इस जन्माष्टमी पर कंकड़-पत्थर जोड़कर कान्हा लीजै बनाय

गुरप्रीत सिंह पेशे से इंजीनियर हैं और उनका शौक है बेकार लगने वाली चीजों को खूबसूरत और उपयोगी चीजों में बदलना। अपने कॉलम 'कबाड़ से कलाकारी' में इस बार गुरप्रीत हमें सिखा रहे हैं कि कैसे सड़क किनारे पड़े कंकड़, पत्थरों से अनोखी कलाकृतियां बनाई जा सकती हैं। इस तरह बनी चीजें पैबल आर्ट के नाम से जानी जाती हैं।

Gurpreet SinghGurpreet Singh   23 Aug 2019 6:30 AM GMT

इस जन्माष्टमी पर कंकड़-पत्थर जोड़कर कान्हा लीजै बनाय

आपने सुना होगा कण-कण में भगवान बसते हैं बस ईश्वर को खोजने वाली मीरा सी नजर होनी चाहिए। इस हफ्ते कबाड़ से कलाकारी में आपकी इसी नजर की परख हो रही है। तो इस जन्माष्टमी पर बनाएं अनोखे कान्हा आपकी मदद कर रहे हैं गुरप्रीत जो बता रहे हैं कि कैसे सड़क पर पड़े बेजान पत्थरों को इस तरह जोड़कर रखें कि गोपियों संग मुरली बजाते कन्हैया की छवि साकार हो जाए। पढ़िए खुद गुरप्रीत के ही शब्दों में और देखिए वीडियो:


"आज आपसे पैबल आर्ट के बारे में बात करते हैं। ये छोटे-बड़े अलग-अलग रंगों के, अलग-अलग आकार के पत्थर जो आप देख रहे हैं, ये मैंने राह चलते रास्ते से जुटाए हैं। सुबह या शाम जब भी सैर को निकलता हूं तो नज़रें ज़मीन पर ही रहती हैं। बस जैसे ही कोई अलग सा पत्थर दिखता है, उठा लेता हूं। पहले-पहल सड़क से उठाने में थोड़ी झिझक लगती थी, पर अब आदत हो गई है। जब कभी इनका ढेर मिल जाता है तो जैसे लाटरी लग गई है। बैठ जाता हूं वहीं, आसपास क्या हो रहा है इसे नजरअंदाज कर इनसे जेब भर लेता हूं। अक्सर इन सबको इकट्ठा करते समय यह नहीं पता होता कि इनसे क्या बनाना है, मगर कुछ न कुछ, कभी न कभी बना पाऊंगा, बस यही सोचकर उठा लेता हूं और ले आता हूं अपनी इबादतगाह में। जी हां, जहां घर में अपने कमरे में जमीन पर इन सबको बिछा कर खेलता हूं मेरी इबादतगा ही तो है वह। कभी कुछ फौरन बन जाता है और कभी घंटों लगे रहने के बाद भी कुछ नहीं बन पाता… मगर यह सिलसिला रुकता नहीं है। अपने इस इश्क के बारे में बस यही कहता हूं:

सड़कों पे बिखरे बेजान से इन पत्थरों को देख

क्यों रौंदते हैं लोग, अक्सर सोचता हूं मैं।

पैरों तले जो रहते हैं और खाते ठोकरें

सर पे उन्हें बिठा लूं, अक्सर सोचता हूं मैं।

तुमको तो लगते होंगे ये बेबस औ बेज़ुबां

मुझसे हैं करते बात, अक्सर सोचता हूं मैं।

मुझको महब्बत हो गई है इनसे बेपनाह

इनमें मेरा ख़ुदा है, अक्सर सोचता हूं मैं।

यूं रख तरतीब में इन पत्थरों को इस क़दर ऐ दोस्त

बस इन में थोड़ी भर दूं जान, अक्सर सोचता हूं मैं।

इस बार जो वीडियो शेयर कर रहा हूं उसमें अभी तक जो मैंने सीखा है सब साझा किया है। बस पहले ज़मीन पर या किसी मेज़ पर इनसे कुछ बनाएं और फिर किसी कैनवस पर या जिस पर भी आप बनाना चाहें, हूबहू रख लें। फिर एक-एक कर के उठाते रहें और किसी गोंद से उसी जगह चिपकाते रहें।"


कंकड़-पत्थरों को उनके आकार के हिसाब से अलग-अलग छांट लीजिए।


क्या बनाना है यह पहले सोच लीजिए फिर उसी के हिसाब से पत्थर सजाइए।


इन्हें बनाने में समय लगता है इसलिए धैर्य रखें और इस पूरी प्रक्रिया का आनंद लें।


हर पत्थर की अपनी खूबी है, जैसे अलग रंग-अलग आकार, उसे पहचानें।


धीरे-धीरे अभ्यास से आप पैबल आर्ट के ऐसे ढेरों नमूने बनाने लगेंगे।

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