सहारा में जमा हैं 5 लाख रुपए, खाने को तरस रहा बुजुर्ग दंपति, पीएम से अपील- ‘पैसे दिलाओ या इच्छा मृत्यु की इजाजत दो’

सहारा में जमा हैं 5 लाख रुपए, खाने को तरस रहा बुजुर्ग दंपति, पीएम से अपील- ‘पैसे दिलाओ या इच्छा मृत्यु की इजाजत दो’90 वर्षीय बुजुर्ग बिहारी और उनकी पत्नी (: गांव कनेक्शन)

लखनऊ। ‘सब जगह न्याय के लिए गुहार लगाई, जिलाधिकारी से लेकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक सबको पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई लेकिन न्याय तो दूर की बात किसी ने पलट कर जवाब तक नहीं दिया। सरकार हमारी मदद नहीं कर सकती तो इच्छामृत्यु ही दे दे।’ ये कहना है लखनऊ निवासी 90 वर्षीय दंपति का।

अपनों से धोखा खाए वृद्ध दंपति इस समय मड़ियांव थाना क्षेत्र के गायत्री नगर में राजाराम यादव के घर पर किराए पर रह रहे हैं लेकिन महीनों से किराया न भर पाने के कारण मकान मालिक भी परेशान हैं। वृद्ध दंपति के पास खुद के खाने के भी लाले पड़े हैं। मूल रूप से लखनऊ जनपद के गांव गौरभीट के निवासी बिहारी अपने बेटे ,बेटियों की शादी कर अपनी जमीन-जायदाद का बंटवारा कर चुके हैं। अपने बच्चों द्वारा उपेक्षा पूर्ण रवैया बर्दाश्त न होने के कारण वे अपनी पत्नी के साथ अलग किराए के घर में रहने लगे।

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दीन-हीन हालत में बिहारी व उनकी पत्नी

बुजुर्ग बिहारी ने बताया कि उसके पास जीवन की कुल जमा पूंजी पांच लाख रुपए थी जिसे बैंक के बचत खाते में जमा करने के लिए उन्होंने अपने पुराने मित्र की मदद मांगी लेकिन मित्र की बहू मनोज सिंह जो कि सहारा में एजेंट है उन्होंने कमीशन के लालच में पूरा पैसा सहारा क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी में जमा करा दिया। मुझे बताया गया कि यहां ब्याज ज्यादा मिलता है और जब चाहे तब पैसा निकाल सकते हैं। बाद में पैसे की जरूरत होने पर जब बिहारी ने पैसे निकलवाने की बात कही तो एजेंट ने कहा कि पैसे एक साल की अवधि पूरी होने पर ही मिलेंगे। इसके बाद दोबारा वहां गए तो इस बार सहारा के मैनेजर ने फ‍ंड न होने का बहाना बनाया और इस तरह मुझे हर बार टालमटोल जवाब दिया गया।

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बिहारी ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी लखनऊ से की लेकिन कोई हल नहीं निकला। इसके बाद मुख्यमंत्री समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली पोर्टल पर भी शिकायत की गई वहां से भी राहत नहीं मिल पाई। पुलिस विभाग ने जवाब दिया भी तो यह बताया कि यह मामला पुलिस विभाग से संबंधित नहीं है। बिहारी आगे कहते हैं, ‘90 वर्ष उम्र हो गई है। न तो शरीर में ताकत है, न ही गांठ में एक आना, इतनी बड़ी कंपनी के खिलाफ लड़ने की मेरी औकात नहीं है। गरीब और मजबूर की बात न कभी सुनी गई है और न ही सुनी जाएगी। मेरे पैसे अब नहीं हैं। अब जिंदगी से मन भर गया है। मेरी पत्नी के ऑपरेशन में 30 हजार का खर्चा है, कहां से लाऊं अब एक ही रास्ता बचा है कि हम दोनों सल्फास खाकर सो जाएं। जिंदगी में हमेशा मेहनत करके रोटी खाई है कभी किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं लिया। सरकार हमें न्याय नहीं दे सकती तो कोई बात नहीं कम से कम मौत ही दे दे इसीलिए देश के राष्ट्रपति को चिट्ठी भेजी है।’

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एक्सीडेंट के बाद से चलने-फिरने में असमर्थ हैं बाबा

बिहारी के मकान मालिक राजाराम यादव ने बताया कि बाबा और उनकी पत्नी दोनों ही मिट्टी के गुल्लक कांधे पर लादकर फेरी लगाकर बेचते हैं। इससे उनका खर्चा पानी जैसे- तैसे चल रहा था लेकिन करीब एक माह पहले बिहारी के साथ एक हादसा हो गया जिससे उनकी कमर में चोट आ गई। तब से बाबा चल फिर नहीं पा रहे और बाबा की पत्नी भी अस्वस्थ हैं। डॉ. ने ऑपरेशन बताया है जिसमें 30 हजार का खर्चा है। मेरी भी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि मैं इनकी मदद कर सकूं। कई माह से किराया तक नहीं मिला है। बाबा के बेटे ,बेटियों को बुलाया पर वो लोग न तो बाबा को ले जाने के लिए तैयार हुए और न ही बाबा अपनी बच्चों के साथ जाने को तैयार हुए। दोनों वयोवृद्ध प्राणी है फिलहाल मैं इन्हें भोजन तो दे रहा हूं लेकिन मैं खुद किसानी से अपना परिवार चला रहा हूं। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि मैं इनका अच्छा इलाज करा सकूं।

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किसको भेजा पत्र

बिहारी ने न्याय पाने के लिये भेजे गए पत्रों की प्रतियो का पुलिंदा दिखाते हुए कहते हैं कि हजार ,पंद्रह सौ रुपए तो इन पत्रों और सारे कागजों की फोटो कॉपी कराने में और पोस्ट करने में खर्च हो गए। वे अब तक जिलाधिकारी, एसएसपी, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, सेबी, रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया के गर्वनर, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उच्च न्यायालय इलाहाबाद , सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ सबको पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

इस बाबत जब सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के वसुंधरा कॉम्प्लेक्स अलीगंज लखनऊ स्तिथ शाखा प्रबन्धक संजय श्रीवास्तव से गांव कनेक्शन संवाददाता द्वारा बिहारी और बिहारी के मकान मालिक राजाराम यादव की मौजूदगी में भुगतान के विषय मे बात की गई तो मैनेजर ने बताया कि अभी हमारे पास भुगतान करने के लिए फंड नहीं है। यहां रोज पचासों लोग बाहें समेटते हुए आते हैं पर आज तक कोई कुछ नहीं उखाड़ पाया है।

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