बाँट रहा है। अब तक गांव में कई लोग अपनी ज़मीन पर लोन ले चुके हैं। लेकिन बैंक के मैनेजर इस आरोप को ख़ारिज करते हैं।

इंटरमीडिएट के लिए जाना पड़ता है लखनऊ

हाईस्कूल तक ही पढ़ पाते हैं बेती गाँव में बच्चे

बेती गांव में अब भी सरकारी स्कूल सिर्फ दसवीं तक है। किसी भी लड़के-लड़की को अगर आगे पढ़ना होता है तो 27 किलोमीटर दूर राजधानी आना पड़ता है। पढ़ाई की असुविधा होने के कारण कई लड़के-लड़कियां बीच में भी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। ग्यारहवीं-बारहवीं के स्कूल नहीं होने का सबसे ज्यादा असर लड़कियों पर पड़ता है। कई लड़कियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुकी हैं। लखनऊ भाजपा के उपाध्यक्ष और स्थानीय निवासी अमित तिवारी बताते हैं कि गांव में कुछ काम तो हो गए और कुछ काम बहुत जल्द ही शुरू होंगे।

पानी निकासी नहीं, भरा रहता है पानी

बेती गाँव में नालियों का यह है हाल

बेती गांव में पानी निकासी का कोई रास्ता नहीं है। नाला बंद पड़ा है। बरसात के दिनों में सड़क पर पानी भर जाता है। बेती गांव के पूर्व प्रधान शांति देवी के पति गिरीश तिवारी बताते हैं कि बरसात के दिनों में यहां सड़क पर चलना मुश्किल होता है। पानी निकासी का जो नाला बना हुआ है वो सफाई नहीं होने के कारण बंद पड़ा हुआ है। जिससे गांव में मच्छर बढ़ रहे हैं और लोगों को बीमारियां हो रही है।

आसपास अस्पताल नहीं, 10 किलोमीटर दूर सरोजनी नगर में

बेती गांव में हजारों की आबादी होने के बाद भी यहां कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। अगर यहां कोई बीमार होता है, तो उसे दस किलोमीटर दूर सरोजनी नगर सामुदायिक अस्पताल जाना पड़ता है, नहीं तो लखनऊ। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सामुदायिक अस्पताल इस गांव के लिए भी पास हुआ है, लेकिन ज़मीन को लेकर मसला है, जिसके कारण अस्पताल नहीं बन रहा है।

गृहमंत्री से नाराज़ बेती के युवा

बेती गांव के युवाओं का कहना है कि गृहमंत्री जब यहां आये थे तो किसी ने उन्हें गलत सूचना दिया कि यहां के युवा नशा करते हैं। लोगों की सुनी बातों को सुनकर राजनाथ सिंह ने बोल दिया कि हम यहां के युवाओं को नशा मुक्त करेंगे। यह हम और हमारे गांव वालों पर राजनाथ सिंह ने कलंक लगाया है। इस गांव में बहुत कम युवा नशा करते हैं।

सपने ज्यादा दिखाए, काम कम हुआ

बेती गाँव में यह शौचालय की स्थिति

बेती गांव के प्रधान विकास शाहू कहते हैं कि राजनाथ सिंह ने गांव को गोद लेने के बाद सपने ज्यादा दिखाए और काम उस अनुपात में नहीं हुआ। दो साल होने को है, लेकिन गांव में बहुत बदलाव नहीं आया। सोलर प्लांट लगने थे, लेकिन अब तक नहीं लगे। इस सम्बन्ध में बातचीत के लिए जब राजनाथ सिंह के सांसद प्रतिनिधि देवाकर त्रिपाठी को फोन किया तो वो फोन पर उपलब्ध नहीं हो सके। उसके बाद मैसेज किया गया जिसका भी कोई रिप्लाई नहीं आया।

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