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बकरी पालकों को रोजगार दे रहा ‘द गोट ट्रस्ट’

बकरी पालकों को रोजगार दे रहा ‘द गोट ट्रस्ट’बकरी पालकों को रोजगार दे रहा ‘द गोट ट्रस्ट’

विनय गौतम ( द गोट ट्रस्ट)

लखनऊ। दूध सदियों से मनुष्य के भोजन का एक जरूरी हिस्सा रहा है। वर्तमान में बाज़ार में सिर्फ गाय व भैस का दूध उपलब्ध है, लेकिन बकरी का दूध अपने विशिष्ट गुणों के कारण सदियों से भारतीय ग्रामीण समाज में दवाई व पोषक आहार के तरह इस्तेमाल होता आया है। अगर तुलनात्मक दृष्टि से देखें,तो हम पाएंगे की बकरी का दूध कई मामलों में गाय के दूध से बेहतर विकल्प है।

मौजूदा समय में भारत में बकरियों की कुल संख्या 13.52 करोड़ से अधिक है। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की पांच अप्रैल, 2016 की रिपोर्ट यह बताती है। भारत में प्रतिवर्ष पांच मीट्रिक टन बकरी के दूध का उत्पादन होता है, जिसका अधिकांश हिस्सा अति गरीब व गरीब किसानों क पास है। लेकिन पशुपालकों को जानकारी के अभाव व सही रणनीति की कमी के कारण बकरी के दूध के प्रयोग को काफी सीमित कर दिया है।

इतने बड़े दूध का उत्पादन एक बड़े रोजगार की सम्भावनाओं को पैदा करता है, जिसके लिए द गोट ट्रस्ट (लखनऊ) गरीब महिलाओं व किसानों के साथ जुड़कर, उनको उचित ट्रेनिंग मुहैया करा कर, रोज़गार को बढ़ावा देने के साथ साथ, बच्चों व महिलाओं में पोषण की कमी को दूर करने में सहायक है। इस ट्रेनिंग में इस बात पर ज़ोर दिया जा रहा है, कि जिस प्रकार महिलाओं में पोषण व बच्चों के शारीरिक वृद्धि की कमी को देखा जा रहा है, बकरी का दूध उसका अच्छा विकल्प है।

घर बैठे बकरी पालन करना ग्रामीणों के लिए अच्छा रोजगार

बकरी के दूध का मूल्य संवर्धन करके उपरोक्त समस्याओं व आजीविका का विकल्प दोनों में लाया जा सकता है। महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य के साथ साथ रोज़गार को बढ़ावा देने के उद्देश्य को लेकर द गोट ट्रस्ट अब तक देश के 16 राज्यों में 2.5 लाख के अधिक लोगों के साथ काम करते हुए,उनकी आजीविका को बढ़ावा दे रहा है। ट्रस्ट बकरी दूध का संवर्धन करके कई उत्पाद बना चुका है, इन उत्पादों को बनाने के लिए समय समय पर महिला बकरी पालकों को ट्रेनिंग भी दी जाती है।

ट्रस्ट द्वारा तैयार उत्पाद

  • कुल्फी
  • पनीर
  • दही
  • खीर
  • लस्सी
  • चीज़
  • साबुन
  • (टिकिया)
  • हैंड वाश,
  • लिक्विड सोप
  • (द्रवित साबुन)

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