यूपी : सड‍़क छाप आशिकों के खिलाफ चलाए गए एंटी रोमियो अभियान की जबरदस्त लोकप्रियता

यूपी : सड‍़क छाप आशिकों के खिलाफ चलाए गए एंटी रोमियो अभियान की जबरदस्त  लोकप्रियतागाँव कनेक्शन।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। भाजपा ने अपने घोषण पत्र में ही कहा था कि अगर उनकी सरकरी बनी तो प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा पर कड़े फैसले होंगे। सरकार बनते ही भाजपा ने प्रदेश में एंटी रामियो स्क्वायड का गठन किया। सूबे के तमाम शहरों में एंटी रोमियों स्क्वायड सड़कों पर नजर आने लगी हैं। गर्ल्स स्कूल और कॉलेज के पास लड़कों पर विशेष नजर रखी जा रही है। मनचलों को हिरासत में लिया जा रहा है। पुलिस की टीम सक्रिय हो गई है।

प्रदेश की जनता भी योगी सरकार के इस फैसले को सराहा रही है। सत्ता में आने के बाद प्रदेश की योगी सरकार ने अब तक कई बड़े फैसले लिए हैं। जनता की नजर में एंटी रामियो स्क्वायड टीम का गठन प्रदेश सरकार का दूसरा सबसे असरदार फैसला है। गांव कनेक्शन के सर्वे के अनुसार 25.4 प्रतिशत लोगों ने माना कि प्रदेश में एंटी रोमियो का गठन दूसरा सबसे असरदार फैसला है। जबकि 38.1 प्रतिशत की नजर में बूचड़खानों पर प्रतिबंध सबसे बड़ा फैसला। वहीं 23.7 फीसदी लोगों ने वीआईपी कल्चर को खत्म करने और 12.9 प्रतिशत लोगों ने सरकार कार्यालयों में पान मसाला पर प्रतिबंध लगाने को असरदार माना।

लड़कों को कॉलेज के पास घुमने पर दिखानी होगी आईडी

मसलन, किसी कॉलेज के पास कोई बेवजह घूमता मिलता है तो ये दल उससे पूछताछ करेगा। उसकी आईडी देखने और जवाब से संतुष्ट होने के बाद उसे जाने दिया जाएगा। अगर वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता है तो उसे थाने लाया जाएगा, इस दौरान उसके माता-पिता या परिजनों को भी बुलाकर काउंसिलिंग की जाएगी। वहीं इस दौरान अगर कोई लड़की शिकायत करती है तो उस पर भी कार्रवाई फौरन की जाएगी। इस व्यवस्था में उसी फीडबैक के आधार पर समय-समय पर सुधार भी किया जाएगा। साथ ही जिन जिलों में एंटी रोमियो स्क्वॉड बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहा होगा, उसमें भी उचित कारणों पर सुधार किया जाएगा।

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प्रदेश में क्यों जरूरत पड़ी एंटी रोमियो के गठन की

देश में महिलाओं को उनका हक दिलाने का काम रही संस्था नेशनल कमीशन फॉर वीमेन के आंकड़ों के अनुसार, भारत में घरेलू हिंसा के मामले सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में हैं। वर्ष 2015-16 में अकेले उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों की संख्या 6,110 थी, जबकि दिल्ली में 1,179, हरियाणा में 504, राजस्थान में 447 और बिहार में 256 मामले दर्ज हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों से 2015 तक महिलाओं के खिलाफ अपराध में 34 फीसदी की वृद्धि हुई है जिसमें पीड़ित महिलाओं द्वारा पति और रिश्तेदारों के खिलाफ सबसे अधिक मामले दर्ज हुए हैं।

ये आंकड़े क्या योगी सरकार कम कर पाएगी? क्या प्रदेश की हर महिला अपने आप को महफूज़ समझ पाएगी? उत्तर प्रदेश में घरेलू हिंसा पर काम कर रही ब्रेकथ्रू संस्था की स्टेट समन्वयक कृति प्रकाश बताती हैं, “हर महिला और लड़की आज के समय में अपने आप को सुरक्षित नहीं महसूस करती है, महिलाओं की सुरक्षा की बात चाहे घर के अन्दर हो या बाहर, जिसे जब मौका मिलता है उसका शोषण करने लगता है। अगर ये सरकार सख्ती से अपराध करने वालों को सजा दिलाने मे सफल रही तो ये मामले कम हो सकते हैं, इस सरकार से सभी को बहुत उम्मीदें हैं।”

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एंटी रोमियो स्कवायड के बारे में हमने शहर की लड़कियों से जानने की कोशिश की कि वो इस कदम को कितना सही मानती हैं-

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