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हेमा मालिनी के गोद लिए गाँव में पानी भरने दो किमी दूर जाते हैं ग्रामीण

मथुरा। रावल गाँव में प्रवेश करते ही सड़क की दोनों तरफ कूड़ा नजर आता है। महिलाएं सर पर बाल्टी में पानी भरके वापस आ रही हैं। सड़कें टूटी पड़ी हैं जिनपर पर गंदा पानी जमा रहता है। सड़क किनारे लड़के शौच करते दिखते हैं। गाँव की लड़कियाँ आठवीं के बाद आगे नहीं पढ़ पाती तो ज्यादातर लड़के भी आगे नहीं पढ़ पाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा शुरू किए गए 'सांसद आदर्श ग्राम योजना' के तहत हेमा मालिनी ने अपने संसदीय क्षेत्र मथुरा के बल्देव ब्लॉक के रावल गाँव को गोद लिया है। यह गाँव राधा रानी के जन्म के कारण मशहूर है। राधा रानी का जन्म होने के बावजूद यह गाँव विकास के मामले में बहुत पिछड़ा हुआ है। सांसद हेमा मालिनी ने जब इस गाँव को गोद लिया तो ग्रामीणों में आस जगी कि अब उनके गाँव का भी विकास होगा, लेकिन गाँव अब भी विकास की बाट जोह रहा है। (देखिए वीडियो)

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रावल गाँव की रहने वाले फूलमती (58 वर्ष) टूटी सड़कों को दिखाते हुए गुस्से में बोलती हैं, ‘‘अबकी हेमा मालिनी गाँव आएंगी तो कह देंगे कि आप हमारे गाँव को छोड़ दो। जब उन्होंने गाँव को गोद लिया तो लगा बहुत कुछ बदल गया था, लेकिन कुछ नहीं बदला है। गाँव की सड़कें टूटी पड़ी हैं।’’

हेमा मालिन के गोद लिए गाँव में टूटे घर में रहती महिला।

गाँव को गोद लेने के बाद अभिनेत्री हेमा मालिनी ने कहा था कि इस गाँव के विकास के लिए मैं हर तरह से प्रतिबद्ध हूं। गाँव की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि यहां विकास हुआ ही नहीं है। हेमा मालिनी के गोद लेने के बाद भी गाँव की तस्वीर बहुत हद तक नहीं बदली है।

किसी को नहीं मिला उज्ज्वला योजना का लाभ

गाँव में अधिकांश आबादी गरीब है और मजदूरी कर अपना जीवन यापन करती हैं। गाँव की रहने वाली गीता बताती हैं, "गाँव में अधिंकाश लोग चूल्हे पर खाना बनाते हैं। इस गाँव में दो-चार घरों में ही गैस पर खाना बनता है। बाज़ार पर के रहने वाले एक व्यक्ति ने तीन महीने पहले सौ-सौ रुपए जमा कराया लेकिन अब तक ना गैस का कनेक्शन मिला और ना ही हमारे पैसे मिले हैं। हम लोग लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाते हैं।"

हेमा मालिनी के गोद लिए गाँव की तस्वीर।

गाँव में लगा आरओ प्लांट फिर भी नहीं साफ पानी

गाँव के किनारे राधा रानी जन्मस्थली के पास ग्रामीणों को स्वच्छ पीने का उपलब्ध कराने के लिए आरओ प्लांट लगा है। यह प्लांट नवम्बर 2016 से चल रहा है, आरओ प्लांट की देखभाल करने वाले शिवराम बताते हैं, "आरओ से पानी लेने के लिए लोगों का कार्ड बनता है। कार्ड दो सौ रुपए का बनता है। जिसमें से सौ रुपए सुरक्षा राशि के तौर पर जमा कराया जाता है। दो रुपए में दस लीटर साफ़ पानी दिया जाता है। जो भी जितना चाहे पानी ले सकता है। अभी तक गाँव में नब्बे लोगों को पानी का कार्ड मिला हुआ है।’’शिवराम बार-बार कहते रहे कि आरओ प्लांट चल रहा है लेकिन स्थानीय महिला गीता ने कहा कि यह बनने के कुछ दिनों के बाद से ही बंद है।

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आठवीं के बाद रुक जाती हैं लड़कियों की पढ़ाई

गाँव की लड़कियों का कहना हैं कि हमारे यहां आठवीं क्लास तक ही स्कूल है। आठवीं के बाद हमें आगे की पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता है। घर वाले दूर भेजते नहीं है, जिसके कारण आगे की पढ़ाई रुक जाती है। गाँव की लगभग सभी लड़कियां आठवीं के बाद नहीं पढ़ पाती हैं। लड़के भी एकाध ही पढ़ पाते हैं। गाँव में एक कम्प्यूटर सेंटर भी खुला था जो अब बंद है।

हालांकि, गाँव में हेमा मालिनी ने टूटे प्राथमिक स्कूल की जगह नया स्कूल बनवा रही हैं। गाँव के रहने वाले मान सिंह ठाकुर बताते हैं, "हेमा मालिनी के गोद लेने के बाद गाँव में कई विकास कार्य हुए हैं। गाँव में एक अस्पताल का निर्माण हुआ है। एक सामुदायिक केंद्र का भी निर्माण हुआ है। अभी सिर्फ निर्माण कार्य हुआ है, इसमें अभी सुविधाएं शुरू नहीं हुई है।

हेमा मालिनी के गोद लिए गाँव की तस्वीर।

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गाँव में हुए विकास कार्यों के बारे में ग्राम प्रधान विजय सिंह बताते हैं, "गाँव में विकास कार्य हुआ है। पहले यह गाँव बिलकुल उजड़ा हुआ था, लेकिन हेमा मालिनी जी के गोद लेने के बाद बहुत बदलाव आया है। उज्ज्वला योजना के मामले पर ग्रामीणों द्वारा लगे गए आरोप पर प्रधान कहते हैं कि आरोप गलत हैं। कई लोग उज्ज्वला योजना का लाभ उठा रहे हैं। गाँव में 75 शौचालय बने हैं। एलईडी लाइट्स लगी है, जिसमें से ज्यादातर खराब हो गयी है उसको जल्द ही ठीक कराया जाएगा।"

दो करोड़ रुपए हुए खर्च

हेमा मालिनी के सांसद प्रतिनिधि जनार्दन शर्मा फोन पर बताते हैं, ‘‘हेमा मालिनी ने इस गाँव में कई विकास कार्य किए हैं। इस गाँव में दो करोड़ रुपए का काम चल रहा है। 70-80 लाख रुपए सांसद निधि से दिए है तो 40 लाख रुपए निजी निधि से विकास कार्य के लिए पैसे दिए हैं।’’

पानी के लेकर समस्या पर सवाल पूछने पर जनार्दन शर्मा कहा, "गाँव की महिलाएं चाहती नहीं कि वो साफ़ पानी पिए। इसके लिए उन्हें पैसे देने पड़ते है। वो पैसे देना तो चाहती नहीं तो दूर जाकर पानी लाती हैं।" इतना कहने के बाद जनार्दन ने फोन रख दिया।

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