“खम्मा घणी ... मैं पद्मावती” : इस हंगामे के बीच ज़रा पद्मावती की बात भी सुन लीजिए 

Kanchan PantKanchan Pant   25 Jan 2018 7:35 PM GMT

“खम्मा घणी ... मैं पद्मावती” : इस हंगामे के बीच ज़रा पद्मावती की बात भी सुन लीजिए चिट्ठियां भाग - दो

महिलाओं के संघर्ष, छोटी छोटी मुश्किलें, जो अक्सर हमें मुद्दे लगते भी नहीं, बड़े-बड़े मुद्दों के पीछे दुबके हुए ऐसे ही छोटे-छोटे संघर्षों , ज़रूरतों, ख़्वाहिशों और नाइंसाफियों की कहानी है चिट्ठियां।

एक फ़िल्म, इतिहास से उठाए गए एक पात्र को लेकर को लेकर हफ़्तों देश में हंगामा होता है, हिंसा होती है, गाड़ियां जलाई जाती हैं, सरकारी संपत्ति फूंकी जाती है, प्रदर्शन होते हैं, गुंडा-गर्दी होती है, क्योंकि कुछ लोगों को लगा कि एक राजपूत महिला की गरिमा से खिलवाड़ हुआ है। इन सब लोगों से देश की करोड़ों महिलाएं कुछ कहना चाहती हैं। पढ़िये हमारी विशेष सीरीज़ चिट्ठियां के दूसरे भाग में पद्मावती की ओर से देश को लिखी गई चिट्ठी।

खम्मा घणी..

मैं पद्मावती

कई दिनों से देख रही हूं कि मेरे मान के खातिर आप लोग कितनी तकलीफें सह रहे हैं। वैसे तो मैं अब तक आराम से थी, लेकिन आपका दुख देखकर,दिल भर आता है। कलेजा मुंह को आ जाता है। मेरी गरिमा पर आंच आते ही ये जो आपका खून खौलता है न यकीन मानिये, इससे इंसानियत पर मेरा भरोसा और मजबूत ही होता रहा है। इसलिए सोचा मेरी तरफ से.... और हर औरत की तरफ से आपका आभार कर सकूं।

जानते हैं एक औरत सबसे ज़्यादा क्या चाहती है ? .. वो चाहती है उसे इज़्ज़त मिले, उसके सम्मान को कोई अपना मान समझे। उसकी हिफाज़त के लिए दुनिया से लड़ जाए। यही तो आप लोग कर रहे हैं, ये विरोध प्रदर्शन, आपका ये धरने, आपका ये गुस्सा ... मैं जानती हूं ये सब इसलिए है, क्योंकि आप मेरी इज़्ज़त करते हैं, मुझसे मुहब्बत करते हैं, मेरी जैसी हर औरत का सम्मान करते हैं।

मुझे ज़रा भी शक नहीं , कि आप औरत को बोझ, ज़िम्मेदारी , मुसीबत या खुद से कम नहीं मानते होंगे। कोई लड़की एगर आपका प्यार ठुकरा दे, तो आप इसे अपने ईगो का सवाल नहीं बनाते होंगे। प्यार में नाकाम कोई आशिक जब किसी मासूस लकड़ी पर तेज़ाब फेक दे, तो आप वो ऐसे पहले शक्स होंगे को उसके घाव पर मरहम रखे। बस में आपके बगल में बैठी किसी लड़की को कोई गलत नज़र से देखे या छुए, तो आप चुप नहीं रहते होंगे। मैं जानती हूं कि जब आपके दोस्त की पत्नी जब मेकअप की परत के नीचे चोट के निशान छुपाती होगी, तो आप अपने दोस्ते से सवाल ज़रूर पूछते होंगे।

आपकी महिला सहकर्मी के प्रोमोशन पर आपके दिमाग में यह सवाल कभी नहीं आता होगा कि उसे प्रोमोशन उसकी मेहनत नहीं, उसके शरीर की वजह से मिला है। मझे पूरा यकीन है कि आपकी बोली में, आपकी बातों में, आपकी गाली में ... किसी की मां, बहन या बेटी का ज़िक्र नहीं आता होगा। आपकी पत्नी जब आपका ईगो बचाए रखने के लिए अपने सपनो से समझौता करने लगे, तो आप उसे ज़रूर रोकते होंगे। उसे नए सपने देखना सिखाते होंगे। मैं ये भी जानती हूं कि अगर किसी औरत को मदद की ज़रूरत हो तो, आपने अपनी नज़रे नहीं फेरी होंगी। किसी अकेली औरत को देखकर अपने कभी उसका फायदा उठाने की नहीं सोची होगी।

मैं ये सब जानती हूं ... क्योंकि आप संस्कारी लोग हैं। औरत की इज़्ज़त करना आपके खून मैं है और सच बताऊं आपके बीच रहते हुए हम औरतें बहुत मेहफूज़ महसूस करती हैं। हमें कभी नहीं लगता कि दुनियां में हमारे लिए बराबर की जगह नहीं है। हमें चिंता नहीं होती कि हमारा दहेज इकट्ठा करने में मां-बाप की पूरी जिंदगी बीत जाएगी।

भीड़ भरी जगहों से हमें कभी सिर झुकाकर नहीं गुज़रना होता। हमें अकेले में सफर करने पर डर नहीं लगता। रात को ऑफिस से लौड़ने में अगर देर हो जाए तो हमें घबराहट नहीं होती। इसलिए मैं जानती हूं कि मेरी जैसी औरत की गरिमा पर जब कभी भी आंच आएगी, तो आपे ऐसे ही हमारी रक्षा को सामने आएंगे। आपने हमारे लिए इज़्ज़त, सुरक्षा और सुकून वाला ये, जो देश बनाया है। उसके लिए आपका दिल से धन्यवाद। बाकी ...... आप अपने धरने प्रदर्शन जारी रखें। दिल लगा रहता है।

आपकी

पद्मावती

- कंचन पंत लेखिका हैं, पत्रकार हैं और कंटेंट प्रोजेक्ट में क्रिएटिव हेड हैं।

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