23 फरवरी को दिल्ली घेरने के लिए देशभर के किसानों ने फिर भरी हुंकार

23 फरवरी को दिल्ली घेरने के लिए देशभर के किसानों ने फिर भरी हुंकारदिल्ली की ओर से कूच करते किसानों के साथ मध्य प्रदेश से आए 85 वर्षीय एक किसान। 

ढाई महीने बाद दिल्ली एक बार फिर सुर्खियों में है, वजह सियासत नहीं, एक बार फिर किसान है, पिछली बार जहां देशभर के 184 किसान संगठनों के साथ दिल्ली लाल रंग के झंडों से पटी नजर आ रही थी, तो इस बार देशभर के किसान पीले रंग के झंडों के साथ सरकार के खिलाफ हुंकार भरते हुए दिल्ली की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

एक सड़क पर जहां हाथ में पीले रंग का झंडा लेकर किसानों के कदम दिल्ली की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, तो दूसरी सड़क पर करीब 500 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर देशभर के किसान दिल्ली घेरने जा रहे हैं।

किसानों के लिए स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करवाने और देशभर के किसानों का कर्जा माफ करने को लिए इस देशव्यापी आंदोलन में किसान करो या मरो की स्थिति में 23 फरवरी को दिल्ली घेरने की तैयारी में हैं। राष्ट्रीय किसान महासंघ के आह्वान पर इस आंदोलन में कई राज्यों के हजारों किसान अपने हक की आवाज उठा रहे हैं।

आंदोलन के मुख्य और हरियाणा के भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरुनाम सिंह चढूनी ने‘गाँव कनेक्शन’ से फोन पर बातचीत में बताते हैं, “एक तरफ जहां मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु के हजारों किसानों ने हरियाणा के पलवल पहुंचकर दिल्ली की ओर पैदल कूच किया है, दूसरी तरफ पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के हजारों किसान हरियाणा पहुंचकर 500 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ दिल्ली घेरेंगे।“ उन्होंने आगे बताया, “23 फरवरी को दो बॉर्डर से किसान पूरी दिल्ली को घेरेंगे और अपनी मांगों के लिए सरकार के खिलाफ आवाज उठाएंगे।“

गुरुनाम बताते हैं, “इसके अलावा दक्षिण भारत और छत्तीसगढ़ के किसान अपने राज्यों में आंदोलन कर रहे हैं।“ 20 फरवरी से हरियाणा के पलवल से शुरू हुई इस किसान यात्रा का एक मोर्चा गन्नौर में और दूसरा मोर्चा बहादुरगढ़ से आगे बढ़ रहा है।“ दूसरी तरफ हरियाणा सरकार इस किसान आंदोलन पर दमनकारी नीति अपनाते हुए किसानों को नोटिस जारी कर रही है।

फसल का डेढ़ गुना मूल्य देने के सरकार की वादे के बाद स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की मांग के सवाल पर गुरुनाम सिंह आगे बताते हैं, “फसल का डेढ़ गुना मूल्य देने की सरकार की बात किसानों के लिए एक जुमला है, स्वामीनाथन रिपोर्ट में किसानों को फसल की कुल लागत जोड़कर 50 प्रतिशत मूल्य देने की बात कही थी, मगर सरकार ने सिर्फ फसल उत्पादन में नकदी खर्च और परिवार के सदस्यों की मेहनत का अनुमानित खर्च पर ही डेढ़ गुना मूल्य देने की बात कह रही है, उसमें ठेका नहीं जोड़ा, ब्याज नहीं जोड़ा, इसे अलग कर फसल का मूल्य देने की बात कही है, इस स्थिति में किसान को कुछ नहीं मिलना है और सरकार का यह फैसला किसानों को सिर्फ मूर्ख बनाने के लिए लिया गया है।“

दूसरी ओर, किसान आंदोलन के दौरान शामिल हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा, “स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य मिल सके, उस फार्मूले को हमारी सरकार मानने को तैयार नहीं है और सरकार की ओर से फसल का डेढ़ गुना मूल्य देने का सरकार का वादा किसानों को एक बार फिर ठगने का तरीका है। ऐसे में सरकार के लिए किसानों का यह संदेश पहुंचना चाहिए कि यह हमें स्वीकार्य नहीं है।“

वहीं मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के प्रवक्ता भगवान सिंह मीना ने ‘गाँव कनेक्शन’ को फोन पर बताया, “सरकार किसानों को फसल का लाभकारी मूल्य दिलाने के नाम पर सिर्फ ठग रही है, ऐसे में किसानों ने एक बार फिर दिल्ली की ओर हुंकार भरी है और अब किसान हार नहीं मानने वाले हैं, यह आंदोलन तब तक चलेगा, जब तक यह आंदोलन जीता नहीं जाता।“

मीना ने आगे कहा, “किसानों की मांग है कि सरकार C2 के आधार पर किसानों को डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य दे, खरीदने की गारंटी भी दे क्योंकि वर्तमान में लगभग सभी फसल समर्थन मूल्य से आधी कीमत पर बिक रही हैं। ऐसे में देशभर के किसानों की जुबान पर एक ही नारा है, "खुशहाली के दो आयाम, ऋण मुक्ति और पूरा दाम"

वहीं, भाकियू हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष गुरुनाम सिंह बताते हैं, “अगर हमें पुलिस रोकने की कोशिश करती है तो हमें जहां रोका जाएगा, हम किसान वहीं बैठकर सड़क जाम करेंगे, देशभर का किसान आगे बढ़ रहा है और अब हम पीछे नहीं मुड़ेंगे।“

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