स्मॉग : पराली पर वैज्ञानिकों और किसानों ने आमने-सामने बैठकर निकाला हल

स्मॉग : पराली पर वैज्ञानिकों और किसानों ने आमने-सामने बैठकर निकाला हलआयुर्वेट ने किसानों के मुद्दों पर किया चर्चा का आयोजन।

चिड़ाना (सोनीपत)। देश की राजधानी में छाए स्मॉग ने आम लोगों से लेकर सरकार और उद्योग जगत सबको हिला दिया। सांसों के लिए जूझते लोग इस धुंध से निकलने के लिए झटपटा रहे हैं। सरकार अपनी कोशिशें कर रही हैं तो कुछ संस्थाओं ने भी अपनी कवायद शुरु की है।

पिछले दिनों जब दिल्ली समेत हरियाणा और यूपी के कुछ इलाकों में फैले प्रदूषण पर बहस जारी थी, दिल्ली से करीब 150 किलोमीटर दूर सोनीपत के चिड़ाना गांव में कुछ लोग इससे निपटने पर मंथन कर रहे थे। स्मॉग के लिए खेतों में जलाई जाने वाली पराली बड़ी वजह बताई जा रही थी, इसलिए भारी संख्या में किसान भी शामिल हुए थे। किसानों पर प्रदूषण फैलाने के लगते दाग, लोगों की घुटती जिंदगी और जमीन को हर साल होने वाले नुकसान से बचाने पर चर्चा के लिए पशुधन सेक्टर और किसानों के वेलफेयर के लिए काम करने वाली संस्था आयुर्वेट रिसर्च फाउंडेशन ने ये समारोह आयोजित किया था। (देखिए वीडियो)

मंथन का मुख्य मुद्दा किसान की ज्वलंत समस्याएं थीं, जिसमें किसानों और पशुपालकों की समस्याएं प्रमुख थी। यहां किसानों ने अपने मुद्दे उठाए जिनका मौके पर मौजूद कृषि और पशुपालन से जुड़े वैज्ञानिकों और जानकारों ने न सिर्फ समाधान किया बल्कि वो समस्याएं दोबारा न खड़ी हों इसके लिए सुझाव भी दिए। समारोह में कृषि एवं खाद्य परिषद के चेयरमैन एमजे खान, टेरी की वरिष्ठ निदेशक विभा धवन, बासमती धान की खास किस्म विकसित करने वाले वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. वीपी सिंह, पशुधन विशेषज्ञ डॉ. एसी वाष्णेय, मिट्टी के जानकार कृषि वैज्ञानिक डॉ. वाई पी त्रिपाठी, नाबार्ड के अधिकारी और आयुर्वेट के अधिकारी, वैज्ञानिक और कर्मचारी शामिल हुए।

समारोह में मौजूद किसान। सभी फोटो- विनय गुप्ता

किसान अच्छा अर्थशास्त्री, 2022 तक दोगुनी होगी आमदनी: डॉ. एमजे खान

किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. एमजे खान चेयरमैन कृषि एवं खाद्य परिषद ने कहा कि किसान एक बहुत अच्छा अर्थशास्त्री है वो समझता है कि उसे क्या करना है। 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए कुछ चीजों को समझना जरुरी है, जैसे पहले उत्पादकता बढ़ाने पर जोर था, अब उसके अच्छे रेट भी। स्थायी खेती की तरफ चलना होगा और वो काम करने होंगे, जैसे पहले हम लोग सोचते थे फसलों को खूब पानी दो, लेकिन असलियत ये है कि उन्हें गले तक पानी नहीं, सिर्फ नमी चाहिए। (ऊपर वीडियो देखिए)

हरियाणा की प्रगतिशील महिला किसान को सम्मानित करते सीईओ डॉ अनूप कालरा ( कोट में)।

पशुपालन कमाई का बड़ा जरिया: डॉ. अनूप कालरा

समारोह को संबोधित करते हुए कंपनी के सीईओ डॉ. अनूप कालरा ने कहा कि पशुधन किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया हैं, उन्होंने समारोह में आई सैकड़ों महिलाओं की उपस्थिति पर खुशी जताते हुए कहा कि पशुपालन का ज्यादातर काम महिलाएं करती हैं, इसलिए उनका आगे आने बहुत जरुरी है। नाबार्ड और आयुर्वेट ने मिलकर जो काम शुरू किए हैं, इन महिलाएं के माध्यम से उसे और तेज आगे बढ़ाया जाएगा।

क्योंकि मामला पराली जलाने से भी जुड़ा था, इसलिए ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (टेरी) की वरिष्ठ निदेशक डॉ. विभा धवन ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “प्रदूषण का दोष सिर्फ किसानों को दिया जा रहा है, ये गलत बात है, क्योंकि प्रदूषण शहर वाले भी कर रहे हैं। लेकिन ये ऐसी समस्या है जो सिर्फ आपके घर तक सीमित नहीं रहती। ये गांव, वो शहर ये देश और संसार हमारा है, इसलिए हमें कोई ऐसा काम नहीं करना है, जिससे पर्यावरण को नुकसान हो।"

किसान मेले और गोष्ठी को संबोधित करते कंपनी के प्रबंध निदेशक मोहन जे सक्सेना।

हम सब कमस खाएं पराली नहीं जलाएंगे: डॉ. विभा धवन

उन्होंने समारोह में मौजूद सोनीपत और पानीपत के कई गांवों से आए किसानों को पराली की खूबियां गिनाते हुए कहा, “पौधों में भारी मात्रा में पोषक तत्व होते हैं, जो जलाने से नष्ट हो जाते हैं। अगर हम उन्हें न जलाएं, और खाद बनाएं तो अगली फसल में उर्वरक की जरुरत कम होगी, किसानों के लिए खेत के उपयोगी कीट और उपजाऊ जमीन नहीं जलेगी, ये सब किसानों के खर्च को कम करने में मददगार होंगे।"

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डॉ. विभा धवन को औषधीय पौधों और खेती के बारे में जानकारी देते अमित जैन।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ. धवन ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए हमें स्थायी खेती की तरफ जाना होगा। मौके पर किसानों ने जब कहा कि मजूदरों की समस्या है और मशीनों से कटाई कराने पर डंठल रह जाते हैं, जो जलाने बिना नहीं जाते। इस पर जवाब देते हुए विभा धवन ने किसानों को जीरो टिलेज विधि अपनाने की सलाह दी, जिसमें खेतों के अपशिष्ट के बीच ही बुआई होती है। उन्होंने सामने बैठी महिलाओं की संख्या को देखकर कहा कि जब इतनी संख्या में महिलाएं आगे होंगी तो समझो आधा काम हो गया। क्योंकि एक साथ कई काम करने की क्षमता सबसे ज्यादा उनमें होती है। उन्होंने महिलाओं और किसानों से कहा कि वो पराली को कंपोस्ट कर खाद बनाएं, जो उनकी आमदनी बढ़ाने से सहायक होगी। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि इस काम में टेरी, आयुर्वेट और नाबार्ड पूरी मदद करेंगे।

पद्मश्री डॉ. वीपी सिंह।

मिट्टी को उपजाऊ बनाना है तो पशुपालन करना होगा: डॉ. वीपी सिंह

धान विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह ने भी किसानों को अपनी दलीलों से समझाया कि वो पराली न जलाएं। आयुर्वेट प्रबंधन को लगातार ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए बधाई देते हुए डॉ. सिंह ने कहा अगर किसान यहां से कुछ सीख कर गया तो उसकी जिंदगी आसान होगी। उन्होंने कहा कि खेती घाटे का सौदा नहीं है, लेकिन किसान को मिट्टी और पानी को समझना होगा।

“किसान को उत्पादन और आमदनी बढ़ाना है तो मिट्टी को उपजाऊ बनाना होगा। मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए पशुपालन अपनाना होगा। पेड़-पौधे, पशु और मानव की एक श्रृंखला है जो एक साथ मिलकर ही पूरी हो सकती है।"

डॉ. सिंह ने किसानों को मिट्टी का महत्व बताते हुए कहा।

मीडिया में धान की खेती पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच धान विशेषज्ञ ने कहा, “जब तक इंसान रहेगा वो अपनी भूख के लिए धान पर निर्भर रहेगा। लेकिन धान की खेती वहीं करनी होगी, जहां कि मिट्टी उसके लिए हो। ऐसी जगह धान लगाओ कि दिनरात सिंचाई के लिए डीजल जलाना पड़े। सरकार को भी चाहिए कि किसानों को धान की जगह पर दूसरी मुनाफे की फसलों के विकल्प दे।”

वैज्ञानिकों से सवाल पूछता हरियाणा का एक किसान।

हाईड्रोपोनिक मशीनों का इस्तेमाल कर बचा सकते हैं सिंचाई का पानी

धान की फसल में पानी कम लगे और उत्पादन ज्यादा हो, ऐसे विकल्प की चर्चा करते हुए डॉ. सिंह ने कहा, “धान दो हिस्से में होता है, एक नर्सरी में, दूसरा खेत में। नर्सरी में काफी पानी खर्च होता है, इस दिशा में आयुर्वेट की हाइड्रोपोनिक मशीन बहुत कारगर हो सकती है, क्योंकि इसमें बिना मिट्टी के पैदा हुई नर्सरी बीमारियों से बचाव होता है, पौधे मजबूत और ज्यादा उत्पादन देने लायक होते हैं।” डॉ. सिंह ने इस मशीन को लेकर सरकार और किसानों की दोनों की उदासीनता पर सवाल भी उठाए।

किसान दुनिया का पेट भरता है, उसे निरीह न दिखाएं: डॉ. त्रिपाठी

आईसीएआर के पूर्व वैज्ञानिक और मिट्टी के विशेषज्ञ डॉ. टीपी त्रिवेदी ने मीडिया और कृषि वैज्ञानिकों से अपील करते हुए कहा कि वो किसान को मरा हुआ (निरीह) न दिखाएं। वो तो किसान ही है, जो दुनिया का पेट भरता है। इसलिए किसानों को अच्छी ख़बरें भी मीडिया में आनी चाहिए।

इस दौरान कई बार समारोह तालियों से गूंजता रहा। आयुर्वेट के मीडिया सलाहकार और वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप शर्मा ने अपने जुमलों और ग्रामीण मुहावरों से कई बार अतिथियों और किसानों को खिलखिलाने पर मजबूर किया। समारोह में अच्छी फसल, केचुआं पालन, वर्मी कंपोस्ट बनाने, पशुगर्भाधान औषधीय खेती आदि के क्षेत्र में संस्था के साथ मिलकर काम करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया।

आयुर्वेट बनाना चाहता है कॉफ बैंक: एम जे सक्सेना

किसान और पशुपालकों की उन्नति के लिए लगातार काम करने का भरोसा देते हुए कंपनी के प्रबंध निदेशक एमजे सक्सेना ने कहा, “आयुर्वेट के संस्थापक डॉ. एसके बर्मन का सपना रहा है कि जनस्वास्थ्य की रक्षा कैसे हो। हमारा नाता ह्यूमन हेल्थ से रहा है। आयुर्वेट उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।’ उन्होंने कहा कि किसान की आदमनी बढ़ाने का जो सरकार का जो संकल्प है वो पशुधन के रास्ते ही किसानों तक पहुंचता है।

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कृषि एवं खाद्य परिषद के चेयरमैन डॉ. एमजे खान (नीली सदरी) के साथ मोहन जे सक्सेना, डॉ. अनूप कालरा और संस्थान मानव संसाधन के हेड व अन्य अधिकारी।

डॉ. बर्मन ने देखा था जनस्वास्थ की रक्षा का सपना

एमजे सक्सेना इस दौरान कई कई उन मुद्दों को उठाया जिन पर अब तक चर्चा नहीं होती, इसमें एक था पशुओं के बच्चों का स्वास्थ्य और नस्ल। एमजे सक्सेना ने नाबार्ड के अधिकारियों से कहा कि आयुर्वेट कॉफ बैंक बनाना चाहता है ताकि पशुपालन को नई दिशा दी जा सके, लेकिन इसके लिए सरकार मदद की जरुरत होगी। ये पशुपालन की दिशा में क्रांतिकारी कदम होगा। इस दौरान उन्होंने समारोह की शानदार तैयारियों और सिर्फ सात दिनों में किसान मेले और गोष्ठी के आयोजन के लिए कंपनी के सीईओ डॉ. अनूप कालरा की तरीफ करते हुए कहा- ये जहां जिस काम में हाथ लगाते हैं उसे करके ही दम लेते हैं।

इस दौरान आयुर्वेट की तरफ से किसानों को कई उन्नत तकनीकों के बारे में जागरुक किया गया। इसमें पशु गर्भाधान, औषधीय पौधों की कांट्रैक्ट पर खेती, हाईड्रोपोनिक मशीन, वर्मी कंपोस्ट यूनिट का प्रदर्शऩ आदि शामिल रहा।

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