11 ग्राम पंचायतों में खर्च शून्य, मजदूरों के हाथ खाली

11 ग्राम पंचायतों में खर्च शून्य, मजदूरों के हाथ खालीप्रतीकात्मक फोटो: विनय गुप्ता

रिपोर्टर- श्रीवत्स अवस्थी

उन्नाव। जनपद में एक दर्जन ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां मौजूदा वित्तीय वर्ष में अभी तक एक भी मानव दिवस सृजित नहीं हो पाया है। मानव दिवस सृजित न होने से यहां के मनरेगा मजदूरों के हाथ खाली हैं। मजदूरों को बीते कई माह से अभी तक एक दिन भी काम नहीं मिला है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के आठ माह बीतने के बाद भी इन गाँवों में कोई भी काम नहीं शुरू हो पाया है। आठ माह के लंबे समय में एक दिन भी मानव दिवस सृजित न होने पर सीडीओ ने कड़ा रूप अपनाया है।

जिले की ग्राम पंचायतों में 11 ग्राम पंचायतें ऐसी भी हैं जहां अब तक एक भी मानव दिवस सृजित नहीं हुए है। यह हाल तब है जब वित्तीय वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल 2016 को ही हो गई थी। आठ माह बीतने के बाद भी मानव दिवस का सृजन न होने से यहां मनरेगा कार्यों की शुरुआत नहीं हो पाई है। इससे मनरेगा मजदूरों को काम भी नहीं मिल सका है। काम न मिलने से मजदूरों के हाथ भी खाली बने हुए हैं। आठ माह से काम न मिलने से मनरेगा मजदूर भी परेशान हैं जबकि विभागीय अधिकारियों ने इस ओर ध्यान भी नहीं दिया है। इससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

वहीं, जिले में जुलाई माह से मनरेगा मजदूरी को भुगतान न होने से गाँवों में विकास की गंगा नहीं बह पा रही है। ग्रामीण सड़क, पानी आदि की समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस मामले की जानकारी जब सीडीओ संजीव सिंह को हुई तो उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। मुख्य विकास अधिकारी ने इस संबंध में मनरेगा उपायुक्त शेषमणि सिंह को पत्र भेजा है। उपायुक्त ने संबंधित ग्राम पंचायत के अधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं कि वह तुरंत गाँवों में काम शुरू कराएं। हालांकि डीसी का कहना है कि मनरेगा भुगतान न होने से मजदूरों ने काम करने से मना कर दिया है। इसी कारण इन गाँवों में काम शुरू नहीं हो पाया है। फिर भी गाँवों में काम शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।

इन ग्राम पंचायतों में नहीं हुआ काम

असोहा विकासखंड की एक ग्राम पंचायत, औरास में एक, बांगरमऊ में एक, नवाबगंज में एक, बिछिया में एक, सरोसी में एक, गंजमुरादाबाद में एक, सफीपुर में एक, मियागंज में एक, हिलौली में एक और बीघापुर में एक ग्राम पंचायत है।

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