नुक्कड़ नाटक के माध्यम से गाँवों को आेडीएफ कराने की पहल शुरू

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से गाँवों को आेडीएफ कराने की पहल शुरूओडीएफ मुक्त कराने के लिए सीएलटीएस की ट्रेनिंग शुरू हो गई है।

इश्त्याक खान, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

औरैया। जिले को ओडीएफ मुक्त कराने के लिए सीएलटीएस की ट्रेनिंग शुरू हो गई है। पहले दिन प्रशिक्षकों को बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्र के बुजुर्गो की सोच को कैसे बदलना है। उन्हें खुले में शौंच जाने से कैसे रोका जा सकता है। स्वच्छता ही हमारे स्वास्थ्य की पहली कडी होती है। स्वच्छ होगा भारत स्वस्थ रहेंगे हम।

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जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर शहर में दिबियापुर रोड पर स्थित द्विवेदी गेस्ट हाउस में स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत यूनीसेफ ने सीएलटीएस की ट्रेनिंग प्रशिक्षकों को दी। खुले में शौच जाने से रोकने के लिए प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग दी जा रही है। यूनीसेफ के कंसलटेंट रमेश अग्रवाल ने प्रशिक्षकों का पहले तो पर्ची बांट कर एक-दूसरे से परिचय करवाकर ग्रुप तैयार किए। इसके बाद खुले में शौच जाने से रोकने के लिए कैसे लोगों का ब्रेन वाश किया जाएगा, विस्तार पूर्वक बताया।

बुजुर्गों की सोच बदलने के लिए उन्हें बताना होगा, आप अपनी बहू का चेहरा गांव किसी बुजुर्ग के सामने खुला नहीं देखना चाहते हैं तो फिर उसी बुजुर्ग जैसे कई लोगों के सामने खुले में शौच क्यों भेजते हों। खुले में शौच जाने से चेहरा तो दूर की बात है इज्जत आबरू पर भी लोगों की नजरें पड़ती है। ग्रामीण क्षे़त्र के बुजुर्ग खुले में शौंच जाना अधिक अभी भी पंसद कर रहे हैं, इसलिए उन्हें बताए कि बीमारियां घेर लेती हैं। इससे शरीर कमजोर हो जाता है और असमय काल के गाल में समा जाते हैं। इसलिए खुले में शौच न जाकर घर में शौचालय में जाए। इसी के साथ एक नुक्कड़ नाटक तैयार कर ग्रुप को दिखाया गया। प्रशिक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी सत्येन्द्र नाथ, डीपीआरओ केके अवस्थी, सहार के एडीओ प्रवीन कुमार सहित कई मंत्री और यूनीसेफ के निशांत कुमार मौजूद रहे।

महिलाए और युवाओं ने प्रशिक्षण में लिया भाग

सीएलटीएस की ट्रेनिंग में सबसे अधिक महिलाए है जो कि लोगों को जागरूक करने का जिम्मा अपने सिर पर ले रही है। इसके बाद दूसरे नंबर युवा है जब कि युवतियां सिर्फ आठ है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद महिलाए और युवा चिन्हित गांवों में जाकर लोगों को खुले में शौंच जाने से रोकने का काम करेंगे। नुक्कड़ नाटक और गीतों के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे।

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