पढ़िए- कैसे छोटे से गाँव से निकलकर बड़े पर्दे पर छा गए लखनऊ के संदीप यादव

पढ़िए- कैसे छोटे से गाँव से निकलकर बड़े पर्दे पर छा गए लखनऊ के संदीप यादवअभिनेता संदीप यादव से बातचीत 

लखनऊ के रहने वाले 'भाबीजी घर पर हैं' सीरियल में गाना गाकर सब्जी बेचने वाले अभिनेता को तो सभी ही जानते होंगे। पीपली लाइव, चक्रव्यूह, हेट स्टोरी जैसी कई फिल्मों में किरदार निभाने से लेकर भाबी जी घर में हैं तक सफर के बारे में अभिनेता संदीप यादव से गाँव कनेक्शन संवाददाता दिपांशु मिश्र की बातचीत।

मैंने एक लखनऊ के कुंवरबहादुर खेड़ा गाँव का रहने वाला हूं। इसी गाँव में मेरी परवरिश हुई है। मैंने अपनी जिंदगी एक पूरे गाँववाले की तरह जी है। अपने गाँव से लगभग तीन किमी दूरी पर बस्ता टांग कर टाटपट्टी लेकर पैदल स्कूल जाता था और ज़मीन में ही बिछाकर बैठता था। स्कूल पहुँचकर सबसे पहले स्कूल में झाड़ू लगाता था। मास्टर जी के लिए पहले छड़ी तोड़कर लाता था और खुद उसी से मार भी खाता था। (नीचे देखिए वीडिओ)

अभिनेता संदीप यादव

मेरे घर में खेती-बाड़ी भी थी तो मैंने खेती भी की है और खेती के बारे में जानकारी भी है। मैंने अपना गाँव कनेक्शन अभी भी नहीं छोड़ा है। सीरियल या फिल्म की शूटिंग जब किसी गाँव में होती है तब मैं अपनीं सभी यादों को ताज़ा करके एक गाँव से जुड़कर अपना किरदार निभाता हूँ। मैं जिस थियेटर से जुड़ा हूँ उसमें बहुत लोग ऐसे हैं जो हिंदी बिलकुल नहीं जानते हैं लेकिन किरदार बहुत अच्छा निभाते हैं। नीचे वीडियो देखिए

ऐसे हुई एक्टिंग की शुरुआत

एक थियेटर से मैंने अपने एक्टिंग के करियर की शुरुआत की। मैं सांतवी कक्षा में पढ़ता था तभी मैंने रामलीला में लक्ष्मण का किरदार निभाया था और उस किरदार के लिए मुझे रामलीला कमेटी ने बेस्ट एक्टर का अवार्ड दिया था। वहीं से मुझे लगने लगा कि एक्टिंग में कुछ कर सकता हूं। फिर मुझे एक्टिंग का चस्का लग गया। ऐसे ही सिलसिला चलता रहा।

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इसके बाद मैं बारहवीं कक्षा में फेल हो गया। फेल भी ऐसे हुआ था कि मेरी तरह कोई भी कभी फेल न हुआ होगा। घर वालों के साथ-साथ मुझे भी ये लगने लगा कि पढ़ाई में मेरा मन नहीं लगता है तो मैंने अपना ध्यान एक्टिंग की तरफ कर लिया। लखनऊ की भारतेन्दु नाट्य आकादमी में एक महीने की वर्कशॉप की और वहीं नाटकों में काम करने लगा। एक्टिंग करते मुझे अच्छी प्रशंसा मिलने लगी अखबार में फोटो निकलने लगी तो बहुत अच्छा लगने लगा और इसी में मज़ा भी आने लगा। इसकें बाद मैंने नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा की एक वर्कशॉप की।

वर्ष 2006 में हबीब तनवीर साहब के साथ काम करने के लिए मुझे एक स्कॉलरशिप मिली जो कि पूरे भारत से मात्र छह लोगों को दी गई थी उनमें से एक मैं भी था। इसके लिए मैं भोपाल गया था। जब तक मैनें वहां काम किया वह अनुभव बहुत ही अच्छा रहा। वहां पर मैंने एक अलग तरीके की एक्टिंग देखी और सीखी।

फिल्मों में भी किया है काम

वर्ष 2007 में मुंबई में हमारी टीम ने एक नाटक किया था जिसे देखने के लिए फिल्म अभिनेता आमिर खान देखने के लिए आये थे। उस नाटक को देखने के बाद उन्होंने कहा था कि इस नाटक के सभी अभिनेता बहुत कमाल के हैं इनके साथ मैं एक फिल्म जरूर बनाऊंगा। उसके बाद ही पिपली लाइव मूवी बनी, जिसकी निर्देशक (डायरेक्टर) भी हमारे थियेटर की ही थी। पिपली लाइव के सभी किरदार हमारे थियेटर के ही थे और कुछ किरदार बाहर के ही थे। ऐसे ही मैंने कई फिल्मों में काम किया है।

अभिनेता संदीप यादव

ज्यादातर सीरियल में किया हैं निगेटिव रोल

इसके बाद भोपाल के हबीब तनवीर साहब की मौत हो गई। भोपाल से मैं लखनऊ आ गया लेकिन यहाँ पर एक्टिंग की कोई भी उम्मीद नजर नहीं आई। इसके बाद मैं मुम्बई चला गया और वहां पर मैंने सीआईडी, क्राइम पेट्रोल, सावधान इंडिया और दूरदर्शन पर आने वाले कई सीरियल में काम किया। ज्यादातर सीरियल में मैंने निगेटिव किरदार निभाये हैं। कई बार सीरियल पैसों के लिए करता था और कई बार छोटा किरदार मिलने पर अपना मुंह छिपा लेता था, जिससे लोग देखेंगें तो कहेंगें कि तुम ये रोल कर रहे थे तो कई तकलीफों से भी गुजरना पड़ता था।

ऐसे आये 'भाबीजी घर पर हैं' सीरियल में

इसके बाद मुझे 'भाबीजी घर पर हैं' सीरियल में काम करने का मौका मिला। इस सीरियल की कहानी कानपुर की थी और मैं लखनऊ का तो इसे और अच्छा कैसे बना सकते हैं मैंने कई सुझाव भी दिए। मैने बोला सब्जी विक्रता के किरदार में सब्जीवाला गाना गा के सब्जी बेंचे। तभी से गाना गाकर सब्जी बेचता हूं। लोगों ने मेरा ये किरदार पसंद किया है और बीच-बीच में जो भी काम मिलता है फ्रीलांस करता रहता हूं।

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बिग मैजिक गंगा सीरियल में अभिनेता संदीप यादव

लखनऊ में नहीं है एक्टिंग का भविष्य

लखनऊ में रहकर कोई अपना करियर एक्टिंग में नहीं बना सकता है क्योंकि यहाँ के थियेटर के पास पैसा नहीं है। लखनऊ में रहकर अपना करियर बनाने के लिए मैंने प्रयास किया था लेकिन सफल नहीं हुआ और मुम्बई चला गया था।

मुंबई के लेखक, निर्माता, निर्देशक लखनऊ के एक्टर की तारीफ करते हैं। कोई फिल्म बनानी होती है तो यहाँ आकर फिल्म बनाकर वापस चले जाते हैं। एक्टर के काम करने के लिए यहां कोई बाज़ार नहीं है। थियेटर में काम करने पर लोग कहते हैं कि कोई काम नहीं तुम्हारे पास अब नाटक-नौटंकी करोगे। मैंने सभी चीजों को झेला है। मुम्बई शहर आपको पैसा और प्रसिद्धि देता है, इसलिए आपको एक्टिंग के लिए मुंबई में जाना पड़ता है।

मुम्बई में झेलनी पड़ती हैं कई मुश्किलें

मुंबई पहुंचकर शुरुआत करने का समय बहुत ज़्यादा मुश्किल समय होता है। हम लोग जिन घरों से हैं और जिस समाज से जुड़े हैं वहां पर हमें बहुत सारे संस्कार सिखाये जाते हैं कि ऐसे रहना है ऐसे करना है लेकिन वहां पर पहुँच कर हमें ये सब भूलना पड़ता है। वहां पर सिर्फ और सिर्फ बाज़ार है। सेलेक्शन के समय कई बार आपको इस चीज का अहसास होता है कि आपके टैलेंट की कद्र ना करके किन्हीं अन्य चीजों को आगे बढ़ाया जाता है।

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कई बार ऐसा होता है कि जो लोग आपको सेलेक्ट करने के लिए बैठे हैं वो एक दम नए होते हैं, आपके पास टैलेंट होता है लेकिन आपको नहीं चुना जाता है तब बहुत ज्यादा बुरा लगता है। एक अच्छी चीज ये भी है कि इस शहर में हम लोग बहुत कुछ सीख भी जाते हैं। कौन अच्छा है कौन बुरा है इसकी बहुत अच्छे से पहचान हो जाती है।

सोनी सब के सीरियल में अभिनेता संदीप यादव

गाना गाकर बेचूंगा सब्जी

'भाबीजी घर पर हैं' सीरियल का अनुभव बहुत अच्छा रहा है। इस सीरियल के लेखक से मैं पहले से परिचित था और मेरी एक्टिंग को जानते भी थे इसलिए उन्होंने बोला कि सब्जीविक्रेता का किरदार तुम्हें करना है। मैं तैयार हो गया इसके लिए मेरा कोई ऑडिशन नहीं हुआ था। किरदार मिलने के बाद मैंने उनसे बोला कि मैं सब्जी गाना गाकर बेचना चाहता हूँ उन्होंने बोला ठीक है। वो इस सीरियल में लखनवी अंदाज़ में देखना चाहते थे इसलिए मुझे चुना था।

पत्रकारिता में भी किया है काम

मैंने भी पत्रकारिता की है और लखनऊ के एक अखबार में एक पत्रकार के तौर पर मैंने काम किया है लेकिन पत्रकारिता का दबाव मुझसे सहन नहीं हुआ और मैंने पत्रकारिता छोड़ दी थी। आजकल सोशल मीडिया के दौर में कहीं न कहीं पत्रकारिता पीछे रह जा रही है। पहले सभी लोग अपनी बात को नहीं लिख सकते थे लेकिन आज कल सोशल मीडिया के द्वारा वो भी अपनी बात लिख सकते हैं। ये अच्छा भी है और बुरा भी है क्योंकि बहुत सी चीजें ऐसी लोगो तक इस माध्यम से पहुँच जाती है जो लोगों को भ्रमित कर देती है।

सावधान इंडिया सीरियल में अभिनेता संदीप यादव

मूवी में काम करना बड़ी चुनौती

सीरियल में किया गया काम को लोग एक दिन में ही भूल जाते हैं। सीरियल और मूवी में छोटा सा एक अंतर है कि जब आप किसी सीरियल में काम करते हैं तो आज वो सीरियल आ रहा है कल पता नहीं वो आएगा या नहीं आएगा। सीरियल में ऐसा होता है कि निर्देशक पर पूरी तरह निर्भर होता है आप ऐसे हंसना है, ऐसे रोना है, इतना हँसना है ऐसे हँसना है।

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पूरी तरह से फ्री होकर आप काम नहीं आकर सकते हैं। फिल्मों में अच्छी मूवी और अच्छे किरदार के लिए आप हमेशा याद किये जायेंगे। मूवी में काम करना एक बहुत बड़ा चैलेन्ज होता है क्योंकि वो चीज एक बड़े प्लेटफार्म पर जा रही है उसे बहुत ज्यादा लोग देखने वाले हैं। फिल्मों में आप पूरी तरह फ्री होकर काम कर सकते हैं।

अभिनेता संदीप यादव, भाबीजी घर पर हैं

नहीं बंद होगा 'भाबी जी घर पर हैं'

जल्द ही दो सीरियल आने वाले हैं जिसमें मेरा किरदार देखने को मिलेगा। एक सब टीवी पर और दूसरा स्टार भारत पर आ रहा है। लोगों का मानना है कि एक नया सीरियल आ रहा है कि 'जीजा जी छत पर हैं' जिसके आने से 'भाबी जी घर पर हैं' बंद हो जायेगा. ऐसा बिलकुल नहीं हैं भाबी जी घर पर हैं चलता रहेगा।

भाबीजी घर पर हैं सीरियल में किरदार निभाते अभिनेता संदीप यादव

First Published: 2018-01-15 18:21:27.0

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